वेदांता का 20 अरब डॉलर का इंवेस्टमेंट प्लान! डिमर्जर के बाद अल्युमिनियम सहित अन्य कारोबार में करेगी विस्तार

डिमर्जर के बाद वेदांता अब बड़े निवेश की तैयारी में है। कंपनी आने वाले 3 से 5 साल में 20 बिलियन डॉलर लगाने की योजना बना रही है। फोकस कर्ज घटाने, कम लागत बनाए रखने और अल्युमिनियम-जिंक जैसे कारोबारों को आगे बढ़ाने पर है। पढ़ें पूरी खबर।

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In Short

  • वेदांता डिमर्जर के बाद अगले 3 से 5 साल में करीब 20 बिलियन डॉलर निवेश की तैयारी कर रही है।
  • कंपनी का बड़ा फोकस कर्ज घटाने और अंदरूनी कैश जेनरेशन से निवेश पूरा करने पर है।
  • वेदांता का सबसे बड़ा दांव अल्युमिनियम और जिंक कारोबार पर माना जा रहा है।

By Gaurav Kumar:

 Vedanta investment plan: वेदांता समूह आने वाले 3 से 5 साल में बड़ा निवेश करने की तैयारी कर रहा है। कंपनी करीब 20 बिलियन डॉलर लगाने की योजना बना रही है। इसका बड़ा हिस्सा कंपनी अपने अंदरूनी कैश जेनरेशन से जुटाना चाहती है। यह तैयारी Vedanta Ltd के डिमर्जर के बाद हो रही है, जिसमें 5 अलग-अलग लिस्टेड कंपनियां बन रही हैं।

कंपनी का कहना है कि डिमर्जर का मकसद शेयरहोल्डर वैल्यू बढ़ाना है। हालांकि, Vedanta Resources का कर्ज घटाना भी इस पूरी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

कर्ज घटाने पर फोकस

राकेश अरोड़ा के मुताबिक, Vedanta Resources का कर्ज FY22 में 8.9 बिलियन डॉलर था, जो FY26 के अंत तक घटकर 4.7 बिलियन डॉलर हो गया। Vedanta Ltd का net debt to EBITDA ratio भी कम हुआ है। यह FY24 में 1.61x था, FY25 में 1.2x और FY26 में 0.95x पर आ गया।

अरोड़ा का कहना है कि अब दबाव काफी कम हुआ है। उनके मुताबिक, Vedanta Aluminium या Hindustan Zinc में 5 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचना आसान हो सकता है। इन कंपनियों से मिलने वाला डिविडेंड भी कर्ज चुकाने में मदद कर सकता है।

कम लागत को ताकत मान रही कंपनी

अनिल अग्रवाल का कहना है कि अल्युमिनियम, जिंक, सिल्वर, पावर या स्टील, कई कारोबारों में कंपनी की लागत काफी कम है। अरोड़ा के मुताबिक, Hindustan Zinc की लागत FY26 की आखिरी तिमाही में 903 डॉलर प्रति टन रही, जो ग्लोबल औसत से 30 से 35 प्रतिशत कम थी।

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जिंक कारोबार 50 प्रतिशत से ज्यादा EBITDA मार्जिन दे रहा है। वहीं FY26 में अल्युमिनियम लागत 1,752 डॉलर प्रति टन रही। Balco में लागत 2,313 डॉलर से घटकर 1,792 डॉलर प्रति टन पर आ गई।

अल्युमिनियम और जिंक पर बड़ा दांव

वेदांता की रणनीति में सबसे ज्यादा फोकस अल्युमिनियम और जिंक पर दिख रहा है। अरोड़ा के मुताबिक, अगर अल्युमिनियम की कीमत 10 प्रतिशत बढ़ती है, तो EBITDA में 641 मिलियन डॉलर जुड़ सकते हैं। जिंक में यही असर 278 मिलियन डॉलर और ऑयल में 38 मिलियन डॉलर का हो सकता है।

Kotak Institutional Equities के मुताबिक, Vedanta Aluminium की भारत में क्षमता हिस्सेदारी 62 प्रतिशत है। करीब 2.9 mtpa क्षमता के साथ यह ग्लोबल स्तर पर बड़े उत्पादकों में शामिल है।

कहां जाएगा 20 बिलियन डॉलर निवेश?

राज गायकड़ के मुताबिक, 3 से 5 साल के 20 बिलियन डॉलर कैपेक्स में करीब 4 बिलियन डॉलर ऑयल एंड गैस पर जा सकता है। करीब 4 बिलियन डॉलर अल्युमिनियम पर खर्च हो सकता है। इसके अलावा 2.5 बिलियन डॉलर पावर, 2 बिलियन डॉलर जिंक और सिल्वर और 7.5 बिलियन डॉलर आयरन ओर, स्टील और दूसरे कारोबारों के लिए रखे जा सकते हैं।

आगे किस पर रहेगी नजर?

कंपनी राजस्थान में फॉस्फेट फर्टिलाइजर प्लांट लगाना चाहती है। भारत में अल्यूमिना विस्तार, बॉक्साइट-कोल इंटीग्रेशन और Gamsberg जिंक विस्तार जैसी योजनाएं भी आगे हैं।

वेदांता पहले Foxconn के साथ सेमीकंडक्टर JV तक गई थी, लेकिन बाद में उससे पीछे हट गई। अब अनिल अग्रवाल साफ कह रहे हैं कि कंपनी का फोकस 5 कंपनियों और नैचुरल रिसोर्सेज पर है। अब नजर इस बात पर होगी कि डिमर्जर के बाद वेदांता कम लागत और बड़े निवेश के दम पर कितना डिलीवर कर पाती है।

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