रेलवे का बड़ा बदलाव: बढ़ेगी ट्रेन सुरक्षा, 81% ट्रैक हाई स्पीड के लिए तैयार, जानिए कहां खर्च हो रहा पैसा

भारतीय रेलवे में सेफ्टी और स्पीड बढ़ाने के लिए बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। कवच सिस्टम के विस्तार से लेकर ट्रैक अपग्रेड और नए प्रोजेक्ट तक रेलवे का प्लान काफी बड़ा है। लेकिन इसी बीच कमाई और खर्च का गणित भी चर्चा में है। जानिए पूरी तस्वीर।

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In Short

  • रेलवे का सेफ्टी बजट बढ़कर 2026-27 में 1.20 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंचा।
  • कवच 4.0 का विस्तार 2,633 रूट किलोमीटर तक हुआ, हजारों किलोमीटर पर काम जारी।
  • 81% रेलवे ट्रैक अब 110 KMPH या उससे ज्यादा स्पीड के लिए तैयार।

By Gaurav Kumar:

भारतीय रेलवे आने वाले समय के लिए अपने नेटवर्क को ज्यादा सुरक्षित, तेज और आधुनिक बनाने पर तेजी से काम कर रहा है। 2026-27 में रेलवे का कुल बजट ग्रांट 2,93,030 करोड़ रुपये है, जिसमें जुलाई 2026 तक 1,14,973 करोड़ रुपये यानी करीब 39% खर्च हो चुके हैं। रेलवे का फोकस नई लाइनें बिछाने के साथ-साथ सेफ्टी सिस्टम, ट्रैक अपग्रेडेशन और कर्मचारियों की ट्रेनिंग पर भी है। हालांकि दूसरी तरफ रेलवे की अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा पहले से तय खर्चों में चला जा रहा है।

सेफ्टी बजट बढ़कर 1.20 लाख करोड़ रुपये के पार

रेलवे ने सुरक्षा से जुड़े कामों पर खर्च में लगातार बढ़ोतरी की है। 2013-14 में जहां सेफ्टी से जुड़े कामों का बजट 39,200 करोड़ रुपये था, वहीं 2026-27 में यह बढ़कर 1,20,389 करोड़ रुपये हो गया है। 2024-25 में यह खर्च 1,14,022 करोड़ रुपये और 2025-26 में 1,17,693 करोड़ रुपये था। रेलवे का कहना है कि लगातार उठाए गए सुरक्षा कदमों से रेल हादसों में कमी आई है।

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कवच सिस्टम का तेजी से हो रहा विस्तार

ट्रेन सुरक्षा के लिए रेलवे स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम कवच का विस्तार कर रहा है। कवच सिस्टम जरूरत पड़ने पर ट्रेन की स्पीड को नियंत्रित कर सकता है और तय सीमा से ज्यादा स्पीड होने पर अपने आप ब्रेक लगाने में मदद करता है।

31 जुलाई 2026 तक कवच 4.0 को 2,633 रूट किलोमीटर पर शुरू किया जा चुका है। इसमें दिल्ली-मुंबई रूट के 1,423 RKm और दिल्ली-हावड़ा रूट के 1,210 RKm शामिल हैं। इसके अलावा 21,794 RKm पर ट्रैक साइड कवच लगाने का काम चल रहा है।

अब तक 11,547 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल, 1,721 टेलीकॉम टावर, 1,009 स्टेशन डेटा सेंटर और 7,726 RKm पर ट्रैक साइड इक्विपमेंट लगाया जा चुका है। 6,290 लोको में कवच लगाया जा चुका है, जबकि 7,190 लोको और 1,200 EMU/MEMU में इसे लगाने का काम जारी है। जून 2026 तक कवच पर 3,875 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं और 2026-27 के लिए 2,066 करोड़ रुपये का एलोकेशन रखा गया है।

81% रेलवे ट्रैक अब ज्यादा स्पीड के लिए तैयार

रेलवे सिर्फ सुरक्षा ही नहीं बल्कि ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने पर भी काम कर रहा है। 2014 में 130 KMPH या उससे ज्यादा स्पीड वाले ट्रैक 5,036 किलोमीटर थे, जो 2026 में बढ़कर 24,173 किलोमीटर हो गए हैं। वहीं 110 से 130 KMPH स्पीड वाले ट्रैक 26,409 किलोमीटर से बढ़कर 62,482 किलोमीटर हो चुके हैं।

रेलवे के मुताबिक अब करीब 81% ट्रैक 110 KMPH या उससे ज्यादा स्पीड के लिए अपग्रेड हो चुके हैं। दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा रूट को मिशन रफ्तार के तहत 160 KMPH तक अपग्रेड किया जा रहा है।

514 प्रोजेक्ट पर 8.31 लाख करोड़ रुपये खर्च की तैयारी

रेलवे में इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार के लिए बड़े स्तर पर काम चल रहा है। 1 अप्रैल 2026 तक रेलवे में 514 प्रोजेक्ट मंजूर हैं। इनमें 169 नई लाइन, 29 गेज कन्वर्जन और 316 डबलिंग प्रोजेक्ट शामिल हैं।

इन सभी प्रोजेक्ट की कुल लंबाई करीब 40,000 किलोमीटर है और इन पर अनुमानित लागत 8.31 लाख करोड़ रुपये है। इसके अलावा रेलवे हर साल करीब छह लाख कर्मचारियों को स्किल और टेक्निकल ट्रेनिंग भी दे रहा है, ताकि नई टेक्नोलॉजी वाले नेटवर्क को बेहतर तरीके से चलाया जा सके।

रेलवे की अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा तय खर्चों में जा रहा

रेलवे की कमाई बढ़ रही है, लेकिन खर्च का दबाव भी लगातार बना हुआ है। 2026-27 में रेलवे की इंटरनल रेवेन्यू यानी अपनी कमाई करीब 3.02 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। इसमें फ्रेट से करीब 1.89 लाख करोड़ रुपये यानी 62% और पैसेंजर सर्विस से 87,300 करोड़ रुपये यानी 29% कमाई का अनुमान है।

लेकिन रेलवे की कमाई का बड़ा हिस्सा सैलरी, पेंशन और लीज पेमेंट में खर्च हो जाता है। 2026-27 में इंटरनल रेवेन्यू का 41% हिस्सा कर्मचारियों की सैलरी और 25% पेंशन पर खर्च होने का अनुमान है। सैलरी, पेंशन और लीज लायबिलिटी मिलाकर करीब 90% रेवेन्यू खर्च होने की संभावना है।

कैपिटल खर्च के लिए सरकार पर निर्भर रेलवे

2026-27 में रेलवे का कैपिटल एक्सपेंडिचर 2,93,030 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। इसमें केंद्र सरकार से 2,78,030 करोड़ रुपये का बजट सपोर्ट मिलेगा, जो कुल कैपिटल खर्च का करीब 95% है।

वहीं रेलवे का ऑपरेटिंग रेश्यो 98.4% रहने का अनुमान है। आसान भाषा में इसका मतलब है कि रेलवे 100 रुपये कमाने के लिए करीब 98.40 रुपये खर्च कर रहा है। ऐसे में अपने पैसे से बड़े प्रोजेक्ट चलाने की गुंजाइश सीमित रहती है और सरकार की मदद जरूरी बनी रहती है।

रेलवे एक तरफ सेफ्टी, स्पीड और आधुनिक तकनीक पर बड़ा निवेश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ वित्तीय दबाव के बीच खर्च और कमाई का संतुलन बनाना भी उसके लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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