मौजूदा वक्त में कौन सा म्यूचुअल फंड आपके लिए हो सकता है सही?
मार्च 2026 तक मनी मार्केट फंड्स (MMF) का AUM करीब ₹3.1 लाख करोड़ और लो-ड्यूरेशन फंड्स (LDF) का AUM ₹1.3 लाख करोड़ रहा। FY26 में MMFs में 34% और LDFs में 16% की ग्रोथ दर्ज की गई, जो निवेशकों के भरोसे को दिखाती है।

Mutual Fund News: मनी मार्केट और लो-ड्यूरेशन डेट फंड्स में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। एडलवाइस म्यूचुअल फंड (Edelweiss Mutual Fund) की फ्रेश रिपोर्ट के मुताबिक, हाई यील्ड, बेहतर लिक्विडिटी और मजबूत डिमांड इन फंड्स को सपोर्ट दे रहे हैं।
मार्च 2026 तक मनी मार्केट फंड्स (MMF) का AUM करीब ₹3.1 लाख करोड़ और लो-ड्यूरेशन फंड्स (LDF) का AUM ₹1.3 लाख करोड़ रहा। FY26 में MMFs में 34% और LDFs में 16% की ग्रोथ दर्ज की गई, जो निवेशकों के भरोसे को दिखाती है।
मार्च में आउटफ्लो, लेकिन ट्रेंड मजबूत
हालांकि मार्च में ₹29,207 करोड़ MMFs और ₹25,227 करोड़ LDFs से निकले। इसे एक्सपर्ट्स साल के अंत में होने वाले लिक्विडिटी एडजस्टमेंट से जोड़ते हैं, न कि किसी कमजोरी से।
क्यों आकर्षक हैं ये फंड्स?
ये फंड्स शॉर्ट-टर्म निवेशकों के लिए खास माने जा रहे हैं, क्योंकि इनमें ब्याज दर का जोखिम कम होता है और फिर भी बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना रहती है। यील्ड कर्व के छोटे हिस्से में निवेश करने से स्थिर आय का मौका मिलता है।
मार्च में बैंकिंग सिस्टम में करीब ₹2.9 ट्रिलियन की सरप्लस लिक्विडिटी रही, जिसमें आरबीआई की नीतियों और सरकारी खर्च का बड़ा योगदान रहा। हालांकि एडवांस टैक्स और GST भुगतान से थोड़ी सख्ती आई, लेकिन आगे हालात आरामदायक रहने की उम्मीद है।
यील्ड में हलचल, आगे सुधार की उम्मीद
मार्च में शॉर्ट-टर्म यील्ड्स बढ़ीं, खासकर CD (Certificate of Deposit) यील्ड्स में तेजी आई। मनी मार्केट कर्व फिलहाल इनवर्टेड है, लेकिन Edelweiss का मानना है कि जल्द ही यह सामान्य होगा और यील्ड कर्व में सुधार दिखेगा।
फंड हाउस ने अपने मनी मार्केट फंड की ड्यूरेशन बढ़ाई है ताकि ज्यादा यील्ड का फायदा उठाया जा सके। वहीं लो-ड्यूरेशन फंड में CP (Commercial Paper) की जगह CDs में निवेश बढ़ाया गया है, जिससे बेहतर रिटर्न की उम्मीद है।
निवेशकों के लिए क्या मतलब?
बढ़ती यील्ड और मजबूत लिक्विडिटी के माहौल में ये फंड्स शॉर्ट-टर्म स्थिर रिटर्न के लिए अच्छे विकल्प बनकर उभरे हैं। हालांकि जियोपॉलिटिकल तनाव, तेल की कीमतें और रुपये की कमजोरी जैसे फैक्टर बॉन्ड यील्ड्स को प्रभावित कर रहे हैं, लेकिन आरबीआई के लिक्विडिटी सपोर्ट से बाजार में स्थिरता बनी हुई है।