भारतीय शेयर मार्केट पर बड़ी भविष्यवाणी, बुरी तरह ढह जाएगा बाजार!
जून में आए लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद भले ही भारतीय शेयर बाजार 9 प्रतिशत ऊपर हो। लेकिन 1 अक्टबूर से लेकर 4 नवंबर तक में 6 प्रतिशत नीचे जा चुका है। BSE लिस्टेड कंपनियों के मार्केट कैप में सितंबर के अपने उच्च स्तर से 35 लाख करोड़ रुपये साफ हो चुके हैं।

जून में आए लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद भले ही भारतीय शेयर बाजार 9 प्रतिशत ऊपर हो। लेकिन 1 अक्टबूर से लेकर 4 नवंबर तक में 6 प्रतिशत नीचे जा चुका है। BSE लिस्टेड कंपनियों के मार्केट कैप में सितंबर के अपने उच्च स्तर से 35 लाख करोड़ रुपये साफ हो चुके हैं। मंदी के माहौल में निवेशकों को समझ नहीं आ रहा कि ये गिरावट फिलहाल थमेगी या फिर और करेक्शन बाकी है? इन सबके बीच ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने भारतीय शेयर मार्केट पर बड़ी भविष्यवाणी की है।
4 अक्टूबर की गिरावट के निफ्टी50 को 24,000 के मनोवैज्ञानिक सपोर्ट से नीचे जा चुका है। मार्केट के दिग्गजों का बाजार पर नजरिया अब और ज्यादा गिरावट वाला हो रहा है। NSE100 कंपनियों में से लगभग आधी कंपनियों ने सितंबर तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। जो उम्मीद से 4% से अधिक कम है। जिसका असर स्टॉक में दबाव के तौर पर देखा जा रहा है।
अब अमेरिकी ब्रोकरेज फर्म BERNSTEIN ने भारतीय शेयर बाजार में और गिरावट की भविष्यवाणी की है। निफ्टी 23,500 के स्तर पर फिसल सकता है। ब्रोकरेज ने अपने रिपोर्ट में कहा है कि निफ्टी में मौजूदा स्तरों से 23,500 तक की सीमित गिरावट की उम्मीद है। मैक्रोइकोनॉमिक तस्वीर में मंदी के संकेत दिख रहे हैं, लेकिन मंदी की रफ़्तार तेज होने के बजाय धीरे-धीरे होने की उम्मीद है। बर्नस्टीन ने बॉटम-अप निवेश रणनीति पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी है। ये मंदी के बीच मौके वाले सेक्टर्स पर फोकस करती है।
ब्रोकरेज का कहना है कि ज्यादातर सेक्टर में लगातार अर्निंग्स में कमी आई है। बैंकों को बड़े खिलाड़ियों का सपोर्ट मिला है, हालांकि डिपॉजिट दर पर संकेट बना हुआ है और IT में गिरावट आई है। हेल्थ सर्विस, ऑटो और कंज्यूमर गुड्स समेत ज्यादातर दूसरे सेक्टर ने Q2 में खराब परफॉर्म किया है। ऑटो कमजोर मांग से जूझ रहे हैं, शहरी बाजारों में कंजूमर गुड्स में मंदी देखी जा रही है। यूटिलिटी, इंडस्ट्रियल और सीमेंट जैसे सेक्टर्स में कमजोर पूंजीगत खर्च और प्रतिकूल मानसून के कारण कम मांग का सामना करना पड़ रहा है। बर्नस्टीन का मानना है कि बाजार ने मंदी की सीमा को पूरी तरह से नहीं आंका है।
भारतीय बाजारों की स्थिति देखें तो NSE 500 में 170 से अधिक स्टॉक हाल के अपने टॉप लेवल से 25 प्रतिशत से अधिक नीचे हैं। विदेशी निवेशकों की जोरदार बिक्री भी जारी है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए है और इसे निवेश सलाह के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए। निवेश निर्णय लेने से पहले एक वित्तीय सलाहकार से परामर्श करने की सिफारिश की जाती है।