बच्चे के भविष्य के लिए कब शुरू करें निवेश? जल्दी प्लानिंग से ऐसे बनेगा बड़ा फंड

बच्चे के भविष्य की पढ़ाई और दूसरे बड़े खर्चों के लिए समय रहते निवेश शुरू करना जरूरी है। महंगाई के कारण आने वाले वर्षों में शिक्षा का खर्च बढ़ सकता है। ऐसे में जल्दी निवेश करने से कंपाउंडिंग का फायदा मिल सकता है और धीरे धीरे बच्चे के बड़े वित्तीय लक्ष्यों के लिए जरूरी फंड तैयार किया जा सकता है।

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In Short

  • बच्चे के भविष्य के लिए जल्दी निवेश शुरू करने से कंपाउंडिंग का फायदा मिल सकता है।
  • महंगाई को ध्यान में रखकर बच्चे की पढ़ाई और दूसरे बड़े खर्चों के लिए पहले से लक्ष्य तय करना जरूरी है।

By Gaurav Kumar:

हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे को अच्छी पढ़ाई और बेहतर अवसर मिलें। लेकिन समय के साथ शिक्षा और दूसरी जरूरी चीजों की लागत बढ़ती जा रही है। ऐसे में बच्चे के भविष्य के लिए पहले से वित्तीय योजना बनाना जरूरी हो जाता है। जल्दी निवेश शुरू करने से लंबे समय में बड़ा फंड तैयार करने में मदद मिल सकती है।

महंगाई को ध्यान में रखकर बनाएं योजना

आज जिस प्रोफेशनल कॉलेज की पढ़ाई पर 15 से 20 लाख रुपये खर्च हो सकते हैं, आने वाले 10 से 15 साल में उसकी लागत काफी बढ़ सकती है। ऐसे में आखिरी समय पर बड़ी रकम जुटाना बचत पर दबाव डाल सकता है या कर्ज लेना पड़ सकता है।

दिए गए उदाहरण के मुताबिक अगर महंगाई की औसत दर 6 फीसदी रहे तो आज के 1 लाख रुपये की वास्तविक कीमत 30 साल बाद करीब 17,411 रुपये के बराबर रह सकती है। इसलिए बच्चे के भविष्य के लक्ष्य तय करते समय महंगाई को ध्यान में रखना जरूरी है।

जल्दी निवेश शुरू करने का फायदा

बच्चे के लिए निवेश जितनी जल्दी शुरू किया जाए उतना समय निवेश को बढ़ने का मिलता है। लगातार निवेश करने से कंपाउंडिंग का फायदा मिल सकता है और धीरे धीरे बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है।

निवेश शुरू करने से पहले यह तय करना जरूरी है कि पैसा किस लक्ष्य के लिए चाहिए। इसके बाद बच्चे की उम्र और लक्ष्य पूरा होने में बचे समय के हिसाब से निवेश का तरीका चुना जा सकता है।

बच्चों के लिए म्यूचुअल फंड का ऑप्शन

बच्चों की वित्तीय जरूरतों के लिए बनाए गए म्यूचुअल फंड सॉल्यूशन ओरिएंटेड स्कीम की श्रेणी में आते हैं। इनका उद्देश्य शिक्षा और दूसरे बड़े जीवन लक्ष्यों के लिए लंबे समय में फंड तैयार करने में मदद करना है।

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ऐसी योजनाओं में कम से कम 5 साल या बच्चे के 18 साल की उम्र तक का लॉक इन हो सकता है। इससे लंबे समय तक निवेश बनाए रखने में मदद मिलती है।

SBI Children’s Fund में दो प्लान

SBI Children’s Fund के तहत Investment Plan और Savings Plan का विकल्प मिलता है। Investment Plan में इक्विटी की हिस्सेदारी 65 से 100 फीसदी तक हो सकती है, जबकि Savings Plan में 75 से 100 फीसदी तक निवेश डेट इंस्ट्रूमेंट्स में किया जाता है।

फंड में SIP की शुरुआत 500 रुपये से और एकमुश्त निवेश 5,000 रुपये से किया जा सकता है। दोनों प्लान की निवेश रणनीति अलग है, इसलिए इनमें रिटर्न और जोखिम का स्तर भी अलग हो सकता है।

SIP या एकमुश्त निवेश क्या बेहतर?

SIP में तय रकम नियमित रूप से निवेश की जाती है, जबकि एकमुश्त निवेश में उपलब्ध अतिरिक्त रकम को एक साथ लगाया जा सकता है। निवेशक अपनी आर्थिक स्थिति और पसंद के हिसाब से तरीका चुन सकते हैं।

नियमित निवेश से रुपये की औसत लागत का फायदा मिल सकता है। बाजार नीचे होने पर तय रकम से ज्यादा यूनिट और बाजार ऊपर होने पर मौजूदा निवेश की कीमत बढ़ सकती है।

निवेश में इन गलतियों से बचें

बच्चे के भविष्य के लिए निवेश करते समय देर से शुरुआत करना, महंगाई को नजरअंदाज करना, बीच में बार बार पैसा निकालना और लक्ष्य के हिसाब से गलत निवेश चुनना नुकसान पहुंचा सकता है। इसके अलावा पोर्टफोलियो की समीक्षा नहीं करना और बच्चे के लिए रखे पैसे को दूसरे खर्चों में इस्तेमाल करना भी लक्ष्य को प्रभावित कर सकता है।

इसलिए दिए गए कंटेंट के मुताबिक बच्चे के भविष्य के लिए जल्दी शुरुआत करना, नियमित निवेश करना और तय लक्ष्य के हिसाब से योजना बनाना जरूरी है।

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