जिसका डर था वही हुआ! 3% गिरकर खुला सेंसेक्स, युद्ध की आग से बाजार धड़ाम; निवेशकों के ₹18 लाख करोड़ साफ
बीएसई सेंसेक्स 2,743.46 अंकों या 3.38 फीसदी की गिरावट के साथ 78,543.73 पर खुला। निफ्टी50 भी 519.40 अंक फिसलकर 24,659.25 पर आ गया। बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में शुरुआती कारोबार में 6 फीसदी तक की गिरावट दिखी। डर का पैमाना माने जाने वाला इंडिया VIX करीब 5 फीसदी उछलकर 13.70 पर पहुंच गया।

Sensex-Nifty Crash: जिसकी उम्मीद थी वही हुआ। सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भयंकर गिरावट दर्ज की गई। इजरायल-यूएस का ईरान पर हमला और बदले की कार्रवाई में ईरान द्वारा मिडिल ईस्ट में यूएस के सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले ने निवेशकों की धड़कनें बढ़ा दीं।
अमेरिका और इज़राइल ने शनिवार और रविवार में ईरान पर बमबारी की, जिसमें उसके सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। जवाब में ईरान ने यूएई, बहरीन, जॉर्डन, सऊदी अरब और कतर समेत सात देशों पर हमले किए। इस घटनाक्रम ने कच्चे तेल, अमेरिकी डॉलर और सोने की कीमतों में तेज उछाल ला दिया।
बाजार ने लगाया गोता
बीएसई सेंसेक्स 2,743.46 अंकों या 3.38 फीसदी की गिरावट के साथ 78,543.73 पर खुला। निफ्टी50 भी 519.40 अंक फिसलकर 24,659.25 पर आ गया। बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में शुरुआती कारोबार में 6 फीसदी तक की गिरावट दिखी। डर का पैमाना माने जाने वाला इंडिया VIX करीब 5 फीसदी उछलकर 13.70 पर पहुंच गया।
निवेशकों के 18.43 लाख करोड़ रुपये डूबे
बाजार खुलते ही निवेशकों की करीब 18.43 लाख करोड़ रुपये की पूंजी साफ हो गई। बीएसई लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 463.91 लाख करोड़ रुपये से घटकर 445.47 लाख करोड़ रुपये पर आ गया।
ThinCredBlu Securities के फाउंडर गौरव उदन ने कहा कि युद्ध जैसे हालात ग्लोबल जोखिम धारणा को कमजोर करते हैं। ऐसे माहौल में उतार-चढ़ाव बढ़ता है और इंट्राडे रिकवरी टिकती नहीं। ट्रेडर्स को रक्षात्मक रहना चाहिए और सख्त स्टॉप-लॉस रखना चाहिए।
कच्चे तेल में उछाल, रुपये पर दबाव
मध्य-पूर्व में संघर्ष लंबा खिंचने के संकेत से ब्रेंट क्रूड 4.5 फीसदी चढ़कर 76.07 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। एक समय यह 82 डॉलर के पार भी गया। अमेरिकी कच्चा तेल 3.9 फीसदी बढ़कर 69.59 डॉलर पर पहुंचा। दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का समुद्री तेल व्यापार होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है, इसलिए बाजार की नजर वहीं टिकी है।
तेल की तेजी से रुपये पर दबाव बढ़ा है। एक माह के नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड के मुताबिक रुपया 91.28-91.32 प्रति डॉलर के दायरे में खुल सकता है।
सेबी की सख्ती और आगे का रास्ता
रॉयटर्स के मुताबिक सेबी प्रमुख तुहिन कांत पांडे बैंकों और नियामकों से इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों को सख्ती से लागू करने को कह रहे हैं।
Geojit Investments के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा कि सबसे बड़ा जोखिम ऊर्जा कीमतों से जुड़ा है। घबराकर बिकवाली करना सही रणनीति नहीं है। छह महीने बाद ऐसे घटनाक्रम का असर नहीं दिखता। गिरावट का इस्तेमाल मजबूत शेयरों में धीरे-धीरे निवेश के लिए किया जा सकता है।