LPG ग्राहकों पर बढ़ सकता है बोझ, रसोई गैस और नेचुरल गैस पर नया शुल्क लगा सकती है सरकार
रसोई गैस पर नया शुल्क लगाने की तैयारी चर्चा में है। अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो सिलेंडर की कीमत बढ़ सकती है। सरकार का कहना है कि इस रकम से रणनीतिक फ्यूल भंडार बनाया जाएगा, जिससे भविष्य में सप्लाई संकट का असर कम किया जा सके।

In Short
- घरेलू LPG पर ₹1.29 प्रति किलोग्राम शुल्क लगा तो 14.2 किलो का सिलेंडर करीब ₹18 महंगा हो सकता है।
- नेचुरल गैस पर ₹1.43 प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर शुल्क लगाने का प्रस्ताव है।
- शुल्क से जुटी रकम LNG और LPG समेत रणनीतिक फ्यूल भंडार और स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में इस्तेमाल होगी।
LPG cylinder price hike: केंद्र सरकार रसोई गैस और नेचुरल गैस इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों पर एक छोटा शुल्क लगाने पर विचार कर रही है। इस शुल्क से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल देश में रणनीतिक फ्यूल भंडार बनाने के लिए किया जा सकता है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार अगले 10 वर्षों में करीब 42 अरब डॉलर का रणनीतिक फ्यूल रिजर्व कार्यक्रम तैयार करना चाहती है।
ईरान संघर्ष के दौरान फ्यूल सप्लाई में आई रुकावटों के बाद यह प्रस्ताव सामने आया है। इन रुकावटों से भारत की विदेश से आने वाले तेल और गैस पर निर्भरता एक बार फिर सामने आई थी।
LPG सिलेंडर पर कितना बढ़ सकता है खर्च?
पेट्रोलियम मंत्रालय घरेलू LPG पर ₹1.29 प्रति किलोग्राम का शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है। ऐसा होने पर 14.2 किलोग्राम वाले सामान्य घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत करीब ₹18 बढ़ सकती है।
मौजूदा खपत के हिसाब से इस शुल्क से सरकार को हर साल करीब 46 करोड़ डॉलर मिलने का अनुमान है। प्रस्तावित शुल्क के कारण परिवारों का गैस बिल करीब 2 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
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हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि यह शुल्क ग्राहकों से किस तरीके से वसूला जाएगा।
नेचुरल गैस पर भी शुल्क का प्रस्ताव
नेचुरल गैस पर ₹1.43 प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर शुल्क लगाने का प्रस्ताव है। इससे हर साल करीब एक अरब डॉलर जुटाए जा सकते हैं।
LPG और नेचुरल गैस पर लगने वाले दोनों शुल्कों से सरकार को सालाना करीब 1.5 अरब डॉलर मिल सकते हैं। इस रकम का इस्तेमाल गैस स्टोरेज से जुड़ा बुनियादी ढांचा तैयार करने में किया जाएगा।
पहली बार LNG और LPG भी होंगे शामिल
अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो पहली बार भारत का रणनीतिक फ्यूल भंडार केवल कच्चे तेल तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें LNG यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस और LPG यानी रसोई गैस को भी शामिल किया जाएगा।
योजना के तहत देश में इतना फ्यूल जमा करने का लक्ष्य है, जिससे करीब दो महीने की कच्चे तेल और LNG की मांग पूरी की जा सके। वहीं, LPG का भंडार करीब छह सप्ताह की जरूरत के बराबर रखा जा सकता है।
10 वर्षों में बढ़ेगी स्टोरेज क्षमता
सरकार का अनुमान है कि अगले 10 वर्षों में 2.8 करोड़ टन अतिरिक्त कच्चे तेल की स्टोरेज क्षमता की जरूरत होगी। इसके अलावा 90 लाख टन LNG और 40 लाख टन LPG भंडारण क्षमता तैयार करनी होगी।
42 अरब डॉलर की कुल योजना में आधे से ज्यादा रकम स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने पर खर्च होगी। बाकी रकम फ्यूल खरीदकर भंडार भरने में इस्तेमाल की जाएगी।
LPG और नेचुरल गैस की स्टोरेज सुविधाओं का खर्च ग्राहकों से लिए जाने वाले शुल्क से उठाया जा सकता है। वहीं, कच्चे तेल के रणनीतिक भंडार और फ्यूल की खरीद का खर्च केंद्र सरकार उठाती रहेगी।
अभी प्रस्ताव को मंजूरी मिलना बाकी
भारत अपनी जरूरत का करीब 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इसी वजह से वैश्विक संघर्ष, सप्लाई रुकने और होर्मुज स्ट्रेट में तनाव जैसी घटनाओं का भारत पर सीधा असर पड़ता है।
फिलहाल यह प्रस्ताव अलग-अलग मंत्रालयों के बीच चर्चा में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने अभी इसे मंजूरी नहीं दी है।