भारत और यूरोप के बीच महा-डील करीब! इंपोर्ट ड्यूटी 110% से घटकर 40% संभव; BMW, Renault कारें हो सकती हैं सस्ती

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से चल रही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की बातचीत अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नई दिल्ली और ब्रुसेल्स इस बड़े समझौते का ऐलान मंगलवार को ही कर सकते हैं।

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By Gaurav Kumar:

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से चल रही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की बातचीत अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नई दिल्ली और ब्रुसेल्स इस बड़े समझौते का ऐलान मंगलवार को ही कर सकते हैं।

इस डील की सबसे खास बात यह है कि भारत अपने ऑटो सेक्टर को विदेशी कंपनियों के लिए खोलने की तैयारी में है, जो अब तक काफी सुरक्षित बाजार माना जाता था।

यूरोपीय कारों पर घटेगी ड्यूटी

इस समझौते के तहत भारत यूरोपीय संघ से आने वाली कारों पर लगने वाली भारी-भरकम इंपोर्ट ड्यूटी को घटाकर 40% करने का प्रस्ताव दे रहा है। वर्तमान में यह ड्यूटी 110% तक है।

सूत्रों के मुताबिक, भारत सरकार शुरुआती तौर पर उन कारों पर टैक्स कम करने के लिए सहमत हो गई है जिनकी कीमत 15,000 यूरो (करीब 13.5 लाख रुपये) से ज्यादा है। भविष्य में इस टैरिफ को धीरे-धीरे घटाकर 10% तक लाने की योजना है। इससे फॉक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू जैसे यूरोपीय ब्रांड्स के लिए भारतीय बाजार में पहुंच आसान हो जाएगी।

घरेलू बाजार में बड़े बदलाव की आहट

दुनिया के तीसरे सबसे बड़े कार बाजार भारत में अब तक विदेशी प्रतिस्पर्धा को रोकने के लिए ऊंचे टैक्स का सहारा लिया जाता था। एलन मस्क जैसे दिग्गज भी अक्सर इन ऊंची दरों की आलोचना कर चुके हैं।

नए प्रस्ताव के तहत, भारत सालाना लगभग 2 लाख पेट्रोल-डीजल इंजन वाली कारों के लिए ड्यूटी में कटौती कर सकता है। यह कदम घरेलू बाजार को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए खोलने की भारत की सबसे आक्रामक कोशिश मानी जा रही है।

इसका सीधा फायदा लग्जरी और मास-मार्केट सेगमेंट की यूरोपीय कंपनियों को होगा, जो अभी भारत में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए संघर्ष कर रही हैं।

इलेक्ट्रिक वाहनों पर अभी राहत नहीं

हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के मामले में भारत अभी भी फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। महिंद्रा एंड महिंद्रा और टाटा मोटर्स जैसी घरेलू कंपनियों के निवेश को बचाने के लिए शुरुआती पांच साल तक ईवी को इस ड्यूटी कटौती से बाहर रखा जाएगा।

पांच साल पूरे होने के बाद ही इलेक्ट्रिक कारों पर टैक्स कम करने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में बन रही इलेक्ट्रिक कारों को बाजार में बराबर का मौका मिले।

क्यों जरूरी है यह समझौता?

भारत और यूरोपीय संघ के बीच इस समझौते को 'Mother of all Deals' कहा जा रहा है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका ने अगस्त के आखिर से भारतीय कपड़ा और ज्वेलरी जैसे एक्सपोर्ट्स पर 50% टैरिफ लगा दिया है।

ऐसे में यूरोप के साथ यह डील भारतीय निर्यातकों के लिए नई उम्मीद लेकर आएगी। वर्तमान में भारत के सालाना 44 लाख यूनिट्स के कार बाजार में यूरोपीय कंपनियों की हिस्सेदारी 4% से भी कम है।

सुजुकी, टाटा और महिंद्रा जैसे ब्रांड्स का यहां दबदबा है। लेकिन 2030 तक बाजार के 60 लाख यूनिट्स तक पहुंचने की उम्मीद है, जिसे देखते हुए फॉक्सवैगन और रेनो जैसी कंपनियां अब नए निवेश और नई रणनीतियों के साथ तैयार हैं।

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