भारतीय रेलवे का बड़ा प्लान! सीटिंग, लाइटिंग, टॉयलेट...शताब्दी और जन शताब्दी ट्रेनों का होगा बड़ा अपग्रेड

रेलवे ने जिन प्रमुख क्षेत्रों को सुधार के लिए चुना है उनमें टॉयलेट सुविधाएं, सीटिंग कम्फर्ट और ऑनबोर्ड सर्विस शामिल हैं। कोचों में बेहतर फिटिंग्स और ड्रेनेज सिस्टम लगाए जाएंगे। सीटों की अपहोल्स्ट्री को अपग्रेड किया जाएगा, जबकि चार्जिंग पोर्ट और स्नैक टेबल जैसी सुविधाओं को भी बेहतर बनाया जाएगा।

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By Gaurav Kumar:

Indian Railways News: भारतीय रेल ने प्रीमियम ट्रेनों में सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। शताब्दी एक्सप्रेस के साथ-साथ जन शताब्दी ट्रेनों का भी अपग्रेडेशन शुरू किया गया है। यह पहल ऐसे समय में आई है जब रेल नेटवर्क में वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे ने जिन प्रमुख क्षेत्रों को सुधार के लिए चुना है उनमें टॉयलेट सुविधाएं, सीटिंग कम्फर्ट और ऑनबोर्ड सर्विस शामिल हैं। कोचों में बेहतर फिटिंग्स और ड्रेनेज सिस्टम लगाए जाएंगे। सीटों की अपहोल्स्ट्री को अपग्रेड किया जाएगा, जबकि चार्जिंग पोर्ट और स्नैक टेबल जैसी सुविधाओं को भी बेहतर बनाया जाएगा।

इसके अलावा, यात्रा के दौरान झटकों को कम करने के लिए कोचों की राइड क्वालिटी में सुधार किया जाएगा। वेस्टिब्यूल एरिया, गैंगवे, फ्लोरिंग और पैनल्स को भी नया रूप दिया जाएगा ताकि अंदरूनी माहौल अधिक आधुनिक लगे।

रेलवे बोर्ड का सख्त निर्देश

रेलवे बोर्ड ने सभी जोन को निर्देश दिया है कि वे ट्रेनों की विस्तृत जांच करें और समयबद्ध एक्शन प्लान तैयार करें। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार फोकस ट्रेनों को आधुनिक बनाने और यात्रियों की बढ़ती उम्मीदों पर खरा उतरने का है, खासकर सफाई, भरोसेमंद सेवा और आधुनिक सुविधाओं के मामले में।

लाइटिंग, डिजिटल सिस्टम और सुरक्षा में सुधार

प्लान के मुताबिक कोचों की लाइटिंग बेहतर करने, ट्रेनों के बाहरी लुक को सुधारने और स्पष्ट डेस्टिनेशन बोर्ड लगाने पर भी जोर दिया गया है। डिजिटल पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम (PAPIS) को मजबूत किया जाएगा ताकि यात्रियों को रियल-टाइम जानकारी मिल सके। सुरक्षा के लिए CCTV आधारित निगरानी प्रणाली भी जोड़ी जाएगी, जिससे ट्रेन के अंदर सुरक्षा और संचार दोनों बेहतर होंगे।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी कवायद यात्री-केंद्रित सुधारों पर आधारित है। सभी जोनल रेलवे को ऑडिट करने, कमियों की पहचान करने और सख्त मॉनिटरिंग के तहत सुधार लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

देशभर में फिलहाल करीब 25 जोड़ी शताब्दी एक्सप्रेस और दो दर्जन से ज्यादा जन शताब्दी ट्रेनें प्रमुख शहरों को जोड़ती हैं। ऐसे में यह अपग्रेडेशन सीधे लाखों यात्रियों के अनुभव को प्रभावित करेगा।

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