Global Oil Crisis: क्या फिर $120 तक जाएगा कच्चा तेल? US-ईरान जंग ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन
मिडिल ईस्ट में फिर भड़की जंग ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका-ईरान जंग तेज होने से कच्चा तेल फिर दुनिया को डरा रहा है। ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर के पास पहुंच गया है। जानिए इससे आम लोगों की जेब पर कितना बोझ बढ़ेगा।

In Short
- अमेरिका-ईरान जंग तेज होने से ब्रेंट क्रूड की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई है।
- होर्मुज स्ट्रेट बंद रहने पर कच्चा तेल फिर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने का डर बढ़ गया है।
- तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल के दाम और महंगाई बढ़ने का खतरा है।
Crude Oil Price: अमेरिका और ईरान के बीच जंग फिर तेज होने से मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है। अमेरिका के ईरान पर हमलों और ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी तेजी आई है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल की सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
इसके बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 5% से ज्यादा चढ़ी है, जबकि WTI क्रूड में 4% से अधिक की तेजी देखने को मिली है। तेल के बढ़ते दामों ने दुनिया के कई देशों में महंगाई का डर फिर से बढ़ा दिया है।
ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर के करीब
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को ब्रेंट क्रूड करीब 5% की तेजी के साथ 80 डॉलर प्रति बैरल के पास कारोबार कर रहा था। वहीं WTI क्रूड की कीमत 4% से ज्यादा बढ़कर करीब 75 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई।
मर्बन क्रूड में भी अचानक 5.50% की बढ़ोतरी दर्ज की गई और इसका भाव भी 75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। जंग और होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट की आशंका को तेल की कीमतों में तेजी की बड़ी वजह माना जा रहा है।
तेल सप्लाई पर फिर संकट
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए थे। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की और होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया था।
दुनिया की करीब 20% तेल जरूरत की सप्लाई इसी समुद्री रास्ते से होती है। मार्च और अप्रैल 2026 में होर्मुज बंद होने के बाद कच्चे तेल की कीमत करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी।
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उस दौरान भारत पाकिस्तान बांग्लादेश साउथ कोरिया और ब्रिटेन समेत कई देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े थे। LPG की सप्लाई को लेकर भी परेशानी देखने को मिली थी। अब दोबारा वैसे ही हालात बनने का डर बढ़ रहा है।
महंगाई से क्या है कनेक्शन
कच्चा तेल महंगा होने से तेल खरीदने वाले देशों का खर्च बढ़ जाता है। भारत के मामले में जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में 1 डॉलर प्रति बैरल की तेजी से पेट्रोल-डीजल के दाम 50 से 60 पैसे प्रति लीटर तक बढ़ सकते हैं।
हालांकि पेट्रोल-डीजल की कीमत केवल कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करती, लेकिन इसमें क्रूड की बड़ी भूमिका होती है।
आम लोगों पर बढ़ सकता है बोझ
तेल कंपनियां जब महंगा कच्चा तेल खरीदती हैं तो उनका खर्च बढ़ता है। इस नुकसान की भरपाई के लिए फ्यूल की कीमतें बढ़ाई जा सकती हैं।
मई में सरकारी तेल कंपनियों ने चार बार में पेट्रोल-डीजल के दाम करीब 7 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए थे। ऐसे में जंग और होर्मुज की रुकावट जारी रही तो भारत समेत तेल आयात पर निर्भर कई देशों में महंगाई का खतरा और बढ़ सकता है।