Mutual Fund में निवेश करते हैं तो जान लें SEBI के नए नियम, आपके Portfolio पर क्या डालेंगे असर

SEBI के नए म्यूचुअल फंड नियम निवेशकों के लिए स्कीमों को समझना और उनकी तुलना करना आसान बना सकते हैं। खर्च से लेकर पोर्टफोलियो ओवरलैप और जोखिम तक कई अहम पहलुओं पर पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर है। जानें नए नियमों से आपके म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो पर क्या असर पड़ सकता है।

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In Short

  • SEBI के नए म्यूचुअल फंड नियमों में खर्च और जोखिम से जुड़ी जानकारी को ज्यादा पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है।
  • BER और TER के जरिए निवेशकों को स्कीम पर होने वाले खर्च को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी।
  • निवेशकों को स्कीम की कैटेगरी पोर्टफोलियो ओवरलैप रिस्क-ओ-मीटर और एसेट एलोकेशन पर नजर रखने की सलाह है।

By Gaurav Kumar:

SEBI Mutual Fund Rules 2026: म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के लिए SEBI के 2026 के नए नियम कई अहम बदलाव लेकर आए हैं। इनका फोकस म्यूचुअल फंड में ज्यादा पारदर्शिता लाने, स्कीमों की कैटेगरी साफ करने, खर्च की बेहतर जानकारी देने और निवेशकों के हितों की सुरक्षा पर है।

हालांकि नए नियम म्यूचुअल फंड से जुड़े बाजार के जोखिम को खत्म नहीं करते हैं। निवेशकों को अभी भी किसी स्कीम में पैसा लगाने से पहले उसके खर्च, जोखिम और एसेट एलोकेशन को समझना जरूरी है।

BER और TER से समझ आएगा कितना खर्च

नए नियमों में खर्च की जानकारी को ज्यादा स्पष्ट करने पर जोर दिया गया है। इसमें बेस एक्सपेंस रेशियो यानी BER और टोटल एक्सपेंस रेशियो यानी TER अहम हैं।

BER किसी स्कीम का मुख्य खर्च है। वहीं TER में BER के साथ ब्रोकरेज, ट्रांजैक्शन कॉस्ट और नियमों के तहत मंजूर दूसरे खर्च भी शामिल हो सकते हैं।

इससे निवेशकों को समझने में आसानी होगी कि उनके निवेश पर कुल कितना खर्च हो रहा है। हालांकि सिर्फ कम TER देखकर स्कीम चुनना सही नहीं है। जोखिम, रणनीति और निवेश की अवधि भी मायने रखती है।

स्कीमों की कैटेगरी होगी ज्यादा स्पष्ट

SEBI के नियम म्यूचुअल फंड स्कीमों को इक्विटी, डेट, हाइब्रिड, लाइफ साइकिल और दूसरी कैटेगरी में बांटते हैं।

लार्ज कैप, मिड कैप, स्मॉल कैप, फ्लेक्सी कैप, थीमैटिक और इंडेक्स फंड जैसी स्कीमों के लिए तय निवेश नियम हैं। इससे एक जैसी दिखने वाली अलग-अलग स्कीमों के बीच तुलना करना निवेशकों के लिए आसान हो सकता है।

Portfolio Overlap पर भी नजर

SEBI ने खास कैटेगरी में स्कीमों के पोर्टफोलियो को एक-दूसरे से अलग रखने के लिए ओवरलैप से जुड़े नियम भी तय किए हैं।

सेक्टोरल और थीमैटिक इक्विटी स्कीमों के लिए दूसरी इक्विटी स्कीमों के साथ पोर्टफोलियो ओवरलैप की सीमा तय की गई है। हालांकि इसमें लार्ज कैप स्कीमों को अलग रखा गया है।

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इसका मकसद ऐसी स्थिति को कम करना है जिसमें निवेशक अलग-अलग फंड खरीदता है लेकिन उनमें ज्यादातर शेयर एक जैसे होते हैं।

निवेशकों को किन बातों पर रखनी चाहिए नजर

निवेशकों को अपनी मौजूदा स्कीम का TER, BER, बेंचमार्क, रिस्क-ओ-मीटर और दूसरी स्कीमों के साथ ओवरलैप देखना चाहिए।

डेट फंड निवेशकों के लिए क्रेडिट क्वालिटी, लिक्विडिटी और मैकाले ड्यूरेशन अहम हैं। वहीं इक्विटी निवेशकों को स्कीम की कैटेगरी, रणनीति और उतार-चढ़ाव पर ध्यान देना चाहिए।

नए नियमों के कारण तुरंत पोर्टफोलियो बदलना जरूरी नहीं है। निवेशकों को अपने लक्ष्य, एसेट एलोकेशन, निवेश की अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता के हिसाब से फैसला लेना चाहिए।

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