क्या ग्रीस बन रहा है अमीर भारतीयों के लिए दुसरा दुबई? गोल्डन वीजा स्कीम में बढ़ी दिलचस्पी
अमीर भारतीय अब ग्रीस की गोल्डन वीजा स्कीम के जरिए यूरोप में दूसरा निवास हासिल करने की ओर बढ़ रहे हैं। कम निवेश, शेंगेन यात्रा और बिना रहने की शर्त इसे आकर्षक बना रहे हैं। हालांकि दुबई अभी भी कमाई और बिजनेस के लिए प्राथमिक विकल्प बना हुआ है, जबकि ग्रीस लाइफस्टाइल और विविधीकरण के लिए चुना जा रहा है।

यूरोप में दूसरा निवास (सेकंड रेजिडेंसी) पाने के लिए अब अमीर भारतीयों की नजर ग्रीस (Greece) पर टिकने लगी है। ग्रीस की गोल्डन वीजा स्कीम, जिसमें €250,000 (करीब ₹2.7 करोड़) के रियल एस्टेट निवेश पर रेजिडेंसी मिलती है, हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) को तेजी से आकर्षित कर रही है।
हाल के महीनों में भारतीयों की तरफ से इस स्कीम में पूछताछ और आवेदन बढ़े हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह शेंगेन क्षेत्र में वीजा-फ्री यात्रा, कम निवेश सीमा और बिना अनिवार्य निवास की शर्त है।
क्यों बढ़ रही है ग्रीस की मांग?
अन्य देशों की नीतियों में बदलाव ने भी ग्रीस को बढ़त दी है। पुर्तगाल ने रियल एस्टेट को अपने गोल्डन वीजा प्रोग्राम से बाहर कर दिया, जबकि अमेरिकी EB-5 वीजा महंगा हो गया है। ऐसे में ग्रीस यूरोप में एंट्री का आसान विकल्प बनकर उभरा है।
साथ ही, वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव जैसे ग्लोबल फैक्टर्स निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को जियोपॉलिटिकली फैलाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
दुबई से तुलना
हालांकि, ग्रीस की बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद दुबई की जगह को चुनौती नहीं मिल रही। जेनिका वेंचर्स के सीईओ अभिषेक राज ने कहा कि यह प्रतिस्थापन नहीं, बल्कि निवेश का विविधीकरण है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, दुबई आज भी बिजनेस, टैक्स एफिशिएंसी और इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण भारतीय निवेशकों की पहली पसंद है। वहीं ग्रीस को मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, ग्लोबल मोबिलिटी और एसेट डाइवर्सिफिकेशन के तौर पर देखा जा रहा है।
निवेश का अलग-अलग खेल
NKlusive के मनीष अग्रवाल के अनुसार, ग्रीस एक पैसिव निवेश का विकल्प है जहां रोजगार या बिजनेस के मौके सीमित हैं। इसके उलट, दुबई वेल्थ क्रिएशन और बिजनेस ग्रोथ के लिए बेहतर प्लेटफॉर्म देता है।
Yugen Infra के विजय कुमार अग्रवाल कहते हैं कि ग्रीस में प्रॉपर्टी वैल्यूएशन, रेंटल यील्ड और मेडिटेरेनियन लाइफस्टाइल निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं। यह अब “लाइफस्टाइल + लेगेसी प्लानिंग” का हिस्सा बन रहा है।
टैक्स और रणनीति
यूएई में 0% पर्सनल टैक्स, आसान नियम और 10 साल का गोल्डन वीजा इसे बिजनेस हब बनाते हैं। वहीं ग्रीस का नॉन-डोम टैक्स सिस्टम €100,000 सालाना फ्लैट टैक्स के साथ आता है, लेकिन EU रेजिडेंसी और स्थिरता का फायदा देता है।
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अब निवेशक “या तो” की बजाय “दोनों” का रास्ता अपना रहे हैं। दुबई को कमाई और बिजनेस के लिए, जबकि ग्रीस को रेजिडेंसी और लाइफस्टाइल के लिए चुना जा रहा है। यानी ग्रीस नया दुबई नहीं बन रहा, बल्कि अमीर भारतीयों की ग्लोबल स्ट्रैटेजी में एक पूरक भूमिका निभा रहा है।