TCS नतीजों से पहले बड़ा दांव, इंफोसिस-मफासिस पर ब्रोकरेज का भरोसा! चेक करें टारगेट

ब्रोकरेज के मुताबिक, Infosys मजबूत मैनेजमेंट और पिछले चार साल में बड़े आईटी कंपनियों के बीच सबसे बेहतर 'रेवेन्यू प्रति कर्मचारी' के चलते पसंदीदा लार्जकैप बना हुआ है। वहीं Mphasis को BFSI (बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, इंश्योरेंस) सेक्टर में बढ़ते टेक खर्च का बड़ा फायदा मिल सकता है।

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By Gaurav Kumar:

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के चौथी तिमाही नतीजों से पहले आईटी सेक्टर पर ब्रोकरेज Elara Securities ने नया आउटलुक जारी किया है। रिपोर्ट में Infosys और Mphasis को टॉप पिक बताया गया है, जिनमें 25-26 फीसदी तक अपसाइड की संभावना जताई गई है।

ब्रोकरेज के मुताबिक, Infosys मजबूत मैनेजमेंट और पिछले चार साल में बड़े आईटी कंपनियों के बीच सबसे बेहतर 'रेवेन्यू प्रति कर्मचारी' के चलते पसंदीदा लार्जकैप बना हुआ है। वहीं Mphasis को BFSI (बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, इंश्योरेंस) सेक्टर में बढ़ते टेक खर्च का बड़ा फायदा मिल सकता है।

आईटी शेयरों में गिरावट क्यों आई?

Nifty IT Index 3 फरवरी के बाद से करीब 23% टूट चुका है। लार्जकैप आईटी शेयरों में 20% और मिडकैप में 21% तक गिरावट आई। हालांकि हाल के दिनों में कीमतों में कुछ स्थिरता देखने को मिली है।

एलारा के अनुसार, पहले बाजार को डर था कि एआई और नई कंपनियां पारंपरिक आईटी कंपनियों का बिजनेस छीन लेंगी, लेकिन अब यह चिंता कुछ कम हुई है।

एलारा ने कहा कि इससे निकट और मध्यम अवधि में रेवेन्यू डिफ्लेशन का दबाव बनेगा। ब्रोकरेज के मुताबिक कंपनियां हायरिंग धीमी करेंगी और प्रति कर्मचारी उत्पादकता बढ़ाने पर जोर देंगी, जिससे मुनाफा स्थिर रह सकता है।

टारगेट प्राइस और ग्रोथ आउटलुक

इंफोसिस को लेकर एलारा ने 1,600 रुपये का टारगेट दिया है और FY26-28 के दौरान लो-डबल डिजिट अर्निंग ग्रोथ की उम्मीद जताई है। कंपनी को Forrester Wave AI सर्विसेज रिपोर्ट में स्ट्रेटेजी के लिहाज से नंबर-1 रैंक मिला है।

मफासिस के लिए 2,760 रुपये का टारगेट तय किया गया है। कंपनी की 60% से ज्यादा आय BFSI से आती है और FY26-28 में 16.5% CAGR ग्रोथ का अनुमान है।

वहीं Tata Consultancy Services पर ‘Accumulate’ रेटिंग के साथ 2,700 रुपये का टारगेट दिया गया है। LTIMindtree और Tech Mahindra में 10-16% अपसाइड का अनुमान है।

आगे क्या?

एलारा का मानना है कि एआई से आने वाला रेवेन्यू दबाव खासकर उन कंपनियों पर ज्यादा होगा, जिनका टाइम एंड मटेरियल (T&M) कॉन्ट्रैक्ट्स में हिस्सा ज्यादा है। ऐसे पोर्टफोलियो में 1-3% तक डिफ्लेशन संभव है, हालांकि फिलहाल इसे अनुमान में शामिल नहीं किया गया है।

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