8th Pay Commission: ₹69,000 हो सकती है बेसिक सैलरी! 6% सालाना इन्क्रीमेंट की भी मांग - पूरी डिटेल यहां
8वें वेतन आयोग के लिए कर्मचारियों ने वेतन बढ़ोतरी, भत्तों और फिटमेंट फैक्टर में बड़े बदलाव की मांग की है। प्रस्ताव में न्यूनतम सैलरी बढ़ाने, सालाना इन्क्रीमेंट दोगुना करने और पे-मैट्रिक्स को सरल बनाने की बात कही गई है, जिससे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ा आर्थिक लाभ मिल सकता है।

8th Pay Commission 2026: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (CPC) के लिए 51 पन्नों का एक विस्तृत मांग पत्र यानी मेमोरेंडम सौंप दिया है।
इस रिपोर्ट में वेतन संशोधन, भत्तों और सैलरी के ढांचे में बदलाव को लेकर कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई हैं। यह कदम समय सीमा से पहले उठाया गया है, जिससे आने वाले समय में होने वाली चर्चाओं का रास्ता साफ हो गया है।
सैलरी में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव
इस मांग पत्र की सबसे अहम बात वेतन में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। कर्मचारी पक्ष ने 'फिटमेंट फैक्टर' को 2.57 से बढ़ाकर 3.833 करने की मांग की है।
अगर सरकार इसे स्वीकार कर लेती है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में जबरदस्त उछाल आएगा। प्रस्ताव के मुताबिक, न्यूनतम बेसिक सैलरी को मौजूदा 18,000 रुपये से बढ़ाकर करीब 69,000 रुपये करने की बात कही गई है।
वहीं, अधिकतम सैलरी को 2,15,000 रुपये तय करने का सुझाव दिया गया है। इससे एंट्री लेवल से लेकर सीनियर रैंक तक के सभी कर्मचारियों को सीधा फायदा होगा।
सालाना वेतन वृद्धि और भत्तों पर जोर
एक और बड़ा बदलाव सालाना वेतन वृद्धि (इन्क्रीमेंट) की दर को लेकर है। वर्तमान में यह दर 3% है, जिसे बढ़ाकर 6% करने की मांग की गई है। स्टाफ साइड के सचिव शिव गोपाल मिश्रा का कहना है कि मौजूदा दर महंगाई और रहन-सहन के खर्च के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रही है।
उनका तर्क है कि 6% की वृद्धि से कर्मचारियों की खरीदारी की शक्ति बनी रहेगी। इसके अलावा, 'परिवार' की परिभाषा में भी बदलाव का सुझाव दिया गया है। अब मांग की गई है कि एक परिवार में सदस्यों की संख्या 3 के बजाय 5 मानी जाए और इसमें आश्रित माता-पिता को भी शामिल किया जाए।
पे-मैट्रिक्स को सरल बनाने की तैयारी
कर्मचारी संगठन ने सैलरी स्ट्रक्चर को आसान बनाने के लिए कई पे-स्केल को आपस में जोड़ने का प्रस्ताव दिया है। योजना यह है कि निचले और मध्यम स्तर के पे-स्केल को मिलाकर उनकी संख्या कम कर दी जाए ताकि विसंगतियां खत्म हों।
उदाहरण के लिए, पे-स्केल 2 और 3 को मिलाकर एक नया पे-स्केल 2 बनाने का सुझाव है। इसी तरह अन्य स्तरों पर भी विलय की बात कही गई है। इसका मुख्य उद्देश्य एक ऐसा ढांचा तैयार करना है जो पारदर्शी और न्यायसंगत हो।
आगे क्या उम्मीदें?
NC-JCM सरकार और कर्मचारियों के बीच बातचीत का एक मुख्य जरिया है। हालांकि सरकार ने अभी तक आधिकारिक तौर पर 8वें वेतन आयोग के गठन की घोषणा नहीं की है, लेकिन महंगाई भत्ते (DA) और अन्य चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।
शिव गोपाल मिश्रा ने पुष्टि की है कि ये सिफारिशें कर्मचारियों की बदलती जरूरतों और महंगाई के दबाव को देखते हुए तैयार की गई हैं। हालांकि ये सुझाव अभी केवल सिफारिशें हैं और अंतिम फैसला सरकार को ही लेना है, लेकिन अगर ये मांगें मानी जाती हैं, तो लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।