रोबोट को सिखाने के लिए भारतीय मजदूरों का सहारा, कैमरे में कैद हो रही हर हाथ की गतिविधि
भारत में हजारों कामगार अपने रोजमर्रा के काम को कैमरे में रिकॉर्ड कर रहे हैं और इसके बदले अतिरिक्त कमाई भी कर रहे हैं। लेकिन उनके हाथों की हर गतिविधि को रिकॉर्ड करने के पीछे एक बड़ी वजह छिपी है। यह डेटा भविष्य में काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है।

In Short
- भारत में हजारों कामगार अपने रोजमर्रा के काम की वीडियो रिकॉर्डिंग कर AI और रोबोट ट्रेनिंग के लिए डेटा जुटा रहे हैं।
- काम की रिकॉर्डिंग के बदले मजदूरों को अतिरिक्त कमाई हो रही है, लेकिन डेटा के इस्तेमाल और सहमति को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।
- इंसानों के काम से जुटाया गया यही डेटा भविष्य में रोबोट को वही काम करने लायक बना सकता है, जो आज लोग कर रहे हैं।
AI Robot Training Data India: दिल्ली की रीसाइक्लिंग कॉलोनी में काम करने वाली सुनीता राठौड़ आजकल एक अलग तरह का काम कर रही हैं। वह प्लास्टिक कचरे को छांटने और साफ करने के दौरान सिर पर आईफोन लगा रही हैं, जो उनके हाथों की हर गतिविधि को रिकॉर्ड करता है। उन्हें नहीं पता कि यह रिकॉर्डिंग किस काम आएगी, लेकिन इसके लिए उन्हें हर घंटे 150 रुपये अतिरिक्त मिल रहे हैं।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कई हिस्सों में हजारों कामगार अपने रोजमर्रा के काम को कैमरों और सेंसर की मदद से रिकॉर्ड कर रहे हैं। इन वीडियो का इस्तेमाल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI सिस्टम को ट्रेन करने और रोबोट को इंसानों की तरह काम करना सिखाने के लिए किया जा रहा है।
रोबोट को सिखाने के लिए जुटाया जा रहा है इंसानी काम का डेटा
ह्यूमनॉइड रोबोट अब तक नियंत्रित माहौल में तो अच्छा प्रदर्शन करते रहे हैं, लेकिन असली दुनिया में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। गोदामों और दूसरे स्थानों पर इंसानों की तरह काम करने के लिए रोबोट को ज्यादा डेटा की जरूरत है।
AI कंपनियों के लिए अब सिर्फ टेक्स्ट, फोटो या सामान्य वीडियो काफी नहीं हैं। उन्हें ऐसे वीडियो चाहिए, जिनमें इंसान अपने हाथों से अलग-अलग काम करते हुए दिखें, जैसे चीजें उठाना, पैक करना, सिलाई करना या सामान को व्यवस्थित करना।
भारत बना रोबोट ट्रेनिंग डेटा का बड़ा केंद्र
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में बड़ी संख्या में ऐसे काम होते हैं जो कई अमीर देशों में पहले ही ऑटोमेट हो चुके हैं। यही वजह है कि भारत AI और रोबोटिक्स कंपनियों के लिए डेटा जुटाने का अहम स्थान बन गया है।
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दिल्ली, बेंगलुरु और देश के दूसरे हिस्सों में कामगार जूते बनाने वाली फैक्ट्रियों, गोदामों, खेती और निर्माण जैसे क्षेत्रों में अपने काम की रिकॉर्डिंग कर रहे हैं। इन रिकॉर्डिंग में हाथों की छोटी-छोटी गतिविधियों को भी कैद किया जा रहा है।
बड़ी कंपनियां जुटा रहीं हैं लाखों घंटे की रिकॉर्डिंग
रिपोर्ट के अनुसार, कई स्टार्टअप इस डेटा कलेक्शन के काम में उतर चुके हैं। बिल्ड AI नाम की कंपनी ने हजारों फैक्ट्री कर्मचारियों के साथ काम करते हुए लाखों घंटे की फर्स्ट पर्सन वीडियो फुटेज जुटाने का दावा किया है।
वहीं, दूसरी कंपनियां भी जूते बनाने वाले कर्मचारियों, टेक्सटाइल वर्कर्स और घरेलू कामों से जुड़े लोगों की गतिविधियों को रिकॉर्ड कर रही हैं। इस डेटा को दुनिया की बड़ी रोबोटिक्स कंपनियों तक पहुंचाया जा रहा है।
कमाई का मौका भी, लेकिन उठ रहे हैं सवाल
इस नए काम से कई मजदूरों को अतिरिक्त कमाई का मौका मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत से मिलने वाली फर्स्ट पर्सन वीडियो फुटेज की कीमत 7 डॉलर प्रति घंटे तक हो सकती है, जबकि ज्यादा जानकारी के साथ तैयार डेटा की कीमत इससे कई गुना ज्यादा हो सकती है।
हालांकि, इस पूरे काम को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। कई कामगारों को यह पूरी जानकारी नहीं होती कि उनकी रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल कहां और कैसे किया जाएगा। डेटा की सुरक्षा और सहमति को लेकर भी चिंताएं जताई जा रही हैं।
क्या इंसान ही सिखाएंगे रोबोट को अपनी जगह लेना?
रिपोर्ट के अनुसार, यह डेटा कलेक्शन आने वाले कई सालों तक चल सकता है और इससे लाखों लोगों को कमाई का जरिया मिल सकता है। लेकिन भविष्य में यही डेटा रोबोट को ऐसे काम करने में सक्षम बना सकता है, जो आज इंसान कर रहे हैं।
यही इस पूरी प्रक्रिया का सबसे बड़ा विरोधाभास है। जिन कामगारों की मेहनत से रोबोट को इंसानी काम सिखाया जा रहा है, वही रोबोट भविष्य में उनके काम की जगह ले सकते हैं।