Q4 में 45% बढ़ा यस बैंक का नेट प्रॉफिट लेकिन ब्रोकरेज ने फिर भी 17% घटाया टारगेट प्राइस - जानें कारण

यस बैंक  ने मार्च तिमाही में मजबूत प्रदर्शन करते हुए सालाना आधार पर करीब 45 फीसदी की बढ़त के साथ 1,068.42 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। हालांकि, ब्रोकरेज JM Financial ने बेहतर नतीजों के बावजूद शेयर पर 17 फीसदी तक गिरावट की आशंका जताई है।

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By Gaurav Kumar:

निजी क्षेत्र के बैंक, यस बैंक (YES Bank Ltd) ने मार्च तिमाही में मजबूत प्रदर्शन करते हुए सालाना आधार पर करीब 45 फीसदी की बढ़त के साथ 1,068.42 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। पिछले साल इसी तिमाही में यह आंकड़ा 738.12 करोड़ रुपये था। हालांकि, ब्रोकरेज JM Financial ने बेहतर नतीजों के बावजूद शेयर पर 17 फीसदी तक गिरावट की आशंका जताई है।

रिकवरी पर टिका मुनाफा, आगे चुनौती

JM Financial के मुताबिक, बैंक की कमाई में मौजूदा तेजी का बड़ा हिस्सा सिक्योरिटी रिसीट (SR) रिकवरी से आ रहा है, जो सीमित है। ब्रोकरेज ने कहा कि यह रिकवरी पूल अब खत्म होने के करीब है और कोर बिजनेस अभी भी कमजोर दिखता है। ऐसे में करीब 1 फीसदी रिटर्न ऑन एसेट (RoA) को टिकाए रखना मुश्किल हो सकता है।

Yes Bank Share Price Target

ब्रोकरेज ने साफ कहा कि शेयर में जिस तरह मजबूत मुनाफे का अनुमान लगाया जा रहा है, वह अभी जमीन पर साबित नहीं हुआ है। इसी आधार पर JM Financial ने स्टॉक को ‘SELL’ रेटिंग देते हुए 17 रुपये का टारगेट दिया है, जो पहले के 19 रुपये के टारगेट से भी कम है।

आय और ग्रोथ में सुधार

तिमाही के दौरान बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 16 फीसदी बढ़कर 2,637.7 करोड़ रुपये रही। लोन ग्रोथ भी सुधरकर 11.1 फीसदी पर पहुंच गई, जबकि नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में हल्का सुधार दिखा।

मैनेजमेंट ने FY27 के लिए 13-15 फीसदी लोन ग्रोथ का गाइडेंस दिया है। इसमें रिटेल सेगमेंट 10-11 फीसदी और कॉरपोरेट 20 फीसदी तक बढ़ सकता है। NIM को अगले 2-3 साल में 3-3.5 फीसदी तक ले जाने का लक्ष्य है।

क्रेडिट कॉस्ट और स्लिपेज पर नजर

JM Financial ने चेतावनी दी कि क्रेडिट कॉस्ट में मिलने वाला सपोर्ट भी अब कम हो रहा है। Q4 में फ्रेश स्लिपेज बढ़कर 1,100 करोड़ रुपये हो गए, जबकि नेट स्लिपेज 0.32 फीसदी पर आ गया, जिसका कारण ऊंची रिकवरी रही।

ब्रोकरेज के अनुसार, FY26 में SR रिकवरी 1,560 करोड़ रुपये रही, जबकि FY27 में इसे घटकर 800-1,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। इससे भविष्य में मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है।

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