नेपाल में महाजलप्रलय से तबाही, तिब्बत से आए सैलाब ने इन 5 इलाकों को किया बर्बाद
नेपाल में तिब्बत सीमा के पास आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। ग्लेशियल झील फटने के बाद भोटेकोशी नदी में आए सैलाब ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। रसुवागढ़ी से लेकर चितवन तक घर पुल और सड़कें बर्बाद हुई हैं।

In Short
- तिब्बत में ग्लेशियल झील फटने के बाद भोटेकोशी नदी में आए सैलाब ने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई।
- रसुवागढ़ी टिमुरे स्याफ्रुबेसी और गल्छी कॉरिडोर समेत कई जगहों पर घर पुल सड़कें और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट प्रभावित हुए।
- बाढ़ में 157 से ज्यादा लोगों की मौत और 750 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
नेपाल-चीन सीमा के पास तिब्बत में आए भीषण बर्फीले भूस्खलन और ग्लेशियल झील फटने के बाद नेपाल में अचानक भयंकर जलप्रलय आ गई। 26 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे मलबे और पत्थरों से भरा सैलाब भोटेकोशी नदी के रास्ते नेपाल में दाखिल हुआ।
तेज बहाव के साथ आए पानी और मलबे ने रास्ते में आने वाले बाजारों, घरों, पुलों और सड़कों को अपनी चपेट में ले लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हादसे में 157 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, जबकि 750 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में मानसरोवर यात्रा पर गए करीब 140 भारतीय तीर्थयात्री भी शामिल हैं।
रसुवागढ़ी और टिमुरे में सबसे पहले मची तबाही
नेपाल-चीन सीमा से सटे रसुवागढ़ी और टिमुरे कॉरिडोर में इस जलप्रलय का सबसे पहला असर देखने को मिला। तिब्बत की तरफ से आया पानी, पत्थर और मलबा बेहद तेज रफ्तार से यहां पहुंचा।
इस सैलाब में ऐतिहासिक मितेरी फ्रेंडशिप ब्रिज भी बह गया। टिमुरे का सीमा शुल्क कार्यालय मलबे में दब गया, वहीं चीन से आए कई इलेक्ट्रिक वाहन और कंटेनर ट्रक भी मलबे के साथ बह गए। यह इलाका नेपाल-चीन व्यापार के लिए काफी अहम माना जाता है।
स्याफ्रुबेसी में होटल और घर मलबे में दबे
भोटेकोशी नदी के किनारे बसे स्याफ्रुबेसी बाजार में भी भारी नुकसान हुआ है। यह इलाका लांगटांग ट्रैकिंग और पर्यटन के लिए जाना जाता है।
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अचानक आए तेज बहाव और बड़े बोल्डर्स की वजह से 60 से ज्यादा बहुमंजिला होटल, लॉज और पक्के मकान ढह गए। कई इमारतें सीधे नदी में समा गईं। भूस्खलन के कारण सेना का मुख्य हेलीपैड भी प्रभावित हुआ, जिससे राहत और बचाव कार्यों में मुश्किलें बढ़ गई हैं।
त्रिशूली बाजार और बेत्रावती में घुसा मलबा
भोटेकोशी नदी का पानी आगे बढ़कर त्रिशूली नदी तंत्र में मिला, जिसके बाद नुवाकोट के त्रिशूली बाजार और बेत्रावती इलाके प्रभावित हुए।
करीब 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आए मलबे वाले पानी ने निचले इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया। कई घरों में 6 से 8 फीट तक कीचड़ भर गया और लोगों को छतों पर शरण लेनी पड़ी।
गल्छी कॉरिडोर में टूटी सड़कें और पुल
धादिंग का गल्छी कॉरिडोर भी इस आपदा से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यह रास्ता काठमांडू को देश के दूसरे हिस्सों से जोड़ता है।
नदी के तेज बहाव और पहाड़ी कटाव से यहां 50 से ज्यादा जगहों पर भूस्खलन हुए। करीब 10 किलोमीटर सड़क हिस्से को नुकसान पहुंचा और 19 पक्के पुल बह गए। इससे राहत सामग्री पहुंचाने में भी परेशानी आ रही है।
चितवन और गोरखा तक पहुंचा असर
जलप्रलय का असर पहाड़ी इलाकों से आगे बढ़कर चितवन और गोरखा के निचले क्षेत्रों तक पहुंच गया। नदी किनारे बसे गांवों, खेतों और झुग्गियों में पानी घुस गया।
कई परिवारों को अपना घर और मवेशी छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाना पड़ा। पहाड़ों से आया मलबा और गाद अब मैदानी इलाकों के लिए भी खतरा बन गया है।
13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी प्रभावित
इस आपदा से नेपाल के बिजली ढांचे को भी बड़ा नुकसान पहुंचा है। चिलिमे, रसुवागढ़ी और त्रिशूली-3A समेत करीब 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट प्रभावित हुए हैं।
कई पावरहाउस और ट्रांसमिशन सिस्टम पानी और मलबे की चपेट में आए हैं। अब नेपाल के सामने लापता लोगों की तलाश के साथ ही सड़कों, पुलों, बिजली और संचार व्यवस्था को बहाल करने की बड़ी चुनौती है। भारत की ओर से 10 टन आपातकालीन राहत सामग्री भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है।