घर किराए पर लेने से पहले देना पड़ रहा लाखों का डिपॉजिट, जानिए किस शहर में कितना पैसा फंसा
किराए का घर लेते समय सिर्फ महीने का किराया ही खर्च नहीं होता। कई शहरों में भारी सिक्योरिटी डिपॉजिट लोगों की पसंद, बचत और जरूरतों पर असर डाल रहा है। छह बड़े शहरों में कितनी रकम फंसी है और किस शहर के किरायेदार सबसे ज्यादा परेशान हैं? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

In Short
- देश के छह बड़े शहरों में किरायेदारों के 1.26 लाख करोड़ रुपये सिक्योरिटी डिपॉजिट में फंसे हैं।
- मुंबई में सबसे ज्यादा 41,156 करोड़ रुपये जबकि बेंगलुरु में 31,628 करोड़ रुपये जमा हैं।
- बेंगलुरु के 75 प्रतिशत किरायेदार ज्यादा डिपॉजिट की वजह से अपनी पसंद का घर नहीं ले सके।
Security Deposit India: किराए पर घर लेने वालों को सिर्फ हर महीने का किराया ही नहीं देना पड़ता। घर में रहने से पहले कई महीनों का किराया सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में भी जमा करना पड़ता है। इस वजह से लोगों के लाखों रुपये लंबे समय तक मकान मालिक के पास फंसे रहते हैं।
NoBroker Rent Report 2026 के मुताबिक, देश के छह बड़े शहरों में किरायेदारों के करीब 1,26,042 करोड़ रुपये सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में जमा हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि यह रकम कई राज्यों के एक साल के इंफ्रास्ट्रक्चर बजट से भी ज्यादा है।
सालों तक फंसा रहता है पैसा
किराया हर महीने देना पड़ता है, लेकिन सिक्योरिटी डिपॉजिट का पैसा तब तक मकान मालिक के पास रहता है, जब तक किरायेदार घर खाली नहीं करता।
अगर यही पैसा लोगों के पास रहता तो वे इसे पढ़ाई, इलाज, घर खरीदने या किसी दूसरी जरूरत पर खर्च कर सकते थे। इस रकम को निवेश करके कमाई भी की जा सकती थी। इसके बजाय पैसा कई साल तक मकान मालिक के पास पड़ा रहता है।
मुंबई में सबसे ज्यादा पैसा फंसा
रिपोर्ट के मुताबिक, छह बड़े शहरों में मुंबई के किरायेदारों का सबसे ज्यादा पैसा सिक्योरिटी डिपॉजिट में फंसा हुआ है। मुंबई में यह रकम 41,156 करोड़ रुपये है।
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इसके बाद बेंगलुरु में 31,628 करोड़ रुपये और दिल्ली-NCR में 24,054 करोड़ रुपये जमा हैं। चेन्नई में 17,346 करोड़ रुपये, हैदराबाद में 6,843 करोड़ रुपये और पुणे में 5,015 करोड़ रुपये सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में फंसे हैं।
पसंद का घर छोड़ने को मजबूर लोग
बेंगलुरु में सिक्योरिटी डिपॉजिट किरायेदारों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन गया है। रिपोर्ट में 75 प्रतिशत किरायेदारों ने कहा कि ज्यादा डिपॉजिट की वजह से वे अपनी पसंद का घर नहीं ले सके।
कई लोगों को घर की जगह, साइज और सुविधाओं से समझौता करना पड़ा। बहुत से किरायेदार हर महीने थोड़ा ज्यादा किराया देने के लिए तैयार हैं, लेकिन वे चाहते हैं कि सिक्योरिटी डिपॉजिट कम लिया जाए।
डिपॉजिट वापस मिलना भी मुश्किल
सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करना ही नहीं, उसे वापस लेना भी कई बार मुश्किल हो जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, चेन्नई में 11 प्रतिशत किरायेदारों ने कहा कि उन्हें अपना डिपॉजिट वापस ही नहीं मिला।
घर खाली करते समय पेंट, मरम्मत और रखरखाव के नाम पर पैसे काट लिए जाते हैं। इसी बात को लेकर मकान मालिक और किरायेदारों के बीच अक्सर विवाद होता है।
क्या बदलना चाहिए सिक्योरिटी डिपॉजिट का तरीका?
रिपोर्ट में कहा गया है कि सिक्योरिटी डिपॉजिट के पुराने तरीके पर दोबारा सोचने की जरूरत है। कई देशों में डिपॉजिट इंश्योरेंस, बैंक गारंटी और कम डिपॉजिट वाली सुविधाएं दी जाती हैं।
भारत में भी ऐसे तरीकों पर धीरे-धीरे बात हो रही है। फिलहाल किराए पर घर लेने वाले लोगों को हर महीने के किराए के साथ कई महीनों का पैसा पहले ही जमा करने के लिए तैयार रहना पड़ता है।