F&O नए नियम: SEBI के कदम से स्टॉक मार्केट, निवेशकों और ब्रोकर पर क्या होगा असर?

बाजार नियामक SEBI ने फ्यूचर एंड ऑप्शन (F&O) सेगमेंट को लेकर नए नियम सामने रख दिए हैं। जिससे रिटेल के सेंटीमेंट्स से लेकर कुल वॉल्यूम पर भी साफ असर पड़ सकता है। हाल ही में उठाए गए कदमों के अलावा, जिसमें F&O ट्रेड्स पर हाई सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) भी शामिल है, यह स्टॉक एक्सचेंजों और ब्रोकरों के रेवेन्यू पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। आइये समझते हैं मार्केट के दिग्गजों का क्या कहना है?

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By Harsh Verma:

सेबी नए नियमों को चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे। वॉल्यूम पर सबसे बड़ा प्रभाव एक्सचेंज पर वीकली एक्सपायरी को सीमित करने और कॉन्ट्रैक्ट साइज को पहले 5-10 लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपये करने से असर साफ दिखेगा।

नए दिशानिर्देशों को लागू कई चरणों में किया जाएगा, जो 20 नवंबर से शुरू होगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार में एक झटके के तौर पर रिएक्शन देखने को मिल सकता है और ब्रोकर लेन-देन के वॉल्यूम में गिरावट देख सकते हैं, जो सीधे उनकी रेवेन्यू जनरेशन पर असर डालेगा। नए सेबी दिशानिर्देश F&O ट्रेडिंग में महत्वपूर्ण बदलाव लाएंगे और ब्रोकरों को आय के मामले में इसका प्रभाव महसूस होगा। कॉन्ट्रैक्ट के साइज को 15 लाख रुपये करने और प्रत्येक एक्सचेंज पर वीकली एक्सपायरीज को एक तक सीमित करने के कारण सेल्स और बॉटम लाइन में कम से कम 20 प्रतिशत की कमी की संभावना है। ये जानकारी Tradejini के COO त्रिवेश डी ने दी है।

HDFC Securities के Chief Strategy and Transformation Officer कुणाल संघवी का कहना है कि SEBI के जरिए इंडेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू बढ़ाने से छोटे और रिटेल निवेशकों के हितों की रक्षा की जाएगी, जो फ्यूचर एंड ऑप्शन सेगमेंट  में नुकसान उठाते हैं। वर्तमान वित्तीय वर्ष के 6 महीनों में इंडेक्स ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स 6,484 करोड़ रुपये तक पहुंच चुके हैं, जो पिछले वर्ष के 12 महीने के कॉन्ट्रैक्ट की संख्या 9,365 करोड़ रुपये का दो-तिहाई है और यह साल-दर-साल तेजी से बढ़ रहा है, खास तौर से खुदरा निवेशकों की भागीदारी की बात की जाए तो।

20 नवंबर से, weekly expiries, larger contract sizes और  additional Extreme Loss Margin (ELM) के जरिए जोखिमों के खिलाफ बेहतर सुरक्षा के नए उपायों को लागू किया जाएगा। इंट्रा डे  की पॉजिशन लिमिट की  1 अप्रैल, 2025 से दिन में कम से कम 4 बार होगी।

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