रिलायंस इंडस्ट्री के शेयर में 2% से ज्यादा की तेजी! जानिए क्या है ट्रिगर
बीएसई पर रिलायंस का शेयर करीब 2.46% चढ़कर 1,424.10 रुपये तक पहुंच गया, जबकि पिछले सत्र में यह 1,389.80 रुपये पर बंद हुआ था। पिछले दो कारोबारी सत्रों में यह स्टॉक लगभग 6% तक उछल चुका है।

Reliance Industries Share: रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के शेयरों में शुक्रवार को मजबूत तेजी देखने को मिली। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की ओर से भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दिए जाने के बाद निवेशकों की धारणा मजबूत हुई।
बीएसई पर रिलायंस का शेयर करीब 2.46% चढ़कर 1,424.10 रुपये तक पहुंच गया, जबकि पिछले सत्र में यह 1,389.80 रुपये पर बंद हुआ था। पिछले दो कारोबारी सत्रों में यह स्टॉक लगभग 6% तक उछल चुका है।
अमेरिका ने क्यों दी छूट?
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने 6 मार्च को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस फैसले की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस कदम का मकसद वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखना है।
बेसेंट ने लिखा कि वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बनाए रखने के लिए ट्रेजरी विभाग भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने की अनुमति देने वाला 30 दिन का अस्थायी वाइवर जारी कर रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह छूट केवल उन कार्गो पर लागू होगी जो पहले से समुद्र में फंसे हुए हैं और इससे रूस सरकार को कोई बड़ा वित्तीय फायदा नहीं होगा।
रूसी तेल का बड़ा खरीदार रहा है रिलायंस
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस 2025 में समुद्री मार्ग से आने वाले रूसी कच्चे तेल की दुनिया की सबसे बड़ी खरीदार कंपनियों में शामिल थी। कंपनी रोजाना करीब 6 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल आयात कर रही थी। हालांकि खबरों के अनुसार कंपनी ने इस साल जनवरी के पहले तीन हफ्तों के दौरान रूसी तेल की खरीद अस्थायी रूप से रोक दी थी।
ब्रोकरेज की राय
जेएम फाइनेंशियल की 4 मार्च की रिपोर्ट के मुताबिक हाल में मध्य-पूर्व तनाव के कारण रिलायंस के शेयर में करीब 8% की गिरावट आई थी, जो ब्रोकरेज के अनुसार जरूरत से ज्यादा थी।
ब्रोकरेज का कहना है कि कच्चे तेल और एलएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी से कंपनी को नुकसान नहीं बल्कि फायदा हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर डीजल क्रैक स्प्रेड करीब 30 डॉलर प्रति बैरल बना रहता है तो रिलायंस का ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) 4-5 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ सकता है।
जेएम फाइनेंशियल ने कहा कि GRM में हर 1 डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि से कंपनी का सालाना EBITDA करीब 45 अरब रुपये बढ़ सकता है।
O2C कारोबार में मजबूत प्रदर्शन
कंपनी की Q3 FY26 निवेशक प्रस्तुति के अनुसार, रिलायंस के ऑयल-टू-केमिकल्स (O2C) कारोबार का EBITDA सालाना आधार पर 14.6% बढ़कर 16,507 करोड़ रुपये रहा।
कंपनी ने बताया कि यह वृद्धि रिफाइनिंग मार्जिन के कई तिमाहियों के उच्च स्तर पर पहुंचने और ईंधन क्रैक स्प्रेड में 60% से 100% तक उछाल के कारण हुई। रिलायंस ने यह भी कहा कि लचीली कच्चे तेल सोर्सिंग रणनीति के कारण चुनौतियों के बावजूद रिफाइनरी का थ्रूपुट बनाए रखने में मदद मिली।