गिरावट से डरकर SIP बंद कर रहे निवेशक! एक्सपर्ट बोले- यही है सबसे बड़ा जोखिम
बाजार में आई इस कमजोरी के बाद कई निवेशकों ने अपने सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) को बंद करने शुरू कर दिया है। हालांकि निवेश विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार की गिरावट से ज्यादा चिंता निवेशकों की प्रतिक्रिया को लेकर है।

भारतीय शेयर बाजार में सितंबर के उच्च स्तर से करीब 16 फीसदी की गिरावट ने कई रिटेल निवेशकों को डरा दिया है। बाजार में आई इस कमजोरी के बाद कई निवेशकों ने अपने सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) को बंद करने शुरू कर दिया है। हालांकि निवेश विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार की गिरावट से ज्यादा चिंता निवेशकों की प्रतिक्रिया को लेकर है।
वैल्यू रिसर्च के सीईओ धीरेंद्र कुमार के मुताबिक हालिया गिरावट को उस मजबूत तेजी के संदर्भ में देखना चाहिए जो इससे पहले आई थी। पिछले चार साल में निफ्टी करीब 80 फीसदी चढ़ा था, ऐसे में 16 फीसदी का करेक्शन बाजार के सामान्य चक्र का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि निवेशक जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया दे रहे हैं और यही ओवररिएक्शन असली जोखिम है। इतनी बड़ी तेजी के बाद 15 फीसदी का करेक्शन सामान्य गणित है।
SIP में निवेश जारी, लेकिन बढ़ा कैंसिलेशन
हालांकि बाजार में गिरावट के बावजूद SIP के जरिए हर महीने 30,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश आ रहा है, जो निवेशकों की भागीदारी को दिखाता है लेकिन धीरेंद्र कुमार के अनुसार कुछ महीनों में SIP कैंसिलेशन नए रजिस्ट्रेशन से ज्यादा रहे हैं। खासतौर पर नए निवेशकों में यह प्रवृत्ति ज्यादा दिख रही है, जिन्होंने पहले कभी बाजार में बड़ा करेक्शन नहीं देखा।
गलत समय पर खरीद-बिक्री से घटता रिटर्न
धीरेंद्र कुमार का कहना है कि निवेशकों के इस व्यवहार की वजह से अक्सर उन्हें म्यूचुअल फंड से मिलने वाले रिटर्न से कम कमाई होती है। कई शोध बताते हैं कि फंड के रिटर्न और निवेशकों के वास्तविक रिटर्न के बीच 4-5 प्रतिशत का अंतर होता है।
इसकी वजह यह है कि निवेशक आमतौर पर बाजार की तेजी के बाद निवेश करते हैं और गिरावट आने पर बाहर निकल जाते हैं। उन्होंने कहा कि बाजार ने निवेशकों को 15 फीसदी का डिस्काउंट दिया, लेकिन प्रतिक्रिया यह रही कि लोगों ने अपने निवेश प्लान ही बंद कर दिए।
लंबी अवधि में निवेश ही बेहतर रणनीति
धीरेंद्र कुमार के मुताबिक इक्विटी निवेश में उतार-चढ़ाव सामान्य बात है। खासतौर पर मैन्युफैक्चरिंग और कमोडिटी कंपनियों में मुनाफा कई साल के निवेश साइकल के बाद दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि लंबी अवधि के निवेशकों को बाजार के छोटे उतार-चढ़ाव की चिंता करने के बजाय अपने लक्ष्यों पर ध्यान देना चाहिए। लॉन्ग टर्म निवेश का मतलब पांच साल या उससे ज्यादा होता है। SIP के दौरान बाजार गिरता है तो नई खरीद कम कीमत पर होती है।
थीमैटिक फंड्स को लेकर भी दी चेतावनी
धीरेंद्र कुमार ने थीमैटिक और सेक्टर आधारित फंड्स को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी। उनके मुताबिक ऐसे कई फंड्स निवेश उत्पाद से ज्यादा मार्केटिंग उत्पाद होते हैं, जो किसी लोकप्रिय कहानी या ट्रेंड पर आधारित होते हैं।