कंही आप तो नहीं फंस रहे इंजीनियरिंग कॉस्ट ट्रैप में? डिग्री में ₹34 लाख का खर्चा और शुरुआती सैलरी सिर्फ ₹5 लाख

क्या भारत में इंजीनियरिंग और एमबीए जैसी डिग्रियां अब फायदे का सौदा नहीं रहीं? तेजी से बढ़ती पढ़ाई की लागत और उम्मीद से कम सैलरी ने मिडिल क्लास की चिंता बढ़ा दी है। एक नई रिपोर्ट कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने लाती है जो आपके करियर फैसले पर असर डाल सकते हैं।

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By Gaurav Kumar:

भारत में उच्च शिक्षा अब एक सुरक्षित निवेश के बजाय एक महंगा सौदा साबित हो रही है। '1 फाइनेंस ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक 2026' की ताजा रिपोर्ट ने मिडिल क्लास परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत का एजुकेशन सिस्टम 'इंजीनियरिंग कॉस्ट ट्रैप' यानी खर्च के जाल में फंस गया है।

आज एक छात्र को इंजीनियरिंग की डिग्री लेने में करीब 34.1 लाख रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं, जबकि नौकरी मिलने पर उसे औसतन केवल 4.74 लाख रुपये का सालाना पैकेज मिल रहा है। यह आंकड़ा साफ बताता है कि पढ़ाई पर होने वाला खर्च और उससे मिलने वाली कमाई के बीच का तालमेल पूरी तरह बिगड़ चुका है।

डिग्री महंगी और कमाई कम

शिक्षा के क्षेत्र में महंगाई जिस रफ्तार से बढ़ी है, उस रेश्यो में सैलरी नहीं। आज कई परिवार बच्चों की पढ़ाई पर 30 से 40 लाख रुपये लगा रहे हैं, लेकिन डिग्री पूरी होने के बाद छात्र 4 से 6 लाख रुपये की सालाना नौकरी से करियर शुरू करने को मजबूर हैं।

1 फाइनेंस के अर्थशास्त्री इस स्थिति को गंभीर मानते हैं क्योंकि इस हिसाब से पढ़ाई की लागत वसूलने में ही एक युवा को 20 साल से ज्यादा का समय लग सकता है।

एमबीए और अन्य कोर्स का हाल

सिर्फ इंजीनियरिंग ही नहीं, बल्कि एमबीए जैसे मैनेजमेंट कोर्स की चमक भी फीकी पड़ रही है। एआईसीटीई (AICTE) के आंकड़े बताते हैं कि एमबीए संस्थानों की संख्या 2021-22 में 3,095 थी जो अब बढ़कर 3,465 हो गई है। लेकिन सीटें बढ़ने के साथ अच्छी नौकरियां नहीं बढ़ीं।

हालत यह है कि आईआईएम इंदौर जैसे नामी संस्थानों में भी औसत सैलरी में 15% की गिरावट देखी गई है। बाजार में डिग्री वाले युवाओं की बाढ़ आ गई है, लेकिन उच्च गुणवत्ता वाली नौकरियों की कमी है।

स्किल के बिना डिग्री बेअसर

नौकरी के बाजार में एक बड़ा अंतर स्किल्स को लेकर भी है। साल 2025 में करीब 83% इंजीनियर और 46% एमबीए छात्र बिना किसी जॉब या इंटर्नशिप के कॉलेज से बाहर निकले। रिपोर्ट बताती है कि अब सामान्य डिग्री के बजाय विशेषज्ञता की कीमत है।

उदाहरण के तौर पर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा साइंस में काम करने वालों को पारंपरिक आईटी नौकरियों के मुकाबले 20% से 40% ज्यादा सैलरी मिल रही है।

वहीं, चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) जैसे प्रोफेशनल कोर्स में भी अब भीड़ बढ़ गई है। 2019 में जहां 6 लाख सीए छात्र थे, वहीं 2025 में यह संख्या 12 लाख पहुंच गई, जिससे शुरुआती सैलरी घटकर 3 से 5 लाख रुपये रह गई है।

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