PhonePe के आईपीओ में शेयर बेचने को क्यों तैयार नहीं शेयरहोल्डर्स? बाजार में दिखा रहा बड़ा भरोसा
आमतौर पर जब कोई कंपनी शेयर बाजार में उतरती है, तो पुराने निवेशक अपना हिस्सा बेचकर निकलने की होड़ में रहते हैं। लेकिन फोनपे के मामले में कहानी बिल्कुल उलट है।

PhonePe IPO news: साल 2026 के सबसे बड़े आईपीओ (IPO) में से एक, फोनपे (PhonePe) की बाजार में एंट्री को लेकर एक बेहद दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। आमतौर पर जब कोई कंपनी शेयर बाजार में उतरती है, तो पुराने निवेशक अपना हिस्सा बेचकर निकलने की होड़ में रहते हैं। लेकिन फोनपे के मामले में कहानी बिल्कुल उलट है। कंपनी के आईपीओ की ओर बढ़ने के बावजूद, लगभग कोई भी शेयरधारक बाहर निकलने की जल्दबाजी में नहीं दिख रहा है।
Offer for Sale (OFS)
यह आईपीओ 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) से। इसमें कंपनी की सबसे बड़ी शेयरधारक वॉलमार्ट (Walmart) अपनी करीब 9 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रही है। हालांकि, बाजार के एक्सपर्ट इसे निवेश से पीछे हटना नहीं मान रहे हैं।
दरअसल, सेबी (SEBI) के नियमों के अनुसार किसी भी लिस्टेड कंपनी में कम से कम 10 प्रतिशत पब्लिक फ्लोट होना जरूरी है। वॉलमार्ट का यह विनिवेश केवल इसी कानूनी शर्त को पूरा करने के लिए है ताकि आईपीओ की राह साफ हो सके।
गिने-चुने निवेशक ही बेच रहे शेयर
हैरानी की बात यह है कि वॉलमार्ट के अलावा केवल दो ही अन्य शेयरधारक इसमें हिस्सा बेच रहे हैं- टाइगर ग्लोबल (0.2 प्रतिशत) और माइक्रोसॉफ्ट (0.7 प्रतिशत)। इनके अलावा सभी छोटे-बड़े शेयरधारकों ने इस आईपीओ में अपने शेयर न बेचने का फैसला लिया है। यह दिखाता है कि निवेशकों को कंपनी के भविष्य पर कितना गहरा भरोसा है।
General Atlantic ने बढ़ाया दांव
कंपनी की वित्तीय मजबूती का संकेत इस बात से भी मिलता है कि 'जनरल अटलांटिक' जैसे बड़े फंड ने साल 2025 में ही 600 मिलियन डॉलर का निवेश कर अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 8.9 प्रतिशत कर ली है।
इसी लेनदेन के दौरान कंपनी के संस्थापकों और कर्मचारियों ने अपने स्टॉक ऑप्शन का इस्तेमाल किया था, लेकिन उन्होंने अपने शेयरों का केवल 39 प्रतिशत हिस्सा ही टैक्स देनदारियों को चुकाने के लिए बेचा।
IPO के लिए क्या संकेत
बाजार के जानकारों का कहना है कि जहां आज के दौर में आईपीओ के समय शुरुआती निवेशकों में बाहर निकलने की होड़ मची रहती है, वहीं फोनपे के निवेशक लंबी अवधि के लिए टिके हुए हैं। सेबी की शर्तों के मुताबिक सिर्फ न्यूनतम हिस्सेदारी बेचना यह संकेत देता है कि संस्थापकों और निवेशकों को भरोसा है कि आने वाले समय में कंपनी की वैल्यू और भी ज्यादा बढ़ेगी।