FD पर तगड़ी कमाई का मौका! जानिए बैंक क्यों दे रहे हैं शानदार ऑफर

देश के बैंकों में कैश की कमी के दोबारा बढ़ने से बैंक डिपॉजिट बढ़ाने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे हैं। इससे सबसे ज्यादा फायदा बैंकों में रकम करने वालों को मिलेगा क्योंकि बैंक ग्राहकों को जमा के लिए लुभाने की कोशिश में अब ज्यादा ब्याज ऑफर कर रहे हैं। 

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5 crucial money-related rules that will be effective from September
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By Harsh Verma:

देश के बैंकों में कैश की कमी के दोबारा बढ़ने से बैंक डिपॉजिट बढ़ाने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे हैं। इससे सबसे ज्यादा फायदा बैंकों में रकम करने वालों को मिलेगा क्योंकि बैंक ग्राहकों को जमा के लिए लुभाने की कोशिश में अब ज्यादा ब्याज ऑफर कर रहे हैं। 

दरअसल दिसंबर के दूसरे पखवाड़े यानी 16 से 31 दिसंबर में देश के बैंकिंग सिस्टम में नकदी की कमी डेढ़ लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई। ऐसे में अब बैंकों को कैश की जरुरत है जिसके लिए डिपॉजिट की ब्याज दरें साढ़े 7 परसेंट तक पहुंच गई हैं।

इसके असर से एक तरफ जहां कुछ बैंकों ने ज्यादा ब्याज वाली नई स्कीम्स की आखिरी तारीख बढ़ा दी है वहीं कुछ ने नई एफडी स्कीम्स लॉन्च करके ज्यादा ब्याज देने का ऑफर दिया है। अगर अलग अलग बैंकों की बात करें तो सबसे ज्यादा ब्याज देने में 

-फेडरल बैंक आगे है जो 444 दिनों की एफडी पर साढ़े 7 फीसदी तक ब्याज दे रहा है
-वहीं इंडियन बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा 400 दिनों की एफडी पर 7.30 परसेंट ब्याज दे रहे हैं
-इसके अलावा IDBI 555 दिनों की एफडी पर 7.40 फीसदी
- SBI 444 दिनों की एफडी पर 7.20 परसेंट ब्याज दे रहा है

वहीं अगर वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली ब्याज दरों की बात की जाए तो फिर यहां फायदा और भी ज्यादा हो रहा है क्योंकि आईडीबीआई और इंडियन बैंक सीनियर और सुपर सीनियर सिटीजंस को 0.65 फीसदी तक ज्यादा ब्याज दे रहे हैं। इसके चलते सुपर सीनियर सिटीजंस के लिए ब्याज दरें 8.05 परसेंट तक हो गई हैं।

इस सब फायदे की वजह नकदी का संकट है क्योंकि दिसंबर के पहले हफ्ते में बैंकों का कैश सरप्लस 1 लाख करोड़ रुपए था। लेकिन दूसरे पखवाड़े में टैक्स चुकाने के लिए निकासी और विदेशी मुद्रा बाजार में आरबीआई के दखल से नकदी घट गई। बैंकों के मुताबिक अब रेट बढ़ाकर डिपॉजिट बढ़ाने का दबाव बढ़ गया है।

इसी के चलते बैंकों ने रिजर्व बैंक से लिक्विडिटी बढ़ाने के उपाय करने की अपील की थी। इसके बाद आरबीआई ने पिछले हफ्ते डॉलर-रूपी स्वैप का इस्तेमाल किया। आरबीआई ने करीब 3 अरब डॉलर के स्वैप का इस्तेमाल किया। इससे बैंकों को करीब 25 हजार 970 करोड़ रुपए कैश मिला। स्वैप की मैच्योरिटी 3,6 और 12 महीने है। लेकिन ये रकम काफी नहीं है क्योंकि बैंकों को करीब सवा लाख करोड़ की नकदी और चाहिए।

रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक

-27 दिसंबर 2024 तक बैंकों का डिपॉजिट 9.8 फीसदी की दर से बढ़ा था और कुल डिपॉजिट 220.6 लाख करोड़ पर पहुंच गया था
-इसी दौरान क्रेडिट ग्रोथ 11.16 परसेंट दर्ज की गई थी और लोन 177.43 लाख करोड़ तक पहुंच गया था
-यानी बैंक हर 100 रुपए के डिपॉजिट पर 80 रुपए का लोन बांट रहे हैं

क्रेडिट टू डिपॉजिट का ये अनुपात 2023 में भी 73 के मुकाबले 79 फीसदी था। लिहाजा अब बैंकों पर जमा बढ़ाने का दबाव है जिसका फायदा ग्राहकों को ज्यादा ब्याज के तौर पर मिल रहा है।

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