SIP निवेश का ट्रेंड बदला! रेगुलर म्यूचुअल फंड में लंबे समय तक टिके ज्यादा निवेशक

म्यूचुअल फंड में लंबे समय तक निवेश बनाए रखने के मामले में रेगुलर प्लान आगे दिखाई दे रहे हैं। SEBI के आंकड़ों से पता चला है कि रेगुलर SIP निवेशकों का बड़ा हिस्सा 5 साल से ज्यादा समय तक जुड़ा रहता है। जानिए रेगुलर और डायरेक्ट प्लान में क्या अंतर सामने आया।

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In Short

  • रेगुलर प्लान में 5 साल से ज्यादा पुराने SIP एसेट्स का हिस्सा 34% है जबकि डायरेक्ट प्लान में 20% है।
  • SEBI के मुताबिक डिस्ट्रीब्यूटर निवेशकों को लंबे समय तक निवेश बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
  • भारत में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का AUM करीब 85 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।

By Gaurav Kumar:

Regular Mutual funds vs Direct Mutual Funds: म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले लोगों के बीच रेगुलर और डायरेक्ट प्लान को लेकर अक्सर सवाल रहते हैं कि कौन सा विकल्प बेहतर है। अब SEBI के पूरे समय के सदस्य अमरजीत सिंह द्वारा साझा किए गए आंकड़ों से पता चला है कि लंबे समय तक निवेश बनाए रखने के मामले में रेगुलर प्लान आगे दिखाई दे रहे हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, रेगुलर प्लान में 5 साल से ज्यादा समय से रखे गए SIP एसेट्स का हिस्सा 34% है, जबकि डायरेक्ट प्लान में यह आंकड़ा 20% है।

रेगुलर प्लान में लंबी अवधि का रुझान ज्यादा

अमरजीत सिंह ने 13 अगस्त को NJ Partners Business Training 2026 कार्यक्रम में म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूशन के भविष्य और डिस्ट्रीब्यूटर्स की भूमिका पर बात करते हुए ये आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि SIP एसेट्स अब म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के कुल एसेट्स का 21% से ज्यादा हिस्सा बन चुके हैं।

उनके अनुसार, रेगुलर प्लान में निवेशकों का लंबी अवधि तक निवेश बनाए रखने का रुझान ज्यादा दिख रहा है। वहीं डायरेक्ट प्लान में निवेशक बिना किसी डिस्ट्रीब्यूटर के सीधे निवेश करते हैं।

निवेशकों को लंबे समय तक जुड़े रहने में मदद करते हैं डिस्ट्रीब्यूटर

SEBI सदस्य अमरजीत सिंह ने डिस्ट्रीब्यूटर्स को निवेशकों के लिए "व्यवहारिक सहारा" बताया। उन्होंने कहा कि बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान निवेशक कई बार SIP बंद करने, निवेश निकालने या हाल में अच्छा प्रदर्शन करने वाले फंड और एसेट क्लास की ओर जाने का फैसला कर सकते हैं।

ऐसे समय में डिस्ट्रीब्यूटर निवेशकों को सही नजरिया देने में मदद कर सकते हैं और उन्हें छोटे समय के बाजार बदलावों के आधार पर बड़े फैसले लेने से रोक सकते हैं।

क्या रेगुलर प्लान बेहतर विकल्प है?

हालांकि, आंकड़े यह दिखाते हैं कि रेगुलर प्लान में निवेश ज्यादा समय तक बना रहा है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि डिस्ट्रीब्यूटर की वजह से ही निवेश लंबा चलता है। यह सिर्फ निवेशकों के व्यवहार में अंतर को दिखाता है।

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रेगुलर और डायरेक्ट प्लान में सबसे बड़ा अंतर लागत का होता है। रेगुलर प्लान में डिस्ट्रीब्यूटर शामिल होते हैं, जबकि डायरेक्ट प्लान में निवेशक सीधे फंड हाउस या डायरेक्ट विकल्प देने वाले प्लेटफॉर्म के जरिए निवेश करते हैं।

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का आकार लगातार बढ़ रहा है। इंडस्ट्री का एसेट अंडर मैनेजमेंट करीब 85 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। वहीं म्यूचुअल फंड फोलियो की संख्या 27 करोड़ से ज्यादा हो गई है और यूनिक निवेशकों की संख्या 6 करोड़ से ऊपर पहुंच चुकी है।

रिटेल और HNI निवेशकों के म्यूचुअल फंड एसेट्स में करीब 71% हिस्सा अभी भी डिस्ट्रीब्यूटर्स के जरिए आता है। ऐसे में रेगुलर और डायरेक्ट प्लान में निवेशकों के व्यवहार का यह अंतर लंबे समय के निवेश पैटर्न को समझने में मदद करता है।

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