एक असाइनमेंट की डेडलाइन ने बदल दिया काम करने का तरीका, IIM स्टूडेंट ने अपनाया AI का नया सिस्टम

आईआईएम बेंगलुरु के एमबीए स्टूडेंट रक्षित रविंद्रनाथन ने बताया कि कैसे एआई की मदद से वह असाइनमेंट्स, डेडलाइन्स और डेली कमिटमेंट्स को मैनेज करते हैं। एक असाइनमेंट की डेडलाइन मिस होने के बाद उन्होंने क्लॉड को पर्सनल ऑर्गनाइजर की तरह इस्तेमाल करना शुरू किया। उनका एआई प्रोडक्टिविटी सिस्टम अब चर्चा में है।

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In Short

  • आईआईएम बेंगलुरु के एमबीए स्टूडेंट रक्षित रविंद्रनाथन ने बताया अपना एआई प्रोडक्टिविटी सिस्टम
  • एक असाइनमेंट की डेडलाइन मिस होने के बाद बदला डेडलाइन मैनेज करने का तरीका
  • क्लॉड, चैटजीपीटी और जेमिनी जैसे एआई टूल बन रहे पर्सनल प्रोडक्टिविटी असिस्टेंट

By Gaurav Kumar:

IIM Bangalore student: आज के समय में स्टूडेंट्स की पढ़ाई सिर्फ किताबों और क्लासरूम तक सीमित नहीं रह गई है। असाइनमेंट, डेडलाइन, व्हाट्सऐप ग्रुप और ऑनलाइन पोर्टल के बीच हर चीज याद रखना भी एक बड़ा काम बन गया है। ऐसे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ सवालों के जवाब देने वाला चैटबॉट नहीं, बल्कि पर्सनल प्रोडक्टिविटी असिस्टेंट भी बनता जा रहा है। आईआईएम बेंगलुरु के एक एमबीए स्टूडेंट की कहानी इसी बदलाव को दिखाती है।

जब एक असाइनमेंट की डेडलाइन भूल गए रक्षित

आईआईएम बेंगलुरु के एमबीए कैंडिडेट रक्षित रविंद्रनाथन ने लिंक्डइन पर बताया कि एक बार वह जरूरी असाइनमेंट की सबमिशन डेडलाइन मिस कर गए थे। इसकी वजह यह थी कि डेडलाइन एक ही जगह पर नहीं थी।

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कुछ जानकारी व्हाट्सऐप ग्रुप में थी, कुछ ऑनलाइन पोर्टल पर और कुछ उनकी अपनी मेमोरी पर निर्भर थी। इस एक्सपीरियंस के बाद रक्षित ने तय किया कि डेडलाइन याद रखने का काम सिर्फ दिमाग के भरोसे नहीं छोड़ा जाएगा।

एआई को बनाया अपना पर्सनल ऑर्गनाइजर

इसके बाद रक्षित ने एंथ्रोपिक के क्लॉड का इस्तेमाल शुरू किया। वह एआई की मदद से अपना कैलेंडर ऑर्गनाइज करने, पेंडिंग टास्क ट्रैक करने और अलग-अलग कमिटमेंट्स को मैनेज करने लगे। उनके मुताबिक, अब एआई उन सभी चीजों का रिकॉर्ड रखता है जो उन्हें करनी हैं। इससे उनका फोकस यह याद रखने पर नहीं रहता कि क्या करना है, बल्कि उस काम को पूरा करने पर रहता है।

असली फायदा एआई टूल नहीं, कम हुआ मेंटल बर्डन

रक्षित का कहना है कि इस पूरे सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा कोई खास एआई प्लेटफॉर्म नहीं है। असली फायदा यह है कि हर छोटी-बड़ी डेडलाइन और कमिटमेंट को दिमाग में याद रखने का मेंटल बर्डन कम हो जाता है। वह क्लॉड इस्तेमाल करते हैं, जबकि उनके कई क्लासमेट्स चैटजीपीटी, गूगल के जेमिनी या कैलेंडर से जुड़े कस्टमाइज्ड एआई वर्कफ्लो का इस्तेमाल करते हैं।

'बिजी' रहने से ज्यादा जरूरी है 'ऑन टॉप ऑफ इट' रहना

रक्षित की लिंक्डइन पोस्ट की एक लाइन ने स्टूडेंट्स और प्रोफेशनल्स का खास ध्यान खींचा। उन्होंने लिखा, "बिइंग बिजी इज नॉट द फ्लेक्स इट यूज्ड टू बी. बिइंग ऑन टॉप ऑफ इट इज." यानी सिर्फ बिजी रहना अब कोई बड़ी बात नहीं है। असली बात यह है कि आप अपने काम और कमिटमेंट्स को कितने अच्छे से मैनेज कर पा रहे हैं।

एआई संभालेगा 'एडमिन टैक्स', सोच इंसान की रहेगी

रक्षित के मुताबिक, एआई का इस्तेमाल रोज के रूटीन एडमिनिस्ट्रेटिव कामों के लिए किया जा सकता है। कैलेंडर, रिमाइंडर और डेडलाइन जैसी चीजों को एआई संभाल ले तो इंसान के पास रीडिंग, प्रिपरेशन और क्रिटिकल थिंकिंग के लिए ज्यादा समय बच सकता है। हालांकि, उनका साफ कहना है कि एआई ओरिजिनल थिंकिंग या ह्यूमन क्रिएटिविटी की जगह नहीं ले सकता। इसका काम इंसान की सोच को रिप्लेस करना नहीं, बल्कि उस 'एडमिन टैक्स' को कम करना है, जिसमें रोज के ऑर्गनाइजेशन वाले कामों में काफी मेंटल एनर्जी खर्च हो जाती है।

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