होर्मुज की टेंशन भारत को अब ज्यादा नहीं...रूस के बाद अब इस देश से आ रही तेल की बड़ी खेप
मिडिल ईस्ट तनाव के बीच तेल की कीमतें बढ़ने पर भारत ने सप्लाई को सुरक्षित करने के लिए वेनेजुएला से कच्चा तेल आयात बढ़ाया है। रूस, ईरान और अन्य देशों के साथ विविधता लाकर भारत कीमतों को नियंत्रित करने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की रणनीति अपना रहा है।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया को तेल संकट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 112 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुकी हैं, जिससे कई देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं।
ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में भारत ने अपनी रणनीति बदलते हुए कच्चे तेल के आयात के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं। रूस और ईरान से तेल खरीदने के साथ-साथ अब भारत को वेनेजुएला से तेल की एक बहुत बड़ी खेप मिलने वाली है, जो घरेलू बाजार में कीमतों को काबू में रखने में मददगार साबित हो सकती है।
वेनेजुएला से तेल की वापसी
कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, इस महीने वेनेजुएला से लगभग 10 से 12 मिलियन बैरल कच्चा तेल भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है। करीब एक साल के लंबे अंतराल के बाद दक्षिण अमेरिकी देश से तेल की यह सप्लाई शुरू हो रही है।
आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक एनर्जी एक्सपर्ट डॉ. मेहता का मानना है कि भारतीय रिफाइनरी कंपनियां अब किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय अपने ऑप्शन में विविधता ला रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि अप्रैल में आने वाले इस स्टॉक को हालिया तनाव शुरू होने से काफी पहले ही सुरक्षित कर लिया गया था, जो भारत की दूरदर्शी सोच को दिखाता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का ऑप्शन
युद्ध के हालातों में अक्सर समुद्री व्यापारिक रास्ते जैसे 'होर्मुज' बंद होने का खतरा रहता है। ऐसी स्थिति में वेनेजुएला भारत के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच की तरह है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वेनेजुएला से आ रहे तेल के कुछ हिस्से को कोच्चि बंदरगाह पर उतारा जा सकता है, जहां बीपीसीएल (BPCL) की रिफाइनरी इसे प्रोसेस करेगी। अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों में ढील और शर्तों के साथ मिली मंजूरी के बाद ही भारतीय रिफाइनरियों और अमेरिका के बीच यह डील संभव हो पाई है। भारत अब न केवल रूस और ईरान, बल्कि अंगोला जैसे अफ्रीकी देशों से भी तेल मंगवा रहा है।
क्यों अहम है वेनेजुएला का खजाना?
वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार है। हालांकि, यहां का तेल काफी भारी (Heavy Crude) होता है, जिसे रिफाइन करना थोड़ा खर्चीला और जटिल है, लेकिन इसकी भारी मात्रा लंबी अवधि की सप्लाई के लिए बहुत भरोसेमंद है। भारत जैसे बड़े कंज्यूमर के लिए वेनेजुएला का साथ मिलना युद्ध के असर को कम करने और देश के भीतर तेल की कीमतों को स्थिर रखने की दिशा में एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।