Holika Dahan Date: आज या कल - होलिका दहन करना कब सही? जानिए क्या कहती है ज्योतिष गणना
ज्योतिष गणना के अनुसार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 2 मार्च शाम 5 बजकर 57 मिनट तक रहेगी, इसके बाद पूर्णिमा तिथि की शुरुआत होगी जो प्रदोष काल में प्रवेश करेगी। शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन को पूर्णिमा तिथि में, खासकर प्रदोष काल में करना सबसे शुभ होता है।

होलिका दहन की तारीख को लेकर इस बार लोगों के बीच काफी दुविधा है। कुछ लोग आज होलिका दहन मना रहे हैं वहीं कुछ लोग इसे कल यानी 3 मार्च को मनाएंगे।
ज्योतिष गणना के अनुसार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 2 मार्च शाम 5 बजकर 57 मिनट तक रहेगी, इसके बाद पूर्णिमा तिथि की शुरुआत होगी जो प्रदोष काल में प्रवेश करेगी। शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन को पूर्णिमा तिथि में, खासकर प्रदोष काल में करना सबसे शुभ होता है।
पूर्णिमा तिथि और होलिका दहन का समय (वर्ष 2026)
वर्ष 2026 में पूर्णिमा तिथि को लेकर गणना इस प्रकार है:
- पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ: 2 मार्च को शाम 05 बजकर 56 मिनट से
- पूर्णिमा तिथि का समापन: 3 मार्च को शाम 05 बजकर 08 मिनट पर
होलिका दहन कब है?
आजतक के रिपोर्ट के मुताबिक ज्योतिष एक्सपर्ट प्रवीण मिश्रा के अनुसार इस साल होलिका दहन 2 मार्च को ही करना शुभ है। शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन प्रदोष काल में करने का विशेष महत्व है। इसी को देखते हुए 2 मार्च 2026 को शाम 6 बजकर 22 मिनट से रात 8 बजकर 53 मिनट तक का समय होलिका दहन के लिए सबसे उचित है।
3 मार्च को होलिका दहन करना उचित नहीं माना जा रहा है, क्योंकि उस दिन चंद्र ग्रहण है।
क्या 3 मार्च को होलिका दहन उचित है?
होलिका दहन को लेकर अलग-अलग ज्योतिषियों की अलग-अलग राय है। हरिद्वार के विद्वान मनोज त्रिपाठी का कहना है कि होलिका दहन की तारीख में पूर्णिमा के अलावा अन्य चीजें जैसे भद्रा और प्रदोष काल ही अहम होते हैं।
उनके अनुसार 2 मार्च को भद्रा होने के चलते इसका प्रभाव पड़ेगा, ऐसे में शुभ कार्य करना उचित नहीं है। वहीँ 3 मार्च को भद्रा नहीं है लेकिन उस दिन प्रदोष काल में पूर्णिमा तिथि उपलब्ध नहीं होगी।
ऐसे में कुछ ज्योतिषियों का मानना है कि 3 मार्च को भद्रा रहित समय में होलिका दहन करना ज्यादा बेहतर हो सकता है, भले ही प्रदोष काल न मिले, लेकिन सुबह पूर्णिमा के कारण शास्त्र इसकी अनुमति देते हैं।