दिल्ली की जहरीली हवा: क्या राजधानी बदलने का वक्त आ गया है?
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण ने स्वास्थ्य संकट खड़ा कर दिया है। केरल के सांसद शशि थरूर ने दिल्ली की राजधानी बने रहने पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह शहर अब रहने लायक नहीं है। लेकिन सवाल यह है कि अगर राजधानी दिल्ली से हटेगी, तो कहां जाएगी?

दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण ने स्वास्थ्य संकट खड़ा कर दिया है। केरल के सांसद शशि थरूर ने दिल्ली की राजधानी बने रहने पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह शहर अब रहने लायक नहीं है। लेकिन सवाल यह है कि अगर राजधानी दिल्ली से हटेगी, तो कहां जाएगी?
दिल्ली में प्रदूषण का गंभीर हाल
वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बुधवार को 422 पर पहुंच गया, जो 'गंभीर' श्रेणी में है। धुंध के कारण सड़कों पर ट्रैफिक सुस्त है, विजिबिलिटी शून्य हो रही है, और स्कूल-कॉलेज बंद करने के साथ दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम लागू किया गया है। निर्माण कार्यों पर रोक और ट्रकों के प्रवेश पर प्रतिबंध जैसे उपाय किए गए हैं।
हालांकि, दिल्ली अकेली नहीं है। उत्तर भारत के अधिकतर शहर प्रदूषण की चपेट में हैं, जहां स्वच्छ हवा की स्थिति खराब हो चुकी है। राजस्थान के खैरथल-तिजारा में पहली बार प्रदूषण के कारण स्कूलों की छुट्टी की गई है।
क्या कहती हैं रिपोर्ट्स?
एक रिपोर्ट के अनुसार, देश के केवल 27% बड़े शहरों में ही हवा संतोषजनक है। दक्षिण भारत के कुछ शहर, जैसे रामनाथपुरम और आइजोल, स्वच्छ हवा के मामले में बेहतर स्थिति में हैं। वहीं, उत्तर भारत के किसी भी शहर में स्वच्छ हवा दर्ज नहीं की गई है।
शशि थरूर का सुझाव
शशि थरूर ने दिल्ली से राजधानी चेन्नई या हैदराबाद जैसे साफ हवा वाले शहरों में स्थानांतरित करने का सुझाव दिया है। इंडोनेशिया ने भी इसी तरह जकार्ता से राजधानी बदलने का कदम उठाया था।
स्वास्थ्य पर पड़ रहा है प्रभाव
प्रदूषित हवा श्वसन तंत्र, फेफड़ों और हृदय पर गंभीर असर डालती है। बच्चों, बुजुर्गों और हृदय रोगियों के लिए यह और भी खतरनाक है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अशुद्ध हवा में सांस लेना धूम्रपान जितना ही खतरनाक है।
आगे की राह
सरकार को ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के तहत सख्त कदम उठाने होंगे। इसके साथ ही, स्वच्छ ऊर्जा, परिवहन में सुधार, और वनीकरण जैसे उपायों पर काम करने की जरूरत है।
दिल्ली की जहरीली हवा एक बड़ी चेतावनी है। यह न केवल दिल्ली बल्कि पूरे देश के लिए सतर्कता का समय है, क्योंकि स्वच्छ हवा किसी भी नागरिक का बुनियादी अधिकार है।