Mukesh Ambani अब 150 अरब डॉलर के मार्केट में मचाएंगे तहलका!
रिलायंस रिटेल खुद की डायग्नोस्टिक कंपनी बनाने की प्लानिंग कर रही है। कंपनी का प्लान है कि इस डायग्नोस्टिक कंपनी का नेटवर्क पूरे देश में हो। रिपोर्ट के मुताबिक रिलायंस रिटेल वेंचर्स कई ऑप्शंस पर काम कर रही है। खबर ये भी है कि मिडियम टर्म में इस पर कोई डील भी की जा सकती है। अभी रिलायंस की ओर से इस पर कोई कॉमेंट नहीं आया है।

एशिया के सबसे अमीर बिजनेसमैन Mukesh Ambani टेलिकॉम और रिटेल में तहलका मचाने के अब एक नए मार्केट में बड़ा बज क्रिएट करने जा रहे हैं। हम यहां बात कर रहे हैं डायग्नोस्टिक सेगमेंट की। यानि अब सबकुछ प्लान के हिसाब से हुआ तो रिलायंस की नई कंपनी आपके खून की जांच और बॉडी से जु़ड़े टेस्ट करते हुए भी दिख सकती है। रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी के मार्केट में बहुत पॉटेंशियल दिखता है। पिछले 5 सालों में भारतीय डायग्नोस्टिक सेक्टर सालाना आधार पर 14 प्रतिशत के हिसाब से बढ़ा है। लेकिन 150 अरब डॉलर की इस मार्केट में रीजनल कंपनियों का काफी दबदबा है। तो कैसे रिलायंस एक बार फिर टेलिकॉम और रिटेल की तरह इस इस डायग्नोस्टिक सेगमेंट में अपनी जगह बनाएगी आइये समझते हैं।
मुकेश अंबानी
तो मुकेश अंबानी डायग्नोस्टिक हेल्थकेयर सेगमेंट में अपने हाथ आजमाने जा रहे हैं। इस सेगमेंट की अगुवाई और कोई नहीं बल्कि रिलायंस रिटेल वेंचर्स करेगी। कंपनी ने इसके लिए पूरा प्लान बना लिया है। जानकारी के मुताबिक मुकेश अंबानी की रिलायंस रिटेल वेंचर्स, डायग्नोस्टिक सर्विस कंपनी में 1,000 से 3,000 करोड़ रुपए के मैज्योरिटी स्टेक खरीदने की प्लानिंग कर रही है। इसका मतलब ये हुआ कि रिलायंस किसी डायग्नोस्टिक कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने का सौदा कर सकती है। रिलायंस रिटेल वेंचर्स की योजना टारगेट कंपनी में मैज्योरिटी स्टेक खरीदने की है।
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मीडिया रिपोर्ट
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रिलायंस रिटेल खुद की डायग्नोस्टिक कंपनी बनाने की प्लानिंग कर रही है। कंपनी का प्लान है कि इस डायग्नोस्टिक कंपनी का नेटवर्क पूरे देश में हो। रिपोर्ट के मुताबिक रिलायंस रिटेल वेंचर्स कई ऑप्शंस पर काम कर रही है। खबर ये भी है कि मिडियम टर्म में इस पर कोई डील भी की जा सकती है। अभी रिलायंस की ओर से इस पर कोई कॉमेंट नहीं आया है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने नेटमेड्स का अधिग्रहण
ये तैयारी हाल फिलहाल की नहीं है बल्कि काफी पहले से चल रही थी। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने नेटमेड्स का अधिग्रहण 2020 में किया था. उस समय मुकेश अंबानी की कंपनी ने 620 करोड़ रुपये में नेटमेड्स की मैच्योरिटी स्टेक को खरीदा था। नेटमेड्स पहले सिर्फ ऑनलाइन काम करती थी। रिलायंस के जरिए अधिग्रहण के बाद अब नेटमेड्स की ऑफलाइन उपस्थिति भी है। उसका पहला ऑफलाइन स्टोर जनवरी 2023 में खुला था। अब तक उसके देश भर में 1000 से ज्यादा आउटलेट खुल चुके हैं। बीते वित्त वर्ष कंपनी का रेवेन्यू 3 लाख करोड़ रुपए के पार चला गया था। नेटमेड्स का कई डायग्नोस्टिक सर्विस प्रोवाइडर्स जैसे थायरोकेयर, हेल्दियन्स आदि के साथ टाई-अप है. इन साझेदारियों के जरिए नेटमेड्स ग्राहकों को पैथोलॉजी की सेवाएं मुहैया कराती है। नेटमेड्स ऑनलाइन और ऑफलाइन कई तरह की दवाओं की बिक्री भी करती है.
इस सेगमेंट में मुकेश अंबानी कि एंट्री
अब यहां सवाल उठता है कि आखिर क्यों इस सेगमेंट में मुकेश अंबानी एंट्री करना चाहते हैं और रीजनल प्लेयर्स के सामने कैसे रिलायंस कैसे एक बार फिर बज क्रिएट करेगा? मुकेश अंबानी इस सेगमेंट में यूं ही नहीं एंट्री करना चाहते हैं। इस सेक्टर का कारोबार 150 अरब डॉलर का बताया जा रहा है। एमके रिसर्च के एक नोट के मुताबिक इस सेगमेंट में चार टॉप कंपनियों की हिस्सेदारी सिर्फ 6% है। बाकी पर रीजनल प्लेयर्स की धमक है। पहले कोरोना जैसी महामारी, उसके बाद बढ़ते हार्टटैक और कई तरह की बीमारियां से इस सेक्टर को लेकर लगातार मांग बढ़ रही है। बीते 3 साल की बात करें तो डायग्नोस्टिक सेक्टर में कई बड़े अधिग्रहण देखने को मिले हैं। कोविड ऐरा में डॉ. लाल पैथ लैब ने सबअर्बन डायग्नोस्टिक की हिस्सेदारी अपने नाम की थी। फार्मईजी ने थायरोकेयर में मैज्योरिटी स्टेक हासिल किया था। जिसकी वैल्यू 4,546 करोड़ रुपए थी। मेट्रोपोलिस ने भी हाईटेक डायग्नोस्टिक सेंटर को 636 करोड़ रुपए में अपने नाम किया था। तो ऐसे में मुकेश अंबानी इस मौके को गंवाने नहीं देना चाहते हैं।