वजन घटाने वाली दवा कैसे काम करती हैं? डॉक्टर से जानिए किन साइड इफेक्ट्स का रहता है खतरा

बिजनेस टुडे को फोर्टिस सी-डीओसी हॉस्पिटल फॉर डायबिटीज एंड एलाइड साइंसेज के अध्यक्ष और नेशनल डायबिटीज, ओबेसिटी एंड कोलेस्ट्रॉल फाउंडेशन के निदेशक, डॉ. अनूप मिश्रा ने इन दवाओं के साइड इफेक्ट्स को बताया है।

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By Gaurav Kumar:

वजन घटाने वाली GLP-1 receptor agonist दवाओं का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। सोशल मीडिया, सेलिब्रिटी इस्तेमाल और बढ़ती मांग के बीच इन दवाओं ने मोटापा कम करने के ऐसे नतीजे दिए हैं, जिन्हें पहले हासिल करना मुश्किल माना जाता था। लेकिन इनके बढ़ते इस्तेमाल के साथ मिसयूज, साइड इफैक्ट और लॉन्ग टर्म सेफ्टी को लेकर चिंताएं भी बढ़ी हैं।

बिजनेस टुडे को फोर्टिस सी-डीओसी हॉस्पिटल फॉर डायबिटीज एंड एलाइड साइंसेज के अध्यक्ष और नेशनल डायबिटीज, ओबेसिटी एंड कोलेस्ट्रॉल फाउंडेशन के निदेशक, डॉ. अनूप मिश्रा ने बताया कि ये दवाएं डाइट और एक्सरसाइज का ऑप्शन नहीं हैं और इन्हें केवल मेडिकल निगरानी में ही इस्तेमाल करना चाहिए।

कैसे काम करती हैं ये दवाएं?

GLP-1 दवाएं शरीर में भोजन के बाद बनने वाले एक प्राकृतिक हार्मोन की तरह काम करती हैं। ये पेट खाली होने की प्रक्रिया को धीमा करती हैं, भूख कम करती हैं और ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने में मदद करती हैं। इससे व्यक्ति को लंबे समय तक पेट भरा महसूस होता है और वजन कम होने लगता है। नई दवाएं जैसे Ozempic, Wegovy और Mounjaro ने क्लिनिकल ट्रायल्स में बड़े स्तर पर वजन घटाने के नतीजे दिखाए हैं।

डॉ. मिश्रा के मुताबिक ये दवाएं केवल वजन कम नहीं करतीं बल्कि ब्लड शुगर कंट्रोल, इंसुलिन सेंसिटिविटी और दिल की बीमारियों के जोखिम को भी कम करती हैं। फैटी लिवर, स्लीप एपनिया और घुटने का ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसे मामलों में भी इनसे फायदा देखा गया है।

उन्होंने कहा कि मोटापे के साथ डायबिटीज, हार्ट डिजीज या लिवर से जुड़ी बीमारी वाले मरीजों के लिए ये दवाएं ज्यादा उपयोगी साबित हो सकती हैं।

किन साइड इफेक्ट्स का रहता है खतरा?

इन दवाओं के सबसे आम साइड इफेक्ट्स में मतली, उल्टी, दस्त और कब्ज शामिल हैं। खासकर डोज बढ़ाने के दौरान ये समस्याएं ज्यादा दिखती हैं। तेजी से वजन घटने के कारण मसल लॉस भी हो सकता है, जो कुछ मामलों में कुल घटे वजन का 30-35% तक पहुंच जाता है।

कुछ मरीजों में माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी, अनियमित खानपान और दवा पर अत्यधिक निर्भरता जैसी दिक्कतें भी देखी गई हैं। डॉक्टरों ने पैन्क्रियाटाइटिस, डायबिटिक आई डिजीज और गंभीर कब्ज जैसे जोखिमों पर भी नजर रखने की सलाह दी है।

तेजी से फैट कम होने के कारण चेहरे में बदलाव को 'Ozempic face' कहा जा रहा है। वहीं एनिमल स्टडीज में थायराइड कैंसर के संभावित खतरे की भी बात सामने आई है, हालांकि इंसानों में इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है।

डॉक्टरों ने दी सावधानी की सलाह

डॉ. मिश्रा ने चेतावनी दी कि कई लोग बिना मेडिकल जांच के इन दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। कुछ लोग इन्हें कॉस्मेटिक वजन घटाने के लिए भी ले रहे हैं, जबकि वे क्लिनिकल क्राइटेरिया में फिट नहीं बैठते। उन्होंने कहा कि अगर दवा बंद करने के बाद डाइट और एक्सरसाइज जारी नहीं रखी गई तो एक साल के भीतर 60-70% तक वजन वापस बढ़ सकता है।

भारत में इन दवाओं की कीमत 10,000 से 25,000 रुपये प्रति माह तक है, हालांकि जेनरिक ऑप्शन आने से कीमतों में कुछ राहत दिख रही है।

क्या करें मरीज?

डॉक्टरों के मुताबिक मरीजों को प्रोटीन रिच डाइट लेनी चाहिए, ज्यादा खाने या खाना ना खाने से बचना चाहिए और नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करनी चाहिए ताकि मसल मास बना रहे। साथ ही दवाओं का इस्तेमाल हमेशा डॉक्टर की निगरानी में करना चाहिए और किसी भी गंभीर लक्षण पर तुरंत सलाह लेनी चाहिए।

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