PF के 14 लाख रुपये देने में EPFO ने की 35 दिन की देरी, अब कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला!

PF क्लेम में देरी को लेकर मुंबई के कंज्यूमर कोर्ट ने EPFO को झटका दिया है। 14 लाख रुपये से ज्यादा के क्लेम को तय समय में सेटल नहीं करने पर EPFO को 35 दिन की देरी के लिए 6 फीसदी सालाना ब्याज देना होगा। आदेश के पालन के लिए 45 दिन दिए गए हैं।

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In Short

  • 14 लाख रुपये से ज्यादा के PF क्लेम में हुई 35 दिन की देरी।
  • मुंबई कंज्यूमर कोर्ट ने EPFO को 6% सालाना ब्याज देने का आदेश दिया।
  • EPFO को 45 दिन के भीतर कोर्ट के आदेश का पालन करना होगा।

By Sonam:

पीएफ क्लेम को लेकर मुंबई के एक कंज्यूमर कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) को 35 दिन की देरी के लिए 14 लाख रुपये से ज्यादा की क्लेम राशि पर 6 फीसदी सालाना ब्याज देने का आदेश दिया है। साथ ही EPFO को इस आदेश का पालन करने के लिए 45 दिन का समय दिया गया है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला फ्लीट मैरीटाइम सर्विसेज (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के एक रिटायर्ड कर्मचारी से जुड़ा है। कर्मचारी ने 19 अक्टूबर 2016 को 14,06,272 रुपये के PF क्लेम के लिए आवेदन किया था। हालांकि, EPFO की ओर से तय समय-सीमा में इस क्लेम का निपटारा नहीं किया गया।

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EPFO के नियमों के मुताबिक क्लेम को 20 दिन के भीतर सेटल किया जाना था। लेकिन इस मामले में क्लेम सेटल होने में 35 दिन की देरी हुई। इसके बाद रिटायर्ड कर्मचारी ने मुंबई के कंज्यूमर कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई।

EPFO ने देरी से किया इनकार

मामले की सुनवाई के दौरान EPFO ने देरी के आरोप से इनकार किया। संस्था का कहना था कि कर्मचारी ने ओरिजिनल क्लेम के साथ जरूरी जॉइंट डिक्लेरेशन जमा नहीं किया था। इसी वजह से क्लेम को 7 नवंबर 2016 को वापस कर दिया गया था।

(Photo: Aaj Tak)

EPFO के मुताबिक, जरूरी डॉक्यूमेंट्स का पूरा सेट उसे 2 दिसंबर 2016 को मिला। इसके बाद क्लेम को 20 दिन के भीतर 14 दिसंबर 2016 को सेटल कर दिया गया। इसलिए संगठन ने अपनी तरफ से किसी तरह की देरी होने की बात नहीं मानी।

अधूरे क्लेम का सबूत नहीं दे सका EPFO

मुंबई सबअर्बन डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन ने EPFO के इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। कमीशन ने कहा कि EPFO ऐसा कोई लिखित रिजेक्शन लेटर या ऐसा कम्युनिकेशन पेश नहीं कर पाया, जिससे यह साबित हो सके कि शुरुआती क्लेम अधूरा था।

कमीशन के मुताबिक रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों से EPFO यह संतोषजनक तरीके से साबित करने में नाकाम रहा कि क्लेम के डॉक्यूमेंट्स अधूरे थे।

35 दिन की देरी पर देना होगा ब्याज

कमीशन ने माना कि EPFO को तय 20 दिन की समय-सीमा के भीतर क्लेम को प्रोसेस और सेटल करना चाहिए था। ऐसा नहीं करना सर्विस में कमी है।

अब EPFO को 9 नवंबर 2016 से 13 दिसंबर 2016 तक हुई 35 दिन की देरी के लिए 14,06,272 रुपये की पूरी क्लेम राशि पर सालाना 6 फीसदी ब्याज देना होगा। कमीशन ने आदेश का पालन करने के लिए EPFO को 45 दिन की डेडलाइन दी है।

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