रूस-सऊदी ने मिलकर भारत के साथ किया खेल!
सऊदी अरब और रूस की जुगलबंदी ने दुनिया के दूसरे देशों को महंगा क्रूड खरीदने पर मजबूर कर दिया है। भारत लगातार रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीद रहा था, लेकिन अब वो दिन लद गए हैं। रूस और सऊदी अरब के साथ में लिए इस फ़ैसले को बड़े एक्पोटर्स के बीच एकता दिखाने के तौर पर देखा जा रहा है।

वो अब पुरानी दौर की बात हो गई है। जब रूस और साऊदी अरब के बीच की तनातनी पूरी दुनिया ने देखी थी। लेकिन अब इन दोनों देशों की जुगलबंदी ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। रूस और सऊदी अरब ने मिलकर जो फैसला लिया है उससे न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका भी टेंशन में आ गया है। रूस-सऊदी अरब की दोस्ती का एलान इस साल के बचे 3 महीनों के लिए लिया गया है। लेकिन इसका असर अभी से दिखना शुरू हो गया है। दोनों देशों के इस साझा एलान से दुनियाभर में तेल की कीमतों में उबाल आा शुरू हो चुका है। आइये जानते हैं मामला है क्या?
Also Read: Britain का ये शहर हो गया है दिवालिया !
दोनों देशों ने इस साल के आखिरी तक कच्चे तेल का उत्पादन 13 लाख बैरल कम करने पर सहमति जताई है। सऊदी और रूस के इस एलान के साथ ही वैश्विक तेल बाजार में जबरदस्त उबाल आ गया है। तेल उत्पादन में कटौती का असर ये हुआ कि कच्चे तेल का बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। पिछले साल नवंबर के बाद से ब्रेंट क्रूड की कीमत कभी इतनी ऊपर नहीं पहुंची थी। इसे जारी रखने का फैसला तब आया है जब ओपेक+ के बाकी सदस्य उत्पादन कटौती को अगले साल तक बढ़ाने पर सहमत हुए हैं। इसका असर ये होगा कि वैश्विक बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ेंगी, तो भारत में भी तेल की कीमतों में राहत की गुंजाइश खत्म हो जाएगी, ये तो ट्रेलर है। क्योंकि सऊदी अरब और रूस की ओर से जो बयान जारी हुआ है वो इस टेंशन को और बढ़ा सकता है। सऊदी अरब की सरकारी न्यूज एजेंसी सऊदी प्रेस एजेंसी की तरफ से कहा गया कि देश अभी भी ऑयल मार्केट की निगरानी कर रहा है, जरूरत पड़ी तो आगे भी तेल कटौती जारी रहेगी। वहीं रूस की समाचार एजेंसी TASS की और से कहा गया है कि रूस तेल उत्पादन में रोजाना 3 लाख की कौटती जारी रखेगा।
पिक्चर एक दम साफ है कि सऊदी अरब और रूस की जुगलबंदी ने दुनिया के दूसरे देशों को महंगा क्रूड खरीदने पर मजबूर कर दिया है। भारत लगातार रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीद रहा था, लेकिन अब वो दिन लद गए हैं। रूस और सऊदी अरब के साथ में लिए इस फ़ैसले को बड़े एक्पोटर्स के बीच एकता दिखाने के तौर पर देखा जा रहा है। एनर्जी एक्सपर्ट्स के मुताबिक, क्रूड ऑयल की कीमतों में इस साल तेजी बनी रह सकती है। प्रॉडक्शन में कटौती की वजह से ऐसा होगा। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में क्या होता है।
Also Read: Pakistan में iPhone की कीमत 7 लाख रुपये?