वो 6 कारण जिसकी वजह से गिरते बाजार में नहीं बंद करना चाहिए एसआईपी

जब शेयर बाजार में हर तरफ लाल निशान दिखता है तो निवेशकों के मन में सबसे पहला ख्याल आता है कि कहीं पैसा डूब न जाए। ऐसे समय में बहुत से लोग अपनी म्यूचुअल फंड एसआईपी यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) को बंद करने के बारे में सोचने लगते हैं।

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By Gaurav Kumar:

Mutual Fund SIP: जब शेयर बाजार में हर तरफ लाल निशान दिखता है तो निवेशकों के मन में सबसे पहला ख्याल आता है कि कहीं पैसा डूब न जाए। ऐसे समय में बहुत से लोग अपनी म्यूचुअल फंड एसआईपी यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) को बंद करने के बारे में सोचने लगते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि गिरते बाजार में एसआईपी बंद करना नहीं, बल्कि जारी रखना ज्यादा समझदारी भरा फैसला होता है। चलिए उन कारणों को जानते हैं जिसकी वजह से आपको गिरते बाजार में अपनी एसआईपी को बंद नहीं करना चाहिए।

1. गिरावट में सस्ते दाम पर निवेश का मौका

एसआईपी का सबसे बड़ा फायदा बाजार के उतार-चढ़ाव में दिखता है। जब बाजार गिरता है, तब आपके तय मंथली निवेश से ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। इसका मतलब यह हुआ कि आप बिना कोशिश किए ही सस्ते दाम पर निवेश कर रहे होते हैं। अगर इसी समय एसआईपी बंद कर दी जाए, तो यह मौका हाथ से निकल जाता है।

2. औसत लागत अपने आप कम हो जाती है

हर महीने एक तय रकम लगाने से कभी महंगी यूनिट्स खरीदी जाती हैं और कभी सस्ती। लंबे समय में इससे आपकी औसत खरीद कीमत कम हो जाती है। यही एसआईपी की असली ताकत है। गिरते बाजार में निवेश जारी रखने से भविष्य में बाजार संभलने पर रिटर्न बेहतर होने की संभावना बढ़ जाती है।

3. बाजार की गिरावट स्थायी नहीं होती

शेयर बाजार में गिरावट और तेजी दोनों आती-जाती रहती हैं। कोई भी गिरावट हमेशा के लिए नहीं रहती। जो निवेशक डरकर एसआईपी बीच में ही बंद कर देते हैं, वे अक्सर बाजार की रिकवरी का फायदा नहीं उठा पाते। धैर्य रखने वाले निवेशक ही लंबे समय में बेहतर नतीजे देखते हैं।

4. निवेश में अनुशासन बना रहता है

एसआईपी का मकसद ही निवेश में अनुशासन लाना है। हर महीने बिना बाजार की चिंता किए निवेश करना। अगर हर गिरावट पर एसआईपी बंद कर दी जाए, तो निवेश डर और भावनाओं के हिसाब से होने लगता है, जो आगे चलकर नुकसानदायक साबित हो सकता है।

5. कंपाउंडिंग का पूरा फायदा मिलता है

जितनी देर आपका पैसा बाजार में रहता है, उतना ही ज्यादा समय उसे बढ़ने का मिलता है। बीच में एसआईपी रोकने से कंपाउंडिंग की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। लंबे समय में यही छोटा सा फर्क बड़ा असर दिखाता है।

6. लंबे लक्ष्य छोटे उतार-चढ़ाव से बड़े होते हैं

अगर आपका निवेश लक्ष्य लंबी अवधि का है- जैसे बच्चों की पढ़ाई, घर या रिटायरमेंट तो बाजार की रोज की हलचल पर घबराने की जरूरत नहीं। गिरते बाजार में एसआईपी बंद करने के बजाय उसे जारी रखना ही लंबे समय में फायदेमंद साबित होता है।

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