Festive Jobs: त्योहारों से पहले कंपनियों की बड़ी तैयारी, पांच लाख अतिरिक्त लोगों को मिल सकता है काम
त्योहारी सीजन से पहले कंपनियों ने हायरिंग की रफ्तार बढ़ा दी है। FMCG, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स और सेल्स जैसे सेक्टर्स में नए मौके बन रहे हैं। टेम्परेरी स्टाफ की मांग के साथ सैलरी में भी बढ़ोतरी के संकेत हैं। जानिए किन शहरों और जॉब रोल्स में सबसे ज्यादा मौके मिल सकते हैं।

In Short
- फेस्टिव सीजन में कम से कम 5 लाख अतिरिक्त जॉब्स बनने की उम्मीद
- 2021 के मुकाबले कर्मचारियों की मांग 20-25% ज्यादा रहने का अनुमान
- डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टर्स में हायरिंग 25-30% तक बढ़ने की उम्मीद
त्योहारी सीजन शुरू होते ही कंपनियां ज्यादा बिक्री की तैयारी में जुट गई हैं। इस दौरान बाजार में खरीदारी बढ़ती है, इसलिए FMCG, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, लॉजिस्टिक्स और रिटेल जैसे सेक्टर्स को ज्यादा मैनपावर की जरूरत पड़ती है। कंपनियां इस बार टेम्परेरी स्टाफ से लेकर सेल्स और कस्टमर सपोर्ट तक कई रोल्स में हायरिंग बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। यानी फेस्टिव डिमांड का असर सिर्फ बिक्री पर नहीं, बल्कि जॉब मार्केट पर भी साफ दिखाई देने वाला है।
पांच लाख अतिरिक्त नौकरियां बनने की उम्मीद
फेस्टिव सीजन में हायरिंग मोमेंटम फिर मजबूत हुआ है। पिछले दो वर्षों में रिवर्स माइग्रेशन, कारोबार में अनिश्चितता और शटडाउन जैसी चुनौतियां देखने को मिली थीं। अब ज्यादातर सेक्टर्स में हायरिंग बढ़ने के संकेत हैं। अनुमान है कि त्योहारी सीजन के कारण कम से कम पांच लाख अतिरिक्त जॉब्स पैदा हो सकती हैं। यह मांग 2021 के मुकाबले 20 से 25 फीसदी ज्यादा बताई गई है।
सीजनल कर्मचारियों की सैलरी भी बढ़ सकती है
वर्कफोर्स की मोबिलिटी कंपनियों के लिए एक चुनौती बनी हुई है। पोस्ट-पैंडेमिक दौर में कर्मचारी बेहतर हाइजीन और ज्यादा सैलरी वाले अवसरों को प्राथमिकता दे रहे हैं। 2022 में सीजनल कर्मचारियों की औसत सैलरी पिछले साल के मुकाबले 8 से 10 फीसदी ज्यादा रहने का अनुमान है। वहीं B2C सेल्सपर्सन को बनाए रखने के लिए पेंडिंग सैलरी हाइक अब 25 फीसदी तक पहुंच सकती है।
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इन शहरों में ज्यादा दिख रही हायरिंग
मेट्रो शहरों में डिमांड तेजी से बढ़ी है। खास तौर पर बेंगलुरु, दिल्ली और चेन्नई में ज्यादा ग्रोथ देखने को मिली है। इसके पीछे बड़े स्तर पर इंटरनेट एडॉप्शन, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और छोटे व मझोले कारोबारों यानी SMEs में बढ़ता डिजिटल एडॉप्शन अहम वजह हैं।
इन रोल्स में बढ़ रही कर्मचारियों की जरूरत
फेस्टिव सीजन में कंपनियों को इन-स्टोर प्रमोटर्स, काउंटर स्टाफ, मर्चेंडाइजर्स, कस्टमर सपोर्ट, ऑनबोर्डिंग पार्टनर्स, ऑडिटिंग, पैकिंग, कस्टमर सर्विस, लोडर-अनलोडर और सेल्स रोल्स के लिए ज्यादा लोगों की जरूरत है। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां खास तौर पर शॉर्ट-टर्म टेम्परेरी स्टाफ जोड़ रही हैं।
कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 20 फीसदी ज्यादा वर्कफोर्स
फेस्टिव सीजन के लिए कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री अपने मौजूदा वर्कफोर्स में करीब 20 फीसदी अतिरिक्त कर्मचारियों को जोड़ने की तैयारी में है। इन कर्मचारियों को औसतन 45 से 60 दिनों के लिए रखा जा सकता है। इन-स्टोर प्रमोटर्स की मांग सबसे ज्यादा रहने की उम्मीद है।
डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स में भी तेज हायरिंग
फीट-ऑन-स्ट्रीट यानी FOS सेल्सपर्सन की मांग गर्मियों के बाद तेजी से वापस आई है। डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स जैसे कंज्यूमर-फेसिंग सेक्टर्स में हायरिंग 25 से 30 फीसदी तक बढ़ने की उम्मीद है। सप्लाई चेन सेक्टर भी पिछले कुछ महीनों की रुकावटों के बाद भर्ती प्रक्रिया तेज कर रहा है।
स्किल्ड वर्कफोर्स पर कंपनियों का फोकस
डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन बढ़ने के कारण कंपनियों को ऐसे कर्मचारियों की जरूरत है जो नई टेक्नोलॉजी के हिसाब से खुद को जल्दी ढाल सकें। FMCD सेक्टर में नए प्रोडक्ट लॉन्च और व्हाइट गुड्स की बढ़ती मांग के बीच स्किल्ड काउंटर स्टाफ और इन-स्टोर प्रमोटर्स अहम हो गए हैं। कर्मचारियों को बनाए रखने के लिए बोनस और इंसेंटिव भी दिए जा रहे हैं।
महंगाई से कुछ डिमांड प्रभावित हो सकती है, इसलिए कंपनियां कुल बिक्री को लेकर सतर्क हैं। इसके बावजूद पिछले दो वर्षों के मुकाबले बेहतर सेल्स की उम्मीद है और कंपनियां टेम्परेरी स्टाफ की हायरिंग में करीब 20 फीसदी बढ़ोतरी की तैयारी कर रही हैं।