किस तरह के खाने ने किया भारतीय लोगों का नुकसान, जानिए क्या खाएं क्या नहीं?

आने वाले समय में भारत में दुर्लभ चीनी कही जाने वाली एलूलोज़ नाम का नया विकल्प लॉन्च किया जाएगा। इसके पक्ष में कई मजबूत क्लिनिकल अध्ययन हैं। लेकिन अभी इसका बाजार में आसानी से उपलब्ध होने में समय लगेगा।

Advertisement
लो कार्ब एक्सपर्ट शशिकांत आएंगर
लो कार्ब एक्सपर्ट शशिकांत आएंगर

By BT बाज़ार डेस्क:

भारत में इन दिनों मेटाब़ॉलिक डिसऑर्डर जैसे शुगर, हाइपरटेंशन जैसी चीजें लगातार बढ़ती जा रही है। आप अपने वेल्थ का ध्यान रखते हैं लेकिन क्या आप अपनी हेल्थ का ध्यान रख पाते हैं। बिजनेस टुडे बाजार ने लो कार्ब एक्सपर्ट शशिकांत आएंगर से बात की जो मेटाबॉलिक डिसऑर्डर पर नई जानकारी लोगों के सामने लाते रहते हैं।

सवाल-भारत को दुनिया की मधुमेह राजधानी माना जाता है, इस पर आपका क्या विचार है, क्या मधुमेह टाइप 1 और 2 को भोजन के माध्यम से ठीक किया जा सकता है।

जवाब- टाइप 1 में इंसुलिन की आवश्यकता होती है और इसे रिवर्स नहीं किया जा सकता। लेकिन यहां भी उच्च प्रोटीन के साथ कम कार्ब भोजन से कम इंसुलिन लेकर मैनेज किया जा सकता है जैसा स्टडीज में पाया गया है। टाइप 2 मधुमेह में कार्बोहाइड्रेट के कारण इन्सुलिन रेसिस्टेंस होता है। कम कार्ब भोजन के साथ टाइप 2 मधुमेह को छूट (उर्फ रिवर्सल) के तहत लाया जा सकता है।
लेकिन जब तक कोई कम कार्ब भोजन ( मतलब लो कॉबोहाड्रेट डाइट) का पालन करता है, तब तक स्तर नियंत्रण में रहेगा।
कम कार्ब आहार दवाओं और इंसुलिन की खुराक को कम करने में भी मदद कर सकता है। टाइप 2 मधुमेह के कुछ मामलों में इंसुलिन को भी रोका जा सकता है और कम कार्ब और कुछ मधुमेह रोधी गोलियों से रक्त शर्करा को नियंत्रित किया जा सकता है।

Also Read: Zomato का 'Pure-Veg-Mode' लॉन्च, सिर्फ वेज रेस्टोरेंट्स के ऑप्शंस शामिल

सवाल-  पिछले 30 वर्षों में भारतीयों ने अपने भोजन चयन में कौन सी सबसे बड़ी गलतियाँ की हैं?
जवाब- अल्ट्रा प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का बहुत अधिक सेवन। लगातार भोजन करना और आसान जीवन शैली। सोने का समय का कम होना। घर में बने स्वास्थ्यवर्धक भोजन से हटकर रेस्तरां में खाना खाना या फ़ूड ऐप्स से ऑर्डर करना। पारंपरिक खाना पकाने वाले वसा और तेलों से दूर परिष्कृत उच्च ओमेगा 6 बीज तेलों का ज्यादा यूज करना। देसी  घी जैसे स्वस्थ वसा से परहेज करना, ये प्रमुख चीजें हैं जिनकी वजह से गलतियां हुईं हैं।

सवाल- कीटो डाइट और लो कार्ब डाइट में क्या अंतर है?
उत्तर-कीटो आहार प्रति दिन कार्बोहाइड्रेट को 30 ग्राम या उससे कम तक सीमित रखता है। अनाज, फल, स्टार्चयुक्त जड़ वाली सब्जियाँ और शर्करा की अनुमति नहीं है। कीटो आहार का उपयोग मिर्गी और हाल ही में अल्जाइमर, पार्किंसंस, एएलएस, हंटिंगटन रोग जैसे कई न्यूरोलॉजिकल विकारों के लिए एक चिकित्सीय उपकरण के रूप में किया जाता है। इसका उपयोग द्विध्रुवी, सिज़ोफ्रेनिया जैसे मानसिक स्वास्थ्य विकारों में भी किया जाता है जो अब कई अध्ययनों के साथ उभर रहे हैं। 'इसका उपयोग गंभीर अनियंत्रित मधुमेह में भी किया जाता है। लगभग 100 ग्राम कार्बोहाइड्रेट के साथ कम कार्ब वाला आहार अधिक लचीला होता है। इसका उपयोग वजन घटाने, मधुमेह, PCOS और कई Metabolic Disorder के लिए किया जाता है। इसमें छोटी मात्रा में अनाज शामिल किया जा सकता है लेकिन प्राथमिक ध्यान प्रोटीन, वसा, सब्जियां, नट और बीज पर है।

सवाल- उपवास ( फास्टिंग) को  मेटाबोलिज्म को को नियंत्रित करने का एक नया हथियार माना जाता है, क्या आपको लगता है कि यह प्रभावी है?
जवाब- उपवास हम सालों से करते आएं हैं। दुनिया भर में सभी संस्कृतियों और धर्मों द्वारा इसका पालन किया जाता है। फास्टिंग सभी मेटाबॉलिक संबंधी विकारों ( डिस्ऑर्जर) के प्रबंधन के लिए एक अच्छा हथियार है। अध्ययनों से पता चला है कि उपवास के फायदे मधुमेह (दवा लेने पर सावधानी), मोटापा, फैटी लीवर रोग, सूजन कम करने में होता है। हालाँकि यह एक पुराना तरीका है लेकिन अब इसे मान्यता मिल गई है क्योंकि इसके लाभों को दर्शाने वाले कई अध्ययन किए गए हैं।

सवाल- चीनी का विकल्प क्या है? अधिकांश भारतीयों को चीनी छोड़ना मुश्किल लगता है?
जवाब- स्टीविया, मॉन्क फ्रूट एक्सट्रेक्ट जैसे कई सुरक्षित विकल्प उपलब्ध हैं। इनका उपयोग करना सुरक्षित है और कई अध्ययन इसकी पुष्टि करते हैं। आने वाले समय में भारत में दुर्लभ चीनी कही जाने वाली एलूलोज़ नाम का नया विकल्प लॉन्च किया जाएगा। इसके पक्ष में कई मजबूत क्लिनिकल अध्ययन हैं। लेकिन अभी इसका बाजार में आसानी से उपलब्ध होने में समय लगेगा।

Read more!
Advertisement