क्रेडिट कार्ड की बड़ी लिमिट देखकर न हों खुश, सैलरी से ज्यादा लिमिट देने के पीछे क्या है बैंक का खेल? समझिए इसके पीछे की वजह

क्रेडिट कार्ड की बड़ी लिमिट देखकर ज्यादा खर्च करना आसान लगता है, लेकिन यही आदत धीरे-धीरे आपके बजट और Credit Score पर भारी पड़ सकती है। बैंक सैलरी से ज्यादा Limit क्यों देते हैं और Card इस्तेमाल करते समय कौन-सी गलतियां आपकी जेब खाली कर सकती हैं, जानिए पूरी खबर में।

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In Short

  • Credit Card से खर्च अपनी टेक-होम सैलरी के 30% तक रखना बेहतर है, ताकि पूरा बिल समय पर चुकाया जा सके।
  • बैंक Credit Limit तय करते समय सैलरी के साथ Credit Score, Payment History और Financial Profile भी देखते हैं।
  • सिर्फ Minimum Due भरने से बाकी रकम पर Interest बढ़ता रहता है, इसलिए हर Billing Cycle में Total Due चुकाना चाहिए।

By Gaurav Kumar:

Credit Card Limit: Credit Card से खर्च करना जितना आसान है, उसका बिल चुकाना उतना ही जरूरी है। कई बार छोटी-छोटी खरीदारी मिलकर महीने के आखिर में बड़ा बिल बना देती है। ऐसे में अगर खर्च पर नजर न रखी जाए, तो घर का बजट बिगड़ सकता है और बाकी जरूरी कामों के लिए पैसे कम पड़ सकते हैं।

तो सवाल है कि Credit Card से कितना खर्च किया जाए, ताकि बिल भी समय पर भर जाए और महीने का बजट भी न बिगड़े?

सैलरी का 30% तक ही रखें Credit Card खर्च

क्रेडिट कार्ड की लिमिट ज्यादा होने का मतलब यह नहीं है कि आप पूरी रकम खर्च कर दें। जानकारों के मुताबिक, कार्ड से किया गया खर्च आपकी टेक-होम सैलरी के 30% तक ही रहना चाहिए। इससे बिल आने पर उसे भरने में परेशानी नहीं होगी।

मान लीजिए आपकी टेक-होम सैलरी ₹60,000 है, तो क्रेडिट कार्ड से करीब ₹18,000 तक खर्च करना ठीक माना जाता है। इससे ज्यादा खर्च करने पर महीने का बजट बिगड़ सकता है और बिल भरना मुश्किल हो सकता है।

बार-बार ज्यादा खर्च करने से आपके क्रेडिट स्कोर पर भी बुरा असर पड़ सकता है।लेकिन जब सैलरी कम हो, तो बैंक उससे ज्यादा क्रेडिट लिमिट क्यों दे देते हैं?

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सैलरी से ज्यादा Credit Limit क्यों देते हैं बैंक?

अक्सर ₹50,000 की सैलरी वाले ग्राहक को बैंक ₹70,000 या उससे ज्यादा की क्रेडिट लिमिट दे देता है। लिमिट तय करते समय बैंक सिर्फ सैलरी नहीं देखता। वह ग्राहक का क्रेडिट स्कोर, पुराने बिल भरने का रिकॉर्ड और उसकी पूरी फाइनेंशियल प्रोफाइल भी चेक करता है।

ज्यादा लिमिट देने से बैंक को कमाई करने का मौका भी मिलता है। ग्राहक क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करता है और पूरा बिल समय पर चुका देता है, तो बैंक को दुकानदार यानी मर्चेंट से कमीशन मिलता है। वहीं ग्राहक पूरा बिल नहीं भरता, तो बची हुई रकम पर इंटरेस्ट और लेट फीस लग सकती है।

अब सवाल है कि हर महीने सिर्फ मिनिमम ड्यू भरने से राहत मिलती है या आपका बिल और ज्यादा बढ़ सकता है?

Minimum Due भरना क्यों पड़ सकता है भारी?

हर महीने सिर्फ मिनिमम ड्यू भरना सही तरीका नहीं है। इससे उस समय कार्ड बंद होने या लेट पेमेंट लगने का खतरा कम हो सकता है, लेकिन बाकी बची रकम पर इंटरेस्ट जुड़ता रहता है।

अगले महीने पुराने बकाये के साथ नया खर्च भी जुड़ जाता है। इससे टोटल बिल तेजी से बढ़ सकता है। इसलिए कोशिश करें कि हर बिलिंग साइकल में पूरा टोटल ड्यू समय पर चुका दिया जाए।

लेकिन क्या खर्च संभालने के लिए एक से ज्यादा क्रेडिट कार्ड रखना ठीक है?

एक से ज्यादा Credit Card रखना सही है?

फ्यूल, शॉपिंग और ट्रैवल ऑफर्स के लिए लोग अलग-अलग क्रेडिट कार्ड रखते हैं। एक से ज्यादा कार्ड रखना गलत नहीं है, लेकिन सभी कार्ड की ड्यू डेट और खर्च पर नजर रखना जरूरी है।

पेमेंट मिस होने से बचने के लिए ऑटो-पे या रिमाइंडर लगा सकते हैं। साथ ही सिर्फ ऑफर देखकर हर जगह कार्ड इस्तेमाल करने से बचें। क्रेडिट कार्ड को एक्स्ट्रा इनकम नहीं, बल्कि समय पर लौटाया जाने वाला उधार समझकर इस्तेमाल करें।

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