बार-बार बदल रहा है म्यूचुअल फंड का TER? जानिए इसका क्या है मतलब और आपको क्या करना चाहिए

निवेशकों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर यह TER या Base TER है क्या? इसमें बदलाव क्यों हो रहा है? और इसका उनके रिटर्न पर कितना असर पड़ता है? चलिए आसान शब्दों में सम जानते हैं।

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By Gaurav Kumar:

Mutual Funds TER: अगर आप म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, चाहे LumpSum हो या SIP, तो आपको भी कभी न कभी अपने मैसेज या ईमेल में Base Total Expense Ratio (TER) या फिर TER में बदलाव होने के मैसेज जरूर आए होंगे। 

ऐसे में निवेशकों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर यह TER या Base TER है क्या? इसमें बदलाव क्यों हो रहा है? और इसका उनके रिटर्न पर कितना असर पड़ता है? चलिए आसान शब्दों में सम जानते हैं।

Base TER क्या होता है?

TER यानी Total Expense Ratio. यह वह फीस है, जो AMC (Asset Management Company) म्यूचुअल फंड को मैनेज करने के बदले निवेशकों से चार्ज करती है। इसमें मैनेजमेंट फीस, ऑपरेटिंग कॉस्ट, डिस्ट्रीब्यूशन कॉस्ट, ऑडिटिंग, कस्टोडियन फीस आदि शामिल होते हैं।

इसी TER का एक अहम हिस्सा होता है Base TER, जो बताता है कि फंड आपके निवेश पर बेसिक मैनेजमेंट और ऑपरेशनल खर्चों के नाम पर कितना प्रतिशत काट रहा है।

TER और Base TER एक है या अलग-अलग?

म्यूचुअल फंड में TER (Total Expense Ratio) और Base TER एक जैसा नहीं होता, बल्कि दोनों जुड़े हुए लेकिन अलग-अलग कॉन्सेप्ट हैं। TER वह कुल खर्च है जो फंड आपकी निवेश राशि से काटता है, जिसमें फंड मैनेजमेंट फीस, डिस्ट्रीब्यूशन खर्च, मार्केटिंग, एडमिनिस्ट्रेशन और अन्य सभी शुल्क शामिल होते हैं।

वहीं Base TER फंड का मूल या बेसिक खर्च होता है, जिसमें सिर्फ मैनेजमेंट और ऑपरेशन से जुड़े जरूरी खर्च शामिल होते हैं, जबकि डिस्ट्रीब्यूशन, B-30 इंसेंटिव, और टैक्स जैसे अतिरिक्त चार्ज इसमें शामिल नहीं होते।

इन अतिरिक्त चार्ज को Base TER पर जोड़ने के बाद जो अंतिम कुल खर्च बनता है, वही TER कहलाता है। इसलिए Base TER छोटा होता है और TER उससे बड़ा, और दोनों एक जैसे नहीं होते।

Base TER बार-बार क्यों बदलता है?

SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया) और इंडस्ट्री में चल रहे बदलावों के कारण कई AMC अपने खर्चों का रिवैल्यूएशन कर रहे हैं। इसके पीछे कुछ प्रमुख वजहें हैं:

1. AUM (Asset Under Management) में बदलाव

जैसे-जैसे फंड का आकार बढ़ता या घटता है, TER में बदलाव होता है। AUM बढ़ता है तो TER कम होने की संभावना रहती है, क्योंकि खर्च ज्यादा निवेशकों में बंट जाता है।

2. Distribution और Commission मॉडल में बदलाव

SEBI ने डिस्ट्रीब्यूशन कॉस्ट, कमिशन और डायरेक्ट vs रेगुलर प्लान पर कई गाइडलाइंस अपडेट की हैं, जिससे AMC अपने Base TER को एडजस्ट कर रही हैं।

3. नए निवेशकों का तेजी से जुड़ना

SIP और म्यूचुअल फंड निवेशक तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे फंड मैनेजमेंट पर कॉस्ट और प्रोसेस अपग्रेडेशन की जरूरत बढ़ी है।

4. मार्केट की वोलैटिलिटी

अक्सर वोलैटाइल मार्केट में फंड्स की खरीदी-बिक्री बढ़ने से ऑपरेशन कॉस्ट बदल जाता है, जो TER में दिखाई देता है।

इस बदलाव का निवेशकों पर क्या असर पड़ता है?

जब Base TER बढ़ता है, तो म्यूचुअल फंड आपके रिटर्न में से ज्यादा खर्च काटता है। और अगर TER घटता है, तो आपको बेहतर नेट रिटर्न मिलता है।

उदाहरण से समझें:

मान लीजिए आपने किसी फंड में ₹1,00,000 का निवेश किया है, और उसका रिटर्न 12% है।

अगर TER 1% है - आपको 11% (12% - 1%) नेट रिटर्न मिलेगा

अगर TER बढ़कर 1.5% हो जाए – आपका नेट रिटर्न घटकर 10.5% रह जाएगा

यह अंतर देखने में छोटा लग सकता है, लेकिन लंबे समय (10–15 साल) में यह आपके रिटर्न में लाखों का फर्क ला सकता है।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

  • TER के बदलाव पर नजर रखें, लेकिन सिर्फ TER के आधार पर फंड न बदलें।
  • फंड का प्रदर्शन, रिस्क-रिटर्न रिकॉर्ड, फंड मैनेजर और कंसिस्टेंसी अधिक महत्वपूर्ण है।
  • डायरेक्ट प्लान में TER कम होता है और लंबे समय में बेहतर रिटर्न संभावित होता है।
  • अगर किसी फंड में TER लगातार बढ़ रहा है, तो उसके कारण को समझें और ज़रूरत पड़े तो फाइनेंशियल एडवाइजर से राय लें।

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