ईडी की छापेमारी पर सवाल, इंद्रजीत यादव बोले - 100 रुपये भी कैश नहीं मिला
ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत इंद्रजीत सिंह यादव, उनके सहयोगियों और उनसे जुड़ी इकाइयों के ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन किया। एजेंसी के मुताबिक यह कार्रवाई जबरन लोन सेटलमेंट और उगाही से जुड़े एक मामले में हुई।

दिल्ली और आसपास के इलाकों में हाल ही में हुई प्रवर्तन एजेंसी की कार्रवाई को लेकर बड़ा विरोधाभास सामने आया है। एक तरफ जांच एजेंसी भारी बरामदगी का दावा कर रही है, वहीं जिन पर कार्रवाई हुई, वे इन दावों को सिरे से खारिज कर रहे हैं।
इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत इंद्रजीत सिंह यादव, उनके सहयोगियों और उनसे जुड़ी इकाइयों के ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन किया। एजेंसी के मुताबिक यह कार्रवाई जबरन लोन सेटलमेंट और उगाही से जुड़े एक मामले में हुई।
ईडी ने दावा किया कि तलाशी के दौरान करीब 6.51 करोड़ रुपये नकद, लगभग 17.4 करोड़ रुपये की ज्वेलरी, 8-9 करोड़ रुपये कीमत की पांच लग्जरी गाड़ियां और करीब 35 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए। एजेंसी का कहना है कि कथित अवैध गतिविधियों से हुई कमाई को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए आगे बढ़ाया गया।
ईडी के अनुसार, इनकम टैक्स विभाग की पहले की छापेमारी के बाद इंद्रजीत सिंह यादव भारत छोड़कर चले गए और गिरफ्तारी से बचने के लिए विदेश से ही अपने कामकाज को संचालित कर रहे हैं। एजेंसी ने कहा कि उन्हें भारत लाने के लिए कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं।
इंद्रजीत यादव का पलटवार
ईटी ने एनबीटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि इंद्रजीत सिंह यादव ने ईडी के सभी दावों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि मीडिया में दिखाई जा रही रकम और बरामदगी के आंकड़े पूरी तरह भ्रामक और अटकलों पर आधारित हैं।
यादव के अनुसार, शुक्रवार 26 दिसंबर को चार ठिकानों पर तलाशी हुई और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण व कानूनी दायरे में रही। उन्होंने कहा कि मेरे किसी भी परिसर से 100 रुपये भी नकद बरामद नहीं हुआ। केवल दो-तीन कंप्यूटर सिस्टम सामान्य जांच के लिए ले जाए गए। यादव ने कहा कि भ्रम दूर करने के लिए वह पंचनामा सार्वजनिक करने को भी तैयार हैं।
यादव ने दावा किया कि उनकी सभी चल-अचल संपत्तियां पूरी तरह घोषित हैं और पैन से जुड़ी हुई हैं। ये संपत्तियां बैंकिंग चैनलों और दर्ज लोन के जरिए खरीदी गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जनवरी में इनकम टैक्स विभाग पहले ही उनके यहां तलाशी ले चुका है और वित्तीय लेन-देन का पूरा ब्योरा विभाग के पास मौजूद है।