म्यूचुअल फंड में छिपे हैं ये 7 खर्च, लंबे समय में 25% तक घटा सकते हैं आपका प्रॉफिट

म्यूचुअल फंड का रिटर्न देखकर खुश होना आसान है, लेकिन उसके पीछे कटने वाले खर्च आपकी कमाई को धीरे-धीरे कम कर सकते हैं। Expense Ratio से लेकर कमीशन और टैक्स तक, ये चार्ज लंबे समय में बड़ा असर डालते हैं। जानिए कौन से सात खर्च आपका प्रॉफिट घटा सकते हैं।

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In Short

  • म्यूचुअल फंड में Expense Ratio, एग्जिट लोड और कमीशन जैसे कई हिडेन चार्ज लगते हैं।
  • रेगुलर प्लान का खर्च डायरेक्ट प्लान से 0.5% से 1% तक ज्यादा हो सकता है।
  • 20 साल में सिर्फ 1% अतिरिक्त खर्च आपकी कुल वेल्थ को 25% से 30% तक घटा सकता है।

By Gaurav Kumar:

Mutual Fund Hidden Charges: म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों की संख्या पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है। कोई हर महीने SIP के जरिए पैसा लगाता है तो कोई एकमुश्त निवेश करता है। निवेशकों को आमतौर पर फंड के रिटर्न पर तो ध्यान रहता है, लेकिन उससे जुड़े अलग-अलग खर्चों की जानकारी कम होती है।

ये खर्च सीधे आपके खाते से कटते हुए नहीं दिखते, बल्कि फंड के रिटर्न और NAV में एडजस्ट हो जाते हैं। धीरे-धीरे इनका असर बड़ा हो सकता है और लंबे समय में निवेशकों का प्रॉफिट कम हो सकता है। आइए जानते हैं ऐसे ही सात खर्चों के बारे में।

1) Expense Ratio से हर साल कम होता है रिटर्न

Expense Ratio को म्यूचुअल फंड का सबसे बड़ा हिडेन चार्ज माना जाता है। फंड हाउस निवेशकों से फंड मैनेज करने के बदले यह फीस लेते हैं। इसमें फंड मैनेजर की फीस, मार्केटिंग और एडमिनिस्ट्रेटिव खर्च शामिल होते हैं।

यह रकम सीधे नहीं काटी जाती, बल्कि NAV में एडजस्ट हो जाती है। मान लीजिए फंड का रिटर्न 12% है और Expense Ratio 2% है, तो निवेशक को करीब 10% रिटर्न मिलेगा।

2) समय से पहले पैसा निकालने पर एग्जिट लोड

कई निवेशक तय अवधि पूरी होने से पहले ही म्यूचुअल फंड से पैसा निकाल लेते हैं। ऐसी स्थिति में एग्जिट लोड देना पड़ सकता है।

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यह आमतौर पर निवेश की रकम का 1% होता है और छह महीने या एक साल से पहले पैसा निकालने पर लगाया जा सकता है।

3) बार-बार खरीद-बिक्री का भी पड़ता है असर

फंड मैनेजर जब पोर्टफोलियो में बार-बार शेयर खरीदता और बेचता है, तो Brokerage, STT और टैक्स जैसे खर्च लगते हैं। इसे पोर्टफोलियो टर्नओवर कॉस्ट कहा जाता है। इसका असर भी फंड के रिटर्न पर पड़ता है।

4) कैश ड्रैग से छूट सकता है बाजार का फायदा

फंड हाउस निवेश का कुछ हिस्सा कैश में रखते हैं। बाजार में तेजी आने पर इस रकम पर रिटर्न नहीं मिलता। इससे फंड बाजार की पूरी तेजी का फायदा नहीं उठा पाता, जिसे कैश ड्रैग कहा जाता है।

5) इंडेक्स से पीछे रह सकता है फंड

इंडेक्स फंड और ETF हमेशा अपने इंडेक्स की चाल को पूरी तरह फॉलो नहीं कर पाते। Expense और दूसरी कमियों के कारण फंड का रिटर्न इंडेक्स से कम रह सकता है। इस अंतर को ट्रैकिंग एरर कहा जाता है।

6) रेगुलर प्लान में लगता है एक्स्ट्रा कमीशन

रेगुलर प्लान में डिस्ट्रीब्यूटर का कमीशन शामिल होता है। इसका खर्च डायरेक्ट प्लान के मुकाबले करीब 0.5% से 1% ज्यादा हो सकता है। लंबे समय में यह छोटा अंतर निवेश की कुल रकम पर बड़ा असर डाल सकता है।

7) टैक्स भी कम कर सकता है कमाई

म्यूचुअल फंड बेचने पर निवेश की अवधि के मुताबिक LTCG या STCG टैक्स लग सकता है। इसके अलावा डिविडेंड पर भी टैक्स देना पड़ता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, 20 साल तक केवल 1% अतिरिक्त खर्च भी कुल वेल्थ को 25% से 30% तक कम कर सकता है।

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