Quality Power IPO: 24 फरवरी को होगी लिस्टिंग, जानिए क्या निवेशकों को होगा फायदा?
Quality Power Electrical Equipments Limited का IPO भारतीय बाजार में मिला-जुला रिस्पॉन्स मिलने के बाद अब लिस्टिंग के लिए तैयार है। अगर आपने भी इस आईपीओ में निवेश किया है तो जानिए कि क्या आपको फायदा होगा या नहीं।

Quality Power Electrical Equipments Limited का IPO भारतीय बाजार में मिला-जुला रिस्पॉन्स मिलने के बाद अब लिस्टिंग के लिए तैयार है। BSE की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह IPO सोमवार, 24 फरवरी 2025 को लिस्ट होगा।
IPO अलॉटमेंट मिलने के बाद निवेशकों की नजर इस पर टिकी है कि Quality Power के शेयर बाज़ार में कैसी एंट्री करेंगे और क्या इससे मुनाफा कमाया जा सकता है।
ग्रे मार्केट का क्या संकेत? (Quality Power IPO GMP)
ग्रे मार्केट में Quality Power IPO के प्रति सकारात्मक रुझान देखा जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, शुक्रवार को Quality Power के शेयर 5 रुपये के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे थे, और इसमें कोई बदलाव नहीं आया।
GMP (ग्रे मार्केट प्राइस) के अनुसार, Quality Power IPO की लिस्टिंग लगभग ₹430 (₹425 + ₹5) पर हो सकती है। यह कंपनी के ऊपरी प्राइस बैंड ₹425 से थोड़ा अधिक है, जो निवेशकों के लिए अच्छा संकेत हो सकता है।
क्या लिस्टिंग प्राइस बढ़ सकता है?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल ही में भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का दबाव Quality Power IPO की लिस्टिंग पर असर डाल सकता है। BSE सेंसेक्स पिछले 13 दिनों से लगातार गिर रहा है, जिससे नए IPO की लिस्टिंग पर दबाव बन सकता है।
हालांकि, अगर सोमवार को बाजार में सुधार दिखता है, तो Quality Power IPO की लिस्टिंग GMP से अधिक प्राइस पर भी हो सकती है।
क्या GMP पर भरोसा करना सही होगा?
शेयर बाजार के विशेषज्ञों के अनुसार, GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) सिर्फ एक अनौपचारिक संकेतक है और यह लिस्टिंग प्राइस का सटीक अनुमान नहीं देता। ग्रे मार्केट नियंत्रित नहीं होता, इसलिए इसमें कई बार अटकलें लगाई जाती हैं। निवेशकों को कंपनी के मजबूत फंडामेंटल्स और बैलेंस शीट को ध्यान में रखकर निवेश करना चाहिए।
निवेशकों के लिए एक्सपर्ट्स की सलाह
यदि IPO ₹430 या उससे ऊपर लिस्ट होता है, तो यह उन निवेशकों के लिए फायदेमंद रहेगा, जिन्होंने ऊपरी प्राइस बैंड ₹425 पर निवेश किया था। लेकिन अगर बाजार में गिरावट बनी रहती है, तो IPO पर बड़ा प्रीमियम मिलने की संभावना कम हो सकती है। लंबी अवधि के निवेशकों को कंपनी के फंडामेंटल्स देखकर निवेश का फैसला लेना चाहिए।