सेंसेक्स-निफ्टी धड़ाम! 1.5% टूटकर बंद हुआ बाजार - इन 4 वजहों से हुई बिकवाली

सेंसेक्स 1.48% या 1236.11 अंक गिरकर 82,498.14 अंक पर बंद हुआ और निफ्टी 1.41% या 365 प्वाइंट गिरकर 25,454.35 अंक पर बंद हुआ। 

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By Gaurav Kumar:

Why is stock market down today: बीते तीन दिनों तक लगातार रही तेजी पर आज ब्रेक लगा और गुरुवार को शेयर बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक करीब 1.5% टूटकर बंद हुए। सेंसेक्स 1.48% या 1236.11 अंक गिरकर 82,498.14 अंक पर बंद हुआ और निफ्टी 1.41% या 365 प्वाइंट गिरकर 25,454.35 अंक पर बंद हुआ। 

Geojit Investments Limited के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक सेंटीमेंट को झटका दिया। इसके चलते भारतीय बाजार में भारी बिकवाली दिखी। एक्सपर्ट के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जिससे महंगाई की चिंता बढ़ी। होर्मुज स्ट्रेट में संभावित बाधा की आशंका ने तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को और तेज कर दिया।

लाल निशान पर बंद हुए सेंसेक्स के टॉप स्टॉक्स


क्यों गिरा शेयर बाजार?

 

 

1) प्रॉफिट बुकिंग

पिछले तीन दिनों से शेयर बाजार में लगातार तेजी देखने को मिल रही थी। इस दौरान सेंसेक्स करीब 1,108 अंक और निफ्टी 348 अंक चढ़ा था। ऐसे में कई निवेशकों ने बढ़े हुए दाम पर शेयर बेचकर मुनाफा निकालना शुरू कर दिया, जिससे बाजार में गिरावट आ गई।

2) इंडिया VIX और F&O एक्सपायरी

इंडिया VIX, जिसे बाजार का 'फीयर इंडेक्स' भी कहा जाता है, करीब 10% बढ़कर 13.46 पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। साथ ही 19 फरवरी को सेंसेक्स और निफ्टी के F&O कॉन्ट्रैक्ट की एक्सपायरी भी थी, जिसके कारण ट्रेडिंग में ज्यादा हलचल और अस्थिरता देखी गई।

3) कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी

ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 71 डॉलर प्रति बैरल और WTI करीब 66 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से भारत जैसे आयातक देश के लिए खर्च बढ़ता है, जिससे महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव आता है - यही बाजार के लिए निगेटिव संकेत होता है।

4) वैश्विक अनिश्चितता

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने की खबरों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसके अलावा ब्याज दरों को लेकर भी वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई है। जब अंतरराष्ट्रीय माहौल अस्थिर होता है, तो विदेशी निवेशक सतर्क हो जाते हैं और बाजार पर दबाव पड़ता है।

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