52 Week Low टच करने के बाद सुजलॉन एनर्जी पर ब्रोकरेज का बुलिश व्यू - BUY कॉल के साथ इतना दिया टारगेट
कंपनी का शेयर सुबह 11:02 बजे तक एनएसई पर 0.83% या 0.38 रुपये चढ़कर 45.91 रुपये पर ट्रेड कर रहा था और बीएसई पर शेयर 0.72% या 0.33 रुपये चढ़कर 45.88 रुपये पर कारोबार कर रहा था।

गुरुवार को शेयर बाजार में जारी तेजी के बीच सुजलॉन के निवेशकों के लिए पॉजिटिव खबर सामने आई है। दरअसल आज ब्रोकरेज फर्म Systematix ने सुजलॉन एनर्जी लिमिटेड (Suzlon Energy Ltd) पर कवरेज शुरू करते हुए BUY कॉल दिया है। बीते बुधवार को ही शेयर ने अपना फ्रेश 52 Week Low 45.39 रुपये को टच किया था।
कंपनी का शेयर सुबह 11:02 बजे तक एनएसई पर 0.83% या 0.38 रुपये चढ़कर 45.91 रुपये पर ट्रेड कर रहा था और बीएसई पर शेयर 0.72% या 0.33 रुपये चढ़कर 45.88 रुपये पर कारोबार कर रहा था।
Suzlon पर ब्रोकरेज की राय और टारगेट प्राइस
ब्रोकरेज फर्म Systematix ने आज कवरेज शुरू करते हुए अपनी रिपोर्ट में इस स्टॉक पर BUY रेटिंग देते हुए ₹67 का टारगेट प्राइस तय किया गया है। ब्रोकरेज ने कहा कि यह टारगेट FY28 की अनुमानित कमाई के आधार पर रखा गया है।
सुजलॉन भारत की प्रमुख विंड एनर्जी कंपनियों में से एक है, जो विंड टर्बाइन बनाने से लेकर उनकी इंस्टॉलेशन (EPC) और मेंटेनेंस (O&M) तक का पूरा काम खुद करती है।
कंपनी की कुल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता 4.5 गीगावॉट है और देश में इसके 20 गीगावॉट से ज्यादा विंड पावर प्रोजेक्ट पहले से लगे हुए हैं। भारत में नए विंड टर्बाइन इंस्टॉलेशन में सुजलॉन की करीब 35% हिस्सेदारी है, जिससे वह आने वाले समय में विंड एनर्जी के विस्तार का बड़ा फायदा उठा सकती है।
ब्रोकरेज ने आगे कहा कि भारत में रिन्यूएबल एनर्जी की खरीद सिर्फ क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि बिजली की उपलब्धता और स्थिर सप्लाई पर ज्यादा फोकस हो रहा है, जिसमें विंड पावर मजबूत साबित होती है। अगर विंड एनर्जी को बैटरी स्टोरेज सिस्टम के साथ जोड़ा जाए, तो स्टोरेज की जरूरत भी कम पड़ती है, जिससे प्रोजेक्ट सस्ते और ज्यादा फायदेमंद बनते हैं।
ब्रोकरेज को उम्मीद है कि कंपनी FY26 में 2,480 मेगावॉट और FY27 में 3,224 मेगावॉट के प्रोजेक्ट्स पूरा करेगी। इसके चलते FY25 से FY28 के बीच कंपनी की रेवेन्यू, EBITDA और मुनाफे में अच्छी ग्रोथ देखने को मिल सकती है। हालांकि, प्रोजेक्ट में देरी, ग्रिड कनेक्शन की दिक्कतें और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी समस्याएं कंपनी के लिए जोखिम बने रह सकते हैं।