ब्लिंकिट के विस्तार प्लान पर लगा 'स्मॉग' का ब्रेक, 2100 स्टोर्स का टारगेट हासिल करने में चूकी
देश की दिग्गज क्विक कॉमर्स कंपनी 'ब्लिंकिट' (Blinkit) ने बताया है कि प्रदूषण की वजह से लागू पाबंदियों ने दिल्ली-एनसीआर में उसके नए 'डार्क स्टोर्स' (Dark Stores) खोलने की रफ्तार को धीमा कर दिया है।

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण और पाबंदियों का सीधा असर अब क्विक कॉमर्स कंपनियों के कामकाज पर दिखने लगा है। देश की दिग्गज क्विक कॉमर्स कंपनी 'ब्लिंकिट' (Blinkit) ने बताया है कि प्रदूषण की वजह से लागू पाबंदियों ने दिल्ली-एनसीआर में उसके नए 'डार्क स्टोर्स' (Dark Stores) खोलने की रफ्तार को धीमा कर दिया है।
दिल्ली-एनसीआर ब्लिंकिट के लिए देश का सबसे बड़ा बाजार है, जहां निर्माण कार्यों पर लगी रोक के कारण कंपनी अपने तय लक्ष्य से पीछे रह गई है।
प्रदूषण और त्योहारों ने रोकी रफ्तार
ब्लिंकिट की पेरेंट कंपनी 'इटरनल' (Eternal) ने अपने शेयरधारकों को लिखे पत्र में बताया कि पिछले कई हफ्तों से दिल्ली-एनसीआर में निर्माण कार्यों और स्टोर्स के फिट-आउट (सजावट और सेटअप) पर लगी रोक के कारण नए स्टोर समय पर शुरू नहीं हो सके। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) द्वारा लागू ग्रैडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) की वजह से कंपनी को यह मुश्किल झेलनी पड़ी।
इटरनल के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) अक्षंत गोयल ने बताया कि तीसरी तिमाही में कंपनी ने 211 नए स्टोर जोड़े, जिससे कुल स्टोर्स की संख्या 2,027 हो गई है। हालांकि, यह कंपनी के 2,100 स्टोर्स के लक्ष्य से 70 कम है।
इसके अलावा, दिवाली के दौरान ऑर्डर्स की भारी संख्या को संभालने में लगी टीम के कारण भी नए स्टोर खोलने का काम प्रभावित हुआ। हालांकि, कंपनी का भरोसा है कि मार्च 2027 तक वह 3,000 स्टोर्स के लक्ष्य को जरूर पूरा कर लेगी।
सोशल सिक्योरिटी कोड और कारोबार पर असर
सरकार द्वारा प्रस्तावित सोशल सिक्योरिटी कोड पर भी कंपनी ने अपनी राय स्पष्ट की है। अक्षंत गोयल के मुताबिक, जब तक इस कोड के नियम पूरी तरह से नोटिफाई नहीं हो जाते, तब तक इसके वित्तीय प्रभाव का सटीक अंदाजा लगाना मुश्किल है।
हालांकि, उनका मानना है कि कंपनी इस प्रभाव को आसानी से झेल लेगी और इससे उनके मुनाफे (मार्जिन) पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने यह भी भरोसा जताया कि ग्रेच्युटी और छुट्टियों के भुगतान जैसे अन्य श्रम कानूनों से भी कंपनी के पीएंडएल (P&L) पर कोई खास असर नहीं होगा।
गिग वर्कर्स के लिए बेहतर माहौल
इटरनल का मानना है कि नया सोशल सिक्योरिटी कोड गिग वर्कर्स (डिलीवरी पार्टनर) के लिए फायदेमंद साबित होगा। इससे ज्यादा लोग इस क्षेत्र में काम करने के लिए प्रोत्साहित होंगे और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए भी व्यापार करना आसान हो जाएगा।
कंपनी ने जानकारी दी कि साल 2025 में ज़ोमैटो और ब्लिंकिट ने अपने डिलीवरी पार्टनर्स के बीमा कवरेज पर 100 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए हैं। इसमें मेडिकल, दुर्घटना और मातृत्व लाभ जैसी सुविधाएं शामिल हैं।