बच्चे की पढ़ाई के लिए आज से शुरू करें निवेश, छोटी बचत से तैयार हो सकता है बड़ा फंड
बच्चों की पढ़ाई का खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में सही समय पर निवेश शुरू करके शिक्षा के लिए बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है। लंबी अवधि के लक्ष्य के लिए एसआईपी और दूसरे निवेश विकल्प मददगार हो सकते हैं।

In Short
- बच्चे की पढ़ाई के लिए निवेश शुरू करने में समय सबसे अहम भूमिका निभाता है, जिससे छोटी रकम से भी बड़ा फंड बनाया जा सकता है
- 2 से 3 साल, 3 से 7 साल और 10 साल से ज्यादा की अवधि के हिसाब से अलग-अलग निवेश विकल्प चुने जा सकते हैं
- शिक्षा फंड को अलग रखना और फीस के साथ हॉस्टल, किताबें व अन्य खर्चों को ध्यान में रखना जरूरी है
Child Education Planning: बच्चों की पढ़ाई का खर्च हर साल बढ़ रहा है। ऐसे में आज जो रकम पर्याप्त लग रही है, आने वाले समय में वही रकम कम पड़ सकती है। इसलिए बच्चे की शिक्षा के लिए निवेश की योजना बनाते समय मौजूदा फीस के साथ भविष्य की महंगाई को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
कम उम्र से निवेश शुरू करने पर माता-पिता को ज्यादा समय मिलता है, जिससे छोटी-छोटी रकम निवेश करके भी पढ़ाई के लिए बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है।
जल्दी निवेश शुरू करने से मिलेगा ज्यादा समय
बच्चे की शिक्षा के लिए निवेश जितनी जल्दी शुरू किया जाए, उतना फायदा मिल सकता है। कम उम्र में शुरुआत करने से निवेश को बढ़ने के लिए कई साल मिल जाते हैं।
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हर महीने थोड़ी रकम निवेश करने से घरेलू बजट पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता और धीरे-धीरे शिक्षा के लिए जरूरी फंड तैयार किया जा सकता है।
शिक्षा के लिए अलग-अलग समय के हिसाब से निवेश
बच्चे की पढ़ाई के लिए निवेश करते समय समय अवधि के हिसाब से विकल्प चुने जा सकते हैं। अगर पढ़ाई का लक्ष्य 2 से 3 साल दूर है तो बैंक एफडी, लिक्विड फंड और कम जोखिम वाले विकल्पों में निवेश किया जा सकता है।
वहीं 3 से 7 साल की अवधि के लिए हाइब्रिड म्यूचुअल फंड, पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि योजना जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। अगर बच्चे की पढ़ाई का लक्ष्य 10 साल से ज्यादा दूर है तो इक्विटी म्यूचुअल फंड और लंबी अवधि के निवेश विकल्पों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
निवेश की सही रणनीति बनाना जरूरी
बच्चे की शिक्षा के लिए निवेश करते समय बोनस या सालाना इंक्रीमेंट का एक हिस्सा भी निवेश में लगाया जा सकता है।
बच्चे की उम्र कम होने पर इक्विटी में ज्यादा निवेश किया जा सकता है। वहीं पढ़ाई का समय नजदीक आने पर धीरे-धीरे सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ना बेहतर हो सकता है।
पढ़ाई के पैसे को अलग रखना जरूरी
बच्चे की शिक्षा के लिए बनाया गया फंड दूसरी जरूरतों में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अचानक आने वाले खर्च, अतिरिक्त फीस, विदेश में पढ़ाई या अन्य जरूरतों के लिए अलग से योजना बनाना जरूरी है।
एसआईपी शिक्षा योजना का एक अहम हिस्सा हो सकती है। जल्दी शुरुआत करने से निवेश को बढ़ने के लिए ज्यादा समय मिलता है। हालांकि, बाजार से जुड़े निवेश में रिटर्न तय नहीं होता और इसमें बदलाव हो सकता है।
शिक्षा की योजना बनाते समय सिर्फ फीस ही नहीं, बल्कि हॉस्टल, किताबें, आवेदन शुल्क और दूसरे खर्चों को भी ध्यान में रखना चाहिए।