बजट से पहले MCX पर भूचाल! सोना, चांदी, जिंक...सब धड़ाम; क्रिप्टो भी गिरा

केंद्रीय बजट 2026 से पहले रविवार को हुई MCX की स्पेशल ट्रेडिंग सेशन में सोना और चांदी में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। दोनों मेटल 6 फीसदी के लोअर सर्किट में फंस गईं। ग्लोबल बाजारों में जारी भारी गिरावट का असर सीधे भारतीय कमोडिटी बाजारों पर पड़ा और निवेशकों में घबराहट साफ दिखी।

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By Gaurav Kumar:

Gold-Silver: केंद्रीय बजट 2026 से पहले रविवार को हुई MCX की स्पेशल ट्रेडिंग सेशन में सोना और चांदी में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली। दोनों मेटल 6 फीसदी के लोअर सर्किट में फंस गईं। ग्लोबल बाजारों में जारी भारी गिरावट का असर सीधे भारतीय कमोडिटी बाजारों पर पड़ा और निवेशकों में घबराहट साफ दिखी।

चांदी में ऐतिहासिक गिरावट

MCX पर चांदी की कीमतों में रविवार को हालात और बिगड़े। चांदी 9 फीसदी तक टूटकर दिन के तीसरे सर्किट को छूते हुए 2,65,652 रुपये तक फिसल गई। आज इंट्राडे को ही चांदी 26,000 रुपये से ज्यादा टूट चुकी थी। अपने ऑल-टाइम हाई करीब 4,20,000 रुपये से चांदी अब महज 48 घंटे में 37 फीसदी यानी करीब 1,55,000 रुपये नीचे आ चुकी है।

सोने में भी भारी दबाव

सोने के वायदा भाव भी चांदी के साथ लुढ़क गए। MCX पर गोल्ड करीब 9 फीसदी गिरकर 1.37 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ गया। रिकॉर्ड स्तर से अब तक सोना 45,000 से 50,000 रुपये तक टूट चुका है।

अन्य मेटल पर भी असर

कीमती धातुओं की गिरावट का असर बेस मेटल्स पर भी दिखा। MCX पर कॉपर करीब 8 फीसदी और जिंक लगभग 4 फीसदी कमजोर हुआ।

ग्लोबल फैक्टर बने बड़ी वजह

ग्लोबल कमोडिटी बाजारों में यह बिकवाली मुनाफावसूली और मजबूत अमेरिकी डॉलर के चलते तेज हुई। निवेशक अमेरिका में फेड चेयर के तौर पर डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा केविन वॉर्श से लेकर जेरोम पॉवेल तक का संभावित उत्तराधिकारी नामित किए जाने को ‘हॉकीश’ संकेत के तौर पर देख रहे हैं। साथ ही ऊंची महंगाई के आंकड़ों ने भी दबाव बढ़ाया।

बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि लंबे समय की तेजी के बाद मुनाफावसूली और डॉलर की मजबूती ने माहौल बिगाड़ा। इस ग्लोबल गिरावट से कीमती धातुओं के बाजार से करीब 63 लाख करोड़ रुपये साफ हो चुके हैं। सोने की यह गिरावट चार दशकों में सबसे तेज मानी जा रही है।

क्रिप्टो में भी कमजोरी

दूसरी ओर, दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin भी दबाव में रही और 24 घंटे में 8 फीसदी से ज्यादा गिरकर मुश्किल से 77,000 डॉलर के स्तर पर टिक पाई। निवेशकों को आशंका है कि आगे चलकर वित्तीय सिस्टम से नकदी सख्त की जा सकती है।

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