शेयर बाजार की गिरावट पर एक्सपर्ट की राय, जानिए किन सेक्टर्स में है आगे दम
कोटक सिक्योरिटीज के एक्सपर्ट के अनुसार हालिया बाजार गिरावट अस्थायी है और ग्लोबल कारणों से आई है। Q4 में सेक्टरवार प्रदर्शन अलग-अलग रह सकता है। निवेशकों को घबराने के बजाय लंबी अवधि का नजरिया रखते हुए धीरे-धीरे निवेश करना चाहिए, खासकर मजबूत लार्जकैप और चुनिंदा सेक्टर्स में।

ग्लोबल अनिश्चितता और बढ़ती अस्थिरता के बीच भारतीय शेयर बाजार में आई हालिया गिरावट को लेकर कोटक सिक्योरिटीज के श्रीकांत चौहान का मानना है कि यह कोई स्ट्रक्चरल बदलाव नहीं, बल्कि एक अस्थायी झटका है।
कोटक सिक्योरिटीज के रिसर्च हेड चौहान ने कहा कि यह गिरावट मुख्य रूप से ग्लोबल कारणों जैसे- जियोपॉलिटिकल तनाव, ग्लोबल मार्केट वोलैटिलिटी और तेज रैली के बाद मुनाफावसूली की वजह से आई है।
चौहान के मुताबिक, अगर वैश्विक तनाव लंबे समय तक नहीं चलता, तो बाजार जल्द ही फंडामेंटल्स पर लौटेगा। उन्होंने कहा कि इस करेक्शन ने महंगे वैल्यूएशन को थोड़ा संतुलित किया है, जो बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है।
Q4FY26: सेक्टरवार कैसा रहेगा प्रदर्शन?
चौहान के अनुसार Q4FY26 में कुल मिलाकर नतीजे स्थिर रहेंगे, लेकिन सेक्टर के हिसाब से अंतर दिखेगा। ऑटो और ऑटो कंपोनेंट कंपनियां मजबूत वॉल्यूम और बेहतर कीमतों के कारण बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।
डाइवर्सिफाइड फाइनेंशियल कंपनियों में स्थिर ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है, जबकि IT सेक्टर को रुपये की कमजोरी से मार्जिन सपोर्ट मिल सकता है, भले ही रेवेन्यू ग्रोथ सीमित रहे।
मेटल और माइनिंग सेक्टर मजबूत रह सकता है, लेकिन कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, अपैरल और ट्रांसपोर्ट कंपनियों पर दबाव दिख सकता है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के मार्जिन पर भी असर पड़ने की संभावना है।
इनपुट लागत में बढ़ोतरी फिलहाल नियंत्रित है, जिससे कंपनियों के मार्जिन बड़े पैमाने पर प्रभावित नहीं होंगे। हालांकि, जिन सेक्टर्स में मांग कमजोर है या ईंधन लागत ज्यादा है, वहां दबाव दिख सकता है। एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड सेक्टर्स, खासकर IT और मैन्युफैक्चरिंग, रुपये की गिरावट से फायदा उठा सकते हैं।
मिडकैप-स्मॉलकैप में ठहराव संभव
एक्सपर्ट ने कहा कि पिछले एक साल की तेज रैली के बाद मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अब कंसोलिडेशन का दौर आ सकता है। चौहान ने निवेशकों को सलाह दी कि वे फिलहाल क्वालिटी लार्जकैप कंपनियों पर ज्यादा ध्यान दें।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जिन निवेशकों को किसी खास कंपनी की समझ है, उनके लिए चुनिंदा मिड और स्मॉलकैप में मौके बने रहेंगे।
रिटेल निवेश और जोखिम
श्रीकांत चौहान ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ी है और यह ट्रेंड आगे भी जारी रहने की संभावना है। लेकिन अगर ग्लोबल लिक्विडिटी कड़ी होती है या तनाव बढ़ता है, तो अस्थायी दबाव और ज्यादा वोलैटिलिटी देखने को मिल सकती है।
निवेशकों के लिए क्या हो रणनीति?
चौहान की सलाह है कि निवेशक जल्दबाजी में फैसले लेने से बचें और लंबी अवधि का नजरिया रखें। बाजार में गिरावट के दौरान धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है।
मध्यम अवधि में BFSI, ऑटोमोबाइल और कैपिटल गुड्स सेक्टर आकर्षक दिख रहे हैं, जहां मजबूत बैलेंस शीट और ग्रोथ की संभावना बनी हुई है।