बारिश की कमी से फसल पर संकट, USDA ने चावल उत्पादन घटने की जताई आशंका
कमजोर मानसून बारिश का असर अब भारत की प्रमुख फसल चावल पर पड़ने की आशंका है। USDA की रिपोर्ट के अनुसार 2026-27 सीजन में देश का चावल उत्पादन करीब 4.5 फीसदी घट सकता है। वहीं मक्का उत्पादन में भी गिरावट का अनुमान लगाया गया है। निर्यात को लेकर उम्मीद बरकरार है।

In Short
- USDA की रिपोर्ट के मुताबिक 2026-27 सीजन में भारत का चावल उत्पादन 4.5% घटकर करीब 147 मिलियन टन रहने का अनुमान है।
- कमजोर मानसून बारिश का असर फसलों की पैदावार पर पड़ सकता है। अगस्त और सितंबर में सामान्य से कम बारिश से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
- भारत का चावल निर्यात बढ़ने का अनुमान है। USDA के अनुसार 2026-27 में निर्यात 23 मिलियन टन से बढ़कर 25 मिलियन टन हो सकता है।
भारत में 2026-27 सीजन में चावल का उत्पादन पिछले साल के मुकाबले कम रहने का अनुमान लगाया गया है। कमजोर मानसून बारिश और कम पैदावार की आशंका के कारण चावल उत्पादन में गिरावट आने की संभावना है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) की फॉरेन एग्रीकल्चरल सर्विस की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026-27 मार्केटिंग ईयर में भारत का चावल उत्पादन करीब 4.5 फीसदी घट सकता है।
147 मिलियन टन रह सकता है चावल उत्पादन
USDA के मुताबिक, 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले मार्केटिंग ईयर में भारत का चावल उत्पादन घटकर करीब 147 मिलियन टन रह सकता है। पिछले साल यह उत्पादन लगभग 154 मिलियन टन था।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि अगस्त और सितंबर में सामान्य से कम बारिश का असर मानसूनी फसलों की पैदावार पर पड़ सकता है। इसके अलावा सर्दियों में होने वाली बुवाई की कमजोर संभावनाएं भी उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं।
बारिश की कमी से फसलों पर दबाव
USDA रिपोर्ट के अनुसार, कम बारिश के कारण फसलों की पैदावार पर असर पड़ने की संभावना है। मानसून फसलों के लिए अगस्त और सितंबर की बारिश अहम होती है और इस दौरान कमजोर बारिश उत्पादन को कम कर सकती है।
चावल निर्यात बढ़ने का अनुमान
उत्पादन में गिरावट के बावजूद भारत के चावल निर्यात में बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है। USDA के अनुसार, 2026-27 में भारत का चावल निर्यात बढ़कर 25 मिलियन टन रह सकता है, जबकि पिछले साल यह करीब 23 मिलियन टन था।
मक्का उत्पादन में भी गिरावट का अनुमान
रिपोर्ट में भारत के मक्का उत्पादन को लेकर भी कमी का अनुमान लगाया गया है। 1 नवंबर से शुरू होने वाले मार्केटिंग ईयर में मक्का उत्पादन घटकर 50 मिलियन टन रह सकता है। पिछले साल यह आंकड़ा 55.1 मिलियन टन था।
USDA ने बताया कि मक्का की बुवाई में करीब दो हफ्ते की देरी हुई और कुछ प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों में फसलों को नमी की कमी का सामना करना पड़ा।
कमजोर मानसून से बढ़ सकते हैं जोखिम
रिपोर्ट में भारत में असमान मानसूनी बारिश को फसल और महंगाई के जोखिम से जोड़कर देखा गया है। बारिश में कमजोरी का असर कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है और आने वाले समय में बाजार पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।