Stock Market: शेयर बाजार से निकल जाएं या अभी भी है कमाई का चांस? Experts से जानिए क्या करें
अब आगे क्या करें। क्या बाजार से निकल जाएं या अभी भी पैसा बनाने का मौका है? आज हम आपको इस खबर में विभिन्न एक्सपर्ट के जरिए इन्हीं सवालों के जवाब देंगे।

Stock Market: सेंसेक्स और निफ्टी में शुक्रवार को लगातार पांचवीं बार मंथली गिरावट देखी गई। अक्टूबर 2024 से निफ्टी हर महीने लाल निशान पर बंद हुआ है। पिछले 5 महीने में निफ्टी 12% गिर चुका है। 29 साल पहले, 1996 के बाद से यह सबसे लंबी गिरावट है।
टैरिफ वार के कारण ग्लोबल आर्थिक विकास पर चिंता, एफआईआई आउटफ्लो और कमजोर Q3 नंबर्स के कारण बाजार में बिकवाली हुई है। भारी गिरावट के बीच निवेशकों के मन में चिंता यह है कि अब आगे क्या करें। क्या बाजार से निकल जाएं या अभी भी पैसा बनाने का मौका है? आज हम आपको इस खबर में विभिन्न एक्सपर्ट के जरिए इन्हीं सवालों के जवाब देंगे।
शेयर बाजार से निकल जाएं या अभी भी मौका?
सेबी रजिस्ट्रर्ड एनालिस्ट विपिन डिक्सेना ने कहा कि यह एक अच्छा मौका है जोड़ने का। निफ्टी अपने हाई से लगभग 15% नीचे है और स्टॉक में भी अच्छी खासी करेक्शन आ चुकी है। धीरे-धीरे स्टॉक में निवेश करने का सबसे अच्छा मौका है। एक्सपर्ट ने कहा कि निवेशकों को लार्ज कैप शेयरों में अपना एलोकेशन अभी बढ़ाना चाहिए।
Capitalmind Research के कृष्णा अप्पला ने कहा कि शेयर बाजार में आज से पहले के करेक्शन को देखा जाए तो ये समय हमेशा मजबूत खरीदारी के अवसरों के रूप में दिखाई दी है। एक्सपर्ट ने कहा कि पिछले 30 साल में, बाज़ार कई सालों में 20% से अधिक गिरे हैं, फिर भी उन 30 सालों में से 22 में बाजार पॉजिटिव नोट पर बंद हुआ था।
एक्सपर्ट ने कहा कि भले ही हाल ही में बाजार में गिरावट आई है लेकिन कुल मिलाकर अर्थव्यवस्था मजबूत है, कंपनियां अच्छा मुनाफा कमा रही हैं और कीमतें उचित हैं। यह निवेशकों के लिए शॉर्ट टर्म उतार-चढ़ाव के बारे में चिंता करने के बजाय लॉन्ग टर्म प्रॉफिट पर फोकस करने का एक अच्छा समय है
Mehta Equities के प्रशांत तापसे ने कहा कि कमजोर ग्लोबल बाजार संकेतों के कारण घरेलू निवेशक घबरा गए है और अपनी इक्विटी बेच दी, जिससे बड़ी बिकवाली शुरू हो गई है। ट्रंप द्वारा कई देशों पर इंपोर्ट शुल्क लगाने की घोषणा से निवेशकों में काफी बेचैनी है। इसके अलावा धीमी ग्रोथ रेट, उम्मीद से कम कमाई और विदेशी निवेशकों की बिकवाली की चिंता भी नियमित अंतराल पर मंदी के रुझान को बढ़ा रही है।