इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम 5.0 को सरकार ने दी मंजूरी! MSME और एयरलाइन सेक्टर को मिलेगा बड़ा सहारा
इस योजना का उद्देश्य MSME, गैर-MSME और एयरलाइन सेक्टर को अतिरिक्त वर्किंग कैपिटल उपलब्ध कराकर उनकी वित्तीय जरूरतों को पूरा करना है, ताकि वे मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच अपने कारोबार को सुचारु रूप से चला सकें।

Emergency Credit Line Guarantee Scheme: केंद्र सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच कारोबारों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) 5.0 को मंजूरी दे दी गई है।
इस योजना का उद्देश्य MSME, गैर-MSME और एयरलाइन सेक्टर को अतिरिक्त वर्किंग कैपिटल उपलब्ध कराकर उनकी वित्तीय जरूरतों को पूरा करना है, ताकि वे मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच अपने कारोबार को सुचारु रूप से चला सकें।
2.55 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त क्रेडिट फ्लो का टारगेट
सरकार की इस नई योजना के तहत कुल 2.55 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्त क्रेडिट फ्लो का लक्ष्य रखा गया है। इसमें एयरलाइन सेक्टर के लिए 5,000 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया गया है।
योजना के तहत नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) सदस्य लोन संस्थानों (MLIs) को गारंटी कवरेज प्रदान करेगी। MSME सेक्टर के लिए 100 प्रतिशत और गैर-MSME व एयरलाइन सेक्टर के लिए 90 प्रतिशत तक की गारंटी दी जाएगी।
किन कंपनियों को मिलेगा लाभ?
इस योजना का लाभ उन MSME और गैर-MSME कारोबारों को मिलेगा जिनकी 31 मार्च 2026 तक वर्किंग कैपिटल सीमा और क्रेडिट सुविधाएं एक्टिव और ‘स्टैंडर्ड अकाउंट’ कैटेगरी में होंगी।
इसके अलावा निर्धारित पैसेंजर एयरलाइन कंपनियां भी इस योजना के दायरे में शामिल होंगी। सरकार का कहना है कि इससे ऐसे व्यवसायों को अल्पकालिक नकदी संकट से निपटने में मदद मिलेगी।
अतिरिक्त कर्ज और भुगतान अवधि की व्यवस्था
ECLGS 5.0 के तहत पात्र कंपनियों को FY26 की चौथी तिमाही में उपयोग की गई पीक वर्किंग कैपिटल का 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त कर्ज मिल सकेगा। हालांकि इसकी अधिकतम सीमा 100 करोड़ रुपये तय की गई है। वहीं एयरलाइन कंपनियों को विशेष शर्तों के साथ 1,500 करोड़ रुपये तक की सहायता दी जा सकती है। सबसे बड़ी राहत यह है कि इस योजना में किसी प्रकार की गारंटी फीस नहीं ली जाएगी।
कर्ज की अवधि MSME और गैर-MSME सेक्टर के लिए 5 वर्ष तय की गई है, जिसमें 1 वर्ष का मोरेटोरियम शामिल होगा। वहीं एयरलाइन सेक्टर को 7 वर्ष की अवधि मिलेगी और इसमें 2 वर्ष का मोरेटोरियम दिया जाएगा।